
कुदरी- जमीन में दिखे एक फूल के दो माली एक से 5 लाख तो दूसरों से मिले करोड़ों पर केवल चेक…
शहडोल-
आज जनसुनवाई में कुदरी की जमीन का मामला कलेक्टर के दरबार में पहुंचे शिकायतकर्ता सुनील शर्मा ने अपनी आवेदन में कहा है कि उसे कुदरी की जमीन देने के एवरेज में ₹500000 अनुबंध के साथ ले लिया गया लेकिन जैसे ही जमीन विक्रय की चर्चा सामने आई जानकार ने रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किसी और से कर दिया यह जानते हुए कि इस जमीन पर ₹500000 जमीन मालिक के द्वारा लिया जा चुका है ऐसी स्थिति में दुविधा में फंसे सुनील शर्मा ने कलेक्टर के सामने अपनी गुहार लगाई
सुनील ने अपने आवेदन पत्र में कह आरोपी अनीता बर्मन पति रामरतन बर्मन निवासीग्राम-छतवई, तह सोहागपुर जिला शहडोल के द्वारा अपने सह- स्वामित्व की भूमि स्थित राजस्व ग्राम कुदरी पह० चांपा तहसील सोहागपुर जिला शहडोल (म0प्र0) खसरा नम्बर 418/1 रकवा 0.790 हे0 जुज भाग रक: 0.131 हे0 भूमि को विक्रय हेतु 55,00,000/- के एवज में अनुबंध दिनांक 12.07.2025 लिखाते हुए अनुबंध राशि की अग्रिम राशि, 5,00,000/- रुपये प्राप्त किये जाने व अनुबंध पत्र दिनांक 12.07.2025 पंजीकृत कराते हुए भूमि मुझे ही विक्रय करने का वचन दिया, उक्त भूमि का विक्रय पंजीयन अरोपी न कराते हुए प्रार्थी से प्राप्त राशि हड़प लिए जाने व प्रार्थी के साथ छल व धोखाधडी करते हुए सौरम प्रताप सिंह पिता शिवमोहन सिंहनिवासी–जमुई थाना तहसील सोहागपुर जिला शहडोल, अमित कुमार पिता हर्षनारायण निवासी-ऍताझरथाना सिंहपुर तहसील सोहागपुर जिला शहडोल, प्रकाश द्विवेदी पिता प्रदीप द्विवेदी निवासी-मिठौरी थाना
सिंहपुर तहसील सोहागपुर जिला शहडोल, को प्रतिफल राशि-3,80,00,000, पजेशन फीस-3,04,000, स्टाम्प
कोड़-01013412092025006304, स्टाम्पिंग तिथि- 12.09.2025 02:49:33 पी0एम. पंजीयन प्रारम्भ आईडी- R- 11092501341595 के द्वारा दोबारा अनुबंध पत्र निष्पादित किये जाने से तथा दिनांक 12.07.2025 को अनुबंध पत्र को छिपाये जाने उसे काफी क्षति हुई है और उसकी जमा रकम भी लफड़े में फंस गई है
सुनील शर्मा के अनुसार शहडोल भूमि राजस्व ग्राम कुदरी थाना सोहागपुर जिला शहडोल की है आरोपी अनीता बर्मन पिता श्री शम्भूदयाल वर्मन निवासीग्राम-छतवई, तहसील सोहागपुर जिला शहडोल (म0प्र0) ने प्रार्थी से मिलकर बताया कि उसकी पुस्तैनी सह-स्वामित्व व कब्जे की भूमि राजस्व ग्राम कुदरी पoह० चांपा थाना व तहसील सोहागपुर में स्थित है, जिसका भूमि खसरा नम्बर 418/1 स्कवा 0.790 हे० है, जिसके जुज भाग रकवा 0.131 हे0 को 55,00,000/- के एवज में विक्रय करना है, जिस पर प्रार्थी सहमत हुआ, और दोनों के द्वारा द्वारा संविदा को लिखित में अनुबंध दिनांक 12.07 2025 को लिखाते हुए नोटरी के समक्ष पंजीबद्ध किया गया, अनुबंध राशि की आंशिक अग्रिम राशि विक्रेता ने नग अनुसार 5,00,000/- रुपये प्रार्थी से प्राप्त किया तथा शेष बकाया राशि 50,00,000/- सह-स्वामित्व – बटवारा कराने के बाद विक्रय पंजीयन के समय प्राप्त करने का कथन किया।
किंतु उक्त भूमि को अनुबंधपत्र होने के बाद भी अन्य तृतीय व्यक्ति के पक्ष में जमीन बेचने की आहट हुई। उसकी जानकारी लगते ही प्रार्थी द्वारा अनुबंध पत्र/विक्रय पत्र /मुख्यतारनामा आम का पंजीयन न किये जाने हेतु आपत्ति दिनांक 09.09.2025 को प्रस्तुत किया तथा समाचार पत्र में दिनांक 14.09.2025 को आम सूचना प्रकासत कराया।
सुनील शर्मा के अनुसार दिनांक 14.09.2025 को जानकारी प्राप्त हुई कि आरोपी विक्रेता अपने अन्य सह-स्वामियों
के साथ मिलकर प्रार्थी को विक्रय हेतु अनुबन्धित भूमि का विक्रय अनुबन्ध पत्र सौरभ प्रताप सिंह पिता शिव मोहन सिंह निवासी–जमुई थाना तहसील सोहागपुर जिला शहडोल अमित कुमार पैता हर्षनारायण निवासी ऐंताझर थाना सिंहपुर तहसील सोहागपुर जिला शहडोल, प्रकाश द्विवेदी पिता प्रर्द द्विवेदी निवासी मिथौरी थाना सिंहपुर तहसील सोहागपुर जिला-शहडोल, प्रतिफल राशि- 3,80,00,000, फीस- 3,04,000, स्टाम्प कोड़- 01013412092025006304, ई- स्टाम्पिंग तिथि- 12.09.2025 02:49:3: पी0एम0, पंजीयन प्रारम्भ आईडी-R-11092501341595 को लिखाते हुए पंजीकृत करा दिया है, प्रार्थी के द्वारा किये गये – अनुबंध पत्र दिनांक 12.07.2025 को उल्लेखित नहीं किया है, इस प्रकार छल व कपटपूर्वक तरीके से उपपंजीयक के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किया है
सुनील शर्मा के अनुसार छल व कपट करते हुए बेईमानी पूर्वक आशय से अनबूझकर तथ्यों को छिपा कर प्रार्थी के साथ छल करते हुए प्रार्थी के साथ भूमि विक्रय अनुबन्ध पत्र लेख कराकर विश्वास दिलाते हुए 5,00,000/- पांच लाख रूपये की राशि प्राप्त कर प्रार्थी को नुकसान कारित करते हुए आरोपी ने प्रार्थी के साथ छल किया है।अब सुनील शर्मा अपने साथ हुई धोखाधड़ी से परेशान है उन्हें लगता है की ₹500000 भी टूट जाएंगे किंतु दूसरा पक्ष इस बात के लिए भी दबाव दे रहा है की सुनील चाहे तो उनके साथ कुछ नेगोशिएशन हो सकता है यह एक प्रकार की ब्रिज ऑफ एग्रीमेंट के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री के जरिए ब्लैकमेलिंग जैसा है देखना होगा के संबंध प्रशासन इस मामले में कितनी सजगता के साथ उपभोक्ता के हितों का ख्याल रख पाता है….?

