प्रशासन और उसके गुंडे संत के वेश में घूम रहे,शंकराचार्य की जान को खतरा 400 करोड़ की जमीन 139 साल पुराने स्कूल की लीज रद्द /अडाणी और भतीजे सागर को अमेरिकी समन को लेकर गतिरोध

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के अंदर और बाहर लगवाए 12 सीसीटीवी कैमरे

  Shankracharya In Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले में योगी सरकार से विवाद के  बीच, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बिगड़ा स्वास्थ्य, इतने दिनों से थे  धरने ...   प्रयागराज,समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार  प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच चले रहे विवाद को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के अंदर और बाहर 12 सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि ने बताया कि​​ ​​​यह हमारी मजबूरी है, क्योंकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सड़क पर बैठे हैं। प्रशासन और उसके गुंडे संत के वेश में घूम रहे हैं। उनसे शंकराचार्य की जान को खतरा है। रात में आकर वीडियो बनाते हैं। पकड़े जाने पर कहते हैं कि नोटिस देने आए हैं। अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत अभी खराब है। रात में उन्होंने दवा ली थी। शुक्रवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तेज बुखार था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को समझदार नेता बताया है। उनहोंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को सीएम होना चाहिए, जो समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई है। जो अकड़ में बैठा हो, उसे सीएम नहीं होना चाहिए। बता दें गुरुवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा था कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे स्नान करने की प्रार्थना करता हूं। बता दें 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से मारपीट कर उन्हें घसीटा गया। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस भेजे। पहले में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने और दूसरे में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए।

  वृंदावन    मंदिर के पूर्व अध्यक्ष ने कमेटी के अध्यक्ष और सचिव को भेजा कानूनी नोटिस मथुरा

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में चांदी की नई चौखट को लेकर छिड़ा विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। कानूनी नोटिस और परंपराओं की दुहाई के बीच, मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी ने वसंत पंचमी पर प्रस्तावित देहरी पूजन के अपने कार्यक्रम से कदम पीछे खींच लिए। शुक्रवार सुबह मंदिर में पूजन नहीं हुआ, जिसे लेकर मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरु हो गई। बता दें एक श्रद्धालु ने मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार के लिए करीब 10.5 किलो चांदी की देहरी भेंट की थी। 19 जनवरी को हुई कमेटी की 10वीं बैठक में अध्यक्ष अशोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वसंत पंचमी पर सुबह 8:30 बजे कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य इस नई देहरी का विधि-विधान से पूजन करेंगे। इस घोषणा के बाद मंदिर के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी के वकील संकल्प गोस्वामी ने कमेटी के अध्यक्ष और सचिव को कानूनी नोटिस भेज दिया। नोटिस में तर्क दिया गया कि देहरी पूजन हरिदासी संप्रदाय की एक नितांत पारंपरिक और आध्यात्मिक पूजा पद्धति है। इसे केवल उसी संप्रदाय के सदस्य या विशेष दीक्षित भक्त ही कर सकते हैं। गैर-संप्रदाय के सदस्यों द्वारा पूजन करना मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के खिलाफ है।

 

