बावली की जमीन110 दिन- गरीब की मौत का मुआवजा 6 लाख अमीर जान की कीमत 1 करोड़ ..?

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गरीब की मौत का मुआवजा 6 लाख अमीर जान की कीमत 1 करोड़ ??

  किरन टॉकीज शहडोल स्थित दुर्गा पूजा बावली की जमीन बचाने चल रहे आंदोलन संघर्ष केआंदोलन के आज 110 दिन पूरे हुए । कलाकार खासकर गायक किसी भी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वह अपने गाय की कला के माध्यम से लोगों को प्रेरित करते हैं भावनाओं को व्यक्त करते हैं जागरूकता बढ़ाते हैं कलाकार अपनी कला के माध्यम से सामाजिक राजनीतिक या संस्कृतिक मुद्दो पर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कवियों और गायको ने देशभक्ति के गीत गाकर लोगों में उत्साह भरा और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया गायको की भूमिका किसी भी आंदोलन संघर्ष के लिए बहुत शक्तिशाली होती है गायकी संगीत के क्षेत्र में देश-विदेश में नाम शोहरत कमाने वाले शहडोल निवासी अपने शहर शहडोल की शान सोनू खान आज अनशन के मंच नौजवान लोगों में उत्साह भरने और तमाम लोगों की हौसला अफजाई के लिए आंदोलन को विस्तार देने मौजूद थे । सोनू खान ने राष्ट्रपिता विश्व नेता महात्मा गांधी के चित्र पर मालाएं चढ़ाई तत्पश्चातआज अनशन पर बैठने वाले युवा समाजसेवी जियाउल इस्लाम शहडोल शहर के जाने-माने फोटोग्राफर रियाज अहमद को तिलक लगाकर मलाई पहनकर अनशन पर बिठाया। सोनू खान ने चंद लाइने गुनगुना कर “हर करम अपना करेंगे ए वतन तेरे लिए दिल दिया है जान भी देंगे ए वतन तेरे लिए…” नौजवान लोगों में देशभक्ति का जज्बा पैदा किया ।

आज हम हमारे साथी कोटमा ग्राम के पूर्व सरपंच रोहिणी प्रसाद जायसवाल शहडोल के समाज सेवी राजेंद्र रजक कुक्कू अंश सोनी आदि सीवर लाइन में काम कर रहे कोटमा ग्राम के निवासी मृतक दादूराम महिपाल बैगा के घर उनके परिवार जनों से मुलाकात करने गए थे मृतक की पत्नी अनीता व मृतक के भाई वह दादा से मुलाकात हुई मृतक महिपाल बैगा के दो बेटियां हैं एक बेटी 14 वर्ष की है एक बेटी उससे छोटी है इन दो मासूम बच्चियों के सर से पिता का साया उठ गया .हम सभी इस गरीब आदिवासी बैगा परिवार के दुख की घड़ी में साथ है।
सोशल मीडिया व समाचार पत्रों से जानकारी लगी कि दोनों मृतक बैगा परिवारों पीसी स्नेह ग्रुप अहमदाबाद गुजरात की कंपनी जो शहडोल शहर में सीवर पाइपलाइन डालने का काम मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एमपी यूडीसी द्वारा कराया जा रहा है कंपनी द्वारा भारी बरसात में 14 फीट नीचे बिना किसी सुरक्षा के मौत के मुंह में मजदूरों को भेज कर कार्य जा रहा था कंपनी के लापरवाही के चलते कोतमा निवासी दादूराम महिपाल उमर 37 वर्ष लालू भाई का 36 वर्ष की मौत मिट्टी के दशकने से हो गई यह गरीबों की मौत सामान्य मौत नहीं बल्कि कंपनी के द्वारा बिना सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को बरसते पानी में सीवर लाइन में काम करने से मौत के मुंह में डाल दिया अंततः उन गरीबों की मौत हो गई यदि तत्काल सहायता मिल जाती तो उन्हें बचाया जा सकता था क्योंकि मिट्टी के नीचे दबने वाले बहुत ही अति गरीब थे इसलिए जान बचाने रहता कर में लापरवाही बढ़ती गई जिले का प्रशासन भी सुस्त चाल कार्रवाई देखता रहा ।
बैगा जनजाति को भारत सरकार व प्रदेश सरकार बैगा प्रोजेक्ट चला कर उन्हें संरक्षित करती चली आ रही थी, क्योंकि उनकी घटती जनसंख्या घोर चिंता का विषय थी, नगर पालिका परिषद में आज भी उनके नाम का एक अलग रजिस्टर रखा रहता है की शहर में कितने बैगा हैं, एक ओर सरकार पचासों साल से उन्हें बचाने बढ़ाने में लगी थी कि ये बैगा आदिवासी विलुप्त होते जा रहें है, भारी विडंबना है कि सरकार के ही लोग इनकि हत्या की अनदेखी कर ठेका कंपनी को बचा रहें हैं ?
जिस कंपनी की कार्य प्रणाली के कारण गरीबों को मौत मिली उन्हें कंपनी के द्वारा ₹6 लख रुपए मृतक के परिजनों को विधायक और भाजपा अध्यक्ष जैसे कंपनी के प्रतिनिधि बनकर चेक देने घर जाकर फोटो खिंचवाकर गरीब की मौत पर वह वही ले रहे थे शर्म आनी चाहिए । कंपनी ने जो लापरवाही करी उसे अपराध से बचने के लिए गरीब की मौत का मुआवजा 6 लाख दिया गया है गुजरात में विमान हादसे में मारे प्रत्येक व्यक्ति को एक करोड रुपए मुआवजा दिया गया । यह अमीर और गरीब का फर्क है ।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  से यह मांग है कि 2 करोड रुपए का मुआवजा गरीबों को प्रदान करें और सीवर लाइन कंपनी पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दें और इस कंपनी को मध्य प्रदेश में कार्य करने के लिए ब्लैक लिस्ट करें शायद तभी न्याय हो सकेगा।


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