अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को चेतावनी दी /नौगांव 3 दर्जन गायें भूख से मरीं /सुधरकर 91.62 प्रति डॉलर

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प्रयागराजअविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद एक मंच पर आएंगे चारों शंकराचार्य?  दिल्ली में होगा बड़ा आंदोलन | All four Shankaracharya Come together on one  a Stage after 19 ... समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। 48 घंटे के अंदर प्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेज दिया है। इस नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और फिर जबरन भीड़ में पालकी घुसाने को लेकर सवाल किया गया हैं। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेला से बैन किया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने कहा, योगी सरकार अब बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से नोटिस चस्पा किया। बुधवार देर रात प्रशासन का एक कर्मचारी शिविर में आया। कर्मचारी ने कहा कि आपने इस नोटिस का जवाब नहीं दिया। तब जाकर हमें इसकी जानकारी हुई। उन्होंने कहा, हम लोगों ने नोटिस देखा, तब उस नोटिस पर 18 जनवरी की डेट पड़ी थी। फिलहाल, नोटिस का जवाब तैयार है। जल्द प्रशासन को दिया जाएगा दूसरे नोटिस में अविमुक्तेश्वरानंद से 2 सवाल किए गए है। पहला मौनी अमावस्या के दिन अपने इमरजेंसी के लिए रिजर्व पांटून पुल पर लगा बैरियर तोड़ा। बिना अनुमति के बग्घी के साथ संगम जाने की कोशिश की। इससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया। आपके कारण सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ। दूसरा सवाल पूछा गया कि अपने खुद को शंकराचार्य बताकर मेला में बोर्ड लगाए हैं। जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तब संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं। इसके पहले, सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार मेला प्रशासन का नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे थे। हालांकि, शिष्यों ने रात को नोटिस लेने से मना किया था। इसके बाद मंगलवार सुबह 8 बजे कानूनगो दुबारे पहुंचे और शिविर के गेट पर पहला नोटिस चस्पा किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देकर पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया। 12 घंटे बाद, यानी मंगलवार रात 10 बजे अविमुक्तेश्वरानंद ने 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन को भिजवाया। अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया, तब मानहानि का केस करुंगा।

एक हफ्ते में 3 दर्जन गायें भूख से मरीं, जांच में चौंकाने वाला हुआ खुलासा

छतरपुरसमाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार  ... मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव में स्थित जिले की सबसे बड़ी बुंदेलखंड गौशाला में हो रही गायो की मौत की जांच करने प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। बीते एक हफ्ते में लगभग 3 दर्जन गायों की मौत हुई है जिसकी शिकायत गांव के लोगों ने जनसुनवाई मे की थी। इसके अलावा बीते ही हफ्ते कई डॉग्स ओर सियार की मौत भी गौशाला मे हुई है , आज जब नौगांव एसडीएम गोपाल शरण पटेल ने एक जांच टीम मौके पर भेजी तो तस्वीरों ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। गौशाला के मैनेजर ने बताया कि गौशाला के अंदर गायों के खाने की व्यवस्था ना होने के कारण रोज 2 से तीन गाएं मर रही है। अब सवाल ये है कि 200 से जादा बीघा में फैली गौशाला में गायों के लिए खाने की व्यवस्था क्यों नहीं है, जबकि वहां मौजूद लोगों ने बताया है कि गौशाला की 90 प्रतिशत जगह आस पास के गांवों के किसानों को बट्टे पर दी गई है, जिन्होंने अपनी अपनी जगह पर फैंसिंग कर रखी है जिस कारण गायों को भर पेट भर भोजन ना मिलने के कारण मौतें हो रही है। वहीं एसडीएम ने कहा कि गौशाला मे कई गायो की मौत हुई है

रुपया तीन पैसे सुधरकर 91.62 प्रति डॉलर पर बंद

मुंबई: 22 जनवरी (भाषा) घरेलू शेयर बाजारों में मजबूती और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले बृहस्पतिवार को रिकॉर्ड निचले स्तर से मामूली सुधार के साथ तीन पैसे बढ़कर 91.62 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुकच्चा तेल वायदा भाव में 35 रुपये की गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच बृहस्पतिवार को वायदा कारोबार में कच्चा तेल अधिक आपूर्ति की चिंताओं से 35 रुपये की गिरावट के साथ 5,534 रुपये प्रति बैरल पर आ गया।

सड़क दुर्घटना में मृतक पुलिस कांस्टेबल के परिवार को मिलेगा एक करोड़ रु का मुआवजा

नयी दिल्ली: 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली के एक न्यायाधिकरण ने पिछले साल अलीगढ़ में एक सड़क दुर्घटना में मारे गए उत्तर प्रदेश के पुलिस कांस्टेबल के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को मुआवजे की पूरी राशि का भुगतान करने का उत्तरदायी ठहराते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय संबंधित वाहन का वैध बीमा था। साथ ही, बीमा कंपनी अपने बचाव में कोई भी कानूनी आधार साबित करने में विफल रही।


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