 अडाणी और भतीजे सागर को समन को लेकर गतिरोध

नई दिल्ली (ईएमएस)।Gautam Adani Fraud News: Who is Sagar Adani, जिनपर US ने लगाए गंभीर आरोप -  YouTube अमेरिकी शेयर बाजार नियामक एसईसी और भारत के विधि मंत्रालय के बीच गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को समन भेजने को लेकर गतिरोध पैदा हुआ है। मंत्रालय ने तकनीकी आपत्तियों का हवाला देकर दो बार समन तामील करने से इंकार किया, जिसके बाद एसईसी ने अब अमेरिकी अदालत से ईमेल के जरिए नोटिस भेजने की अनुमति मांगी है। दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार ने मई और दिसंबर 2025 में दो अलग-अलग मौकों पर समन लौटा दिए। पहली बार मई 2025 में समन लौटाया गया था। मंत्रालय ने कहा कि एसईसी के कवर लेटर पर इंक सिग्नेचर (असली हस्ताक्षर) नहीं थे और जरूरी फॉर्म पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी थी। दूसरी आपत्ति दिसंबर 2025 में दर्ज हुई थी। भारत के विधि मंत्रालय ने एसईसी के ही एक आंतरिक नियम का हवाला देकर कहा कि समन जारी करना एसईसी के उन प्रवर्तन टूल की श्रेणी में नहीं आता जो इस नियम के तहत कवर होते हैं। सरल शब्दों में, मंत्रालय ने एसईसी के समन जारी करने के अधिकार पर ही तकनीकी सवाल उठाए। एसईसी ने न्यूयॉर्क की अदालत में दी गई अपनी अर्जी में भारत सरकार के मंत्रालय के तर्कों को निराधार बताया है।इस खबर के सामने आने के बाद शुक्रवार को अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। ग्रुप की कुल मार्केट कैप में करीब 1 लाख करोड़ की कमी आई, जिसमें अडाणी ग्रीन के शेयर सबसे ज्यादा (करीब 14.6 प्रतिशत) गिरे।

400 करोड़ की जमीन ;139 साल पुराने क्रिश्चियन कॉलेज  की लीज रद्द

इंदौर समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज के जमीन की लीज को रद्द कर दिया गया है। यह मामला पिछले 10 वर्षों से अलग-अलग न्यायालय से होते हुए कलेक्टर न्यायालय में लंबित था। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है। जिस उद्देश्य के लिए जमीन दी गई थी। वह अब पूरा नहीं हो रहा है, जिसके कारण जमीन का आवंटन निरस्त करते हुए कलेक्टर ने तहसीलदार को 3 दिन के अंदर कब्जा लेने के आदेश दिए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह जमीन लगभग 400 करोड रुपए की बताई जा रही है। 1887 में महारानी भागीरथी भाई द्वारा केनेडियन मिशन को, महिला अस्पताल एवं स्कूल खोलने के लिए यह जमीन लीज पर दी गई थी। 2015 में क्रिश्चियन कॉलेज द्वारा व्यावसायिक उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। जिस कार्य के लिए जमीन दी गई थी, उस काम मे उपयोग नहीं होने से यह लीज रद्द कर दी गई है। क्रिश्चियन कॉलेज में कई केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों ने यहां से पढ़ाई की है। फिल्म एक्टर किशोर कुमार, कांग्रेस नेता भूपेंद्र नाथ मिश्रा, भाजपा नेता विक्रम वर्मा, कांग्रेस नेता महेश जोशी, वर्तमान नगरी निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा मंत्री विजय शाह ने इस स्कूल में पढ़ाई की है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के विरुद्ध स्कूल प्रबंधन इस मामले की लड़ाई अब न्यायालय में लड़ने की तैयारी मे लग गया है।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई दो और मौतों के  पुल के पास रखकर चक्काजाम अति का अंत आक्रोश से होता है…भागीरथपुरा में इन्दौर नगर निगम द्वारा सप्लाई दूषित पानी से लगातार हों रही मौतों के बाद अब क्षेत्र के रहवासियों की संवेदना, दुख, मर्म और भावनाओं की जगह आक्रोश लेने लगा है और यह आज सुबह भागीरथपुरा में उस समय दिखाई दिया जब कल वहां दूषित पानी से हुई दो और मौतों के बाद एक मृतक बद्री प्रसाद के परिजनों ने उनके शव को भागीरथपुरा पुल के पास रखकर चक्काजाम कर प्रदर्शन करते स्थानीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित परिजनों का कहना है कि बद्री प्रसाद की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। इससे पहले वे पूरी तरह स्वस्थ थे। इसके बावजूद प्रशासन इस मौत को दूषित पानी से हुई मौत मानने से इनकार कर रहा है। परिवार ने यह भी बताया कि दो माह पहले बद्री प्रसाद की बहू की भी मौत हो चुकी है, जिससे परिवार पूरी तरह टूट चुका है।

 

 


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