
मृत, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं रह सकते: सीईसी कुमार
नयी दिल्ली: 24 जुलाई (भाषा) बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयोग किसी प्रभाव में आकर मृतकों, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों या कई जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दे सकता।उनकी यह टिप्पणी विपक्षी दलों द्वारा बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आयोग पर बढ़ते हमलों के बीच आई है।
अनिल अंबानी समूह के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण ‘धोखाधड़ी’ मामले में ईडी के छापे
मुंबई: (24 जुलाई)
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ कथित तौर पर 3,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में कई जगहों पर छापे मारे।उन्होंने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुंबई में 50 कंपनियों और 25 व्यक्तियों के 35 से अधिक परिसरों की तलाशी ली जा रही है।यह जाँच ईडी की दिल्ली स्थित जाँच इकाई द्वारा की जा रही है।ईडी सूत्रों ने बताया कि वे 2017 और 2019 के बीच अंबानी की समूह कंपनियों को यस बैंक द्वारा दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध ऋण डायवर्जन के आरोपों की जाँच कर रहे हैं।समूह की दो कंपनियों, रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अलग-अलग लेकिन एक जैसी नियामकीय जानकारियों में कहा है कि ईडी की कार्रवाई का उनके व्यावसायिक संचालन, वित्तीय प्रदर्शन, शेयरधारकों, कर्मचारियों या किसी अन्य हितधारक पर “बिल्कुल कोई प्रभाव नहीं” पड़ा है।कंपनियों ने कहा, “मीडिया रिपोर्ट्स रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) या रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के 10 साल से ज़्यादा पुराने लेन-देन से संबंधित आरोपों से संबंधित प्रतीत होती हैं।”
सूत्रों ने बताया कि ईडी ने पाया है कि ऋण दिए जाने से ठीक पहले, यस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन “प्राप्त” हुआ था।संघीय जाँच एजेंसी “रिश्वत” और ऋण के इस गठजोड़ की जाँच कर रही है।सूत्रों ने बताया कि ईडी अनिल अंबानी समूह की कंपनियों को यस बैंक द्वारा ऋण स्वीकृतियों में “घोर उल्लंघनों” के आरोपों की भी जाँच कर रहा है, जिसमें पिछली तारीख के क्रेडिट अनुमोदन ज्ञापन (सीएएम), बैंक की ऋण नीति का उल्लंघन करते हुए बिना किसी उचित जाँच/क्रेडिट विश्लेषण के प्रस्तावित निवेश जैसे आरोप शामिल हैं।कथित तौर पर इन ऋणों को संबंधित संस्थाओं द्वारा कई समूह कंपनियों और मुखौटा कंपनियों में “डायवर्ट” किया गया है। बताया कि एजेंसी कमजोर वित्तीय स्थिति वाली संस्थाओं को दिए गए ऋणों, ऋणों के उचित दस्तावेज़ीकरण और उचित जाँच-पड़ताल की कमी, समान पते वाले उधारकर्ताओं और उनकी कंपनियों में समान निदेशकों आदि के कुछ मामलों की भी जाँच कर रही हैउन्होंने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला कम से कम दो सीबीआई प्राथमिकियों और राष्ट्रीय आवास बैंक, सेबी, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा साझा की गई रिपोर्टों से उपजा है।सूत्रों ने कहा कि ये रिपोर्टें संकेत देती हैं कि बैंकों, शेयरधारकों, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को धोखा देकर जनता के धन को डायवर्ट करने या गबन करने की एक “सुनियोजित और सोची-समझी योजना” थी।समझा जाता है कि आरएचएफएल पर सेबी की एक रिपोर्ट भी ईडी की जाँच का हिस्सा है।
बाजार नियामक के निष्कर्षों के अनुसार, आरएचएफएल द्वारा कॉर्पोरेट ऋणों में वृद्धि देखी गई, जो वित्त वर्ष 2017-18 में 3,742.60 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670.80 करोड़ रुपये हो गई।कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई अपनी फाइलिंग में यह भी कहा कि अनिल अंबानी रिलायंस पावर या रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के बोर्ड में नहीं थे और उनका आरकॉम या आरएचएफएल से कोई “व्यावसायिक या वित्तीय संबंध” नहीं था।कंपनियों ने कहा कि आरकॉम या आरएचएफएल के खिलाफ की गई किसी भी कार्रवाई का रिलायंस पावर या रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन, प्रबंधन या संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

