
पराक्रम दिवस नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने नेताजी के अडिग साहस, अटल संकल्प और राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका निडर नेतृत्व और देशभक्ति का गहरा उन्होंने याद कियाप्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि देवी सरस्वती की कृपा से सभी नागरिकों का जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि के प्रकाश से सदा आलोकित रहे। श्री मोदी ने कहा;“आप सभी को प्रकृति की सुंदरता और दिव्यता को समर्पित पावन पर्व बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद हर किसी को प्राप्त हो। उनकी कृपा से सबका जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि से सदैव आलोकित रहे, यही कामना है
रुपया 30 पैसे टूट 91.88 प्रति डॉलर/91.99 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच
मुंबई: 23 जनवरी (भाषा) रुपया शुक्रवार को कारोबार के दौरान सर्वकालिक निचले स्तर 92 पर पहुंच गया। हालांकि अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली सुधार के साथ 91.88 (अस्थायी) पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी के दबाव और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से घरेलू मुद्रा दबाव में रही।विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि कमजोर घरेलू बाजारों और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से भारतीय रुपया शुरुआती बढ़त गंवा बैठा और कारोबार के दौरान 91.99 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
वीबी-जीराम-जी जुमला है,गरीबों के हक पर हमला है। राहुल
नई दिल्ली-समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसारकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है।
मनरेगा बचाओ मोर्चा अभियान में उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत गरीब लोगों को काम करने का अधिकार मिला था, लेकिन अब भाजपा इस योजना को खत्म करना चाहती है। राहुल गांधी ने मनरेगा के मुद्दे पर सरकार की तुलना कृषि कानूनों से की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि वे वीबी-जीराम-जी बिल के बारे में नहीं जानते। उन्होंने कहा कि वीबी-जीराम-जी जुमला है,गरीबों के हक पर हमला है। राहुल ने गरीबों से अपील की कि वे इस नए बिल के विरोध में एकजुट हों।राहुल ने कहा कि कुछ साल पहले सरकार तीन काले कृषि कानून लाई थी। लेकिन हम सभी के एकजुट होकर दबाव बनाया और कानूनों को रद्द करवा दिया। नए कानून मेंं केंद्र सरकार काम और पैसा देने का फैसला करेगी और भाजपा शासित सरकारों को हमेशा प्राथमिकता मिलेगी। पहले जो मजदूरों को मिलता था, वह अब ठेकेदारों और अफसरों को दिया जाएगा।
आदिवासी बेटी पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकती,
बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकती, जब तक यह सिद्ध न किया जाए कि संबंधित जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार व्यवस्था त्याग दी है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने (आशावती बनाम रुखमणी व अन्य) में 41 साल पुराने नामांतरण (म्यूटेशन) और बंटवारे को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। क्या था मामला अपीलकर्ता आशावती पिता धरमसिंह ने सिविल कोर्ट में दावा किया था कि उनके पिता स्व. धरमसिंह बरीहा की दो पत्नियां थीं और वे दूसरी पत्नी हरसोवती की पुत्री हैं। उनका कहना था कि 83 एकड़ से अधिक की पैतृक कृषि भूमि में उन्हें बराबर हिस्सा मिलना चाहिए था, लेकिन वर्ष 1971-72 में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनका नाम रिकॉर्ड से हटा दिया गया। आशावती ने आरोप लगाया कि उस समय वे नाबालिग थीं, न तो उन्हें नोटिस दिया गया और न ही सहमति ली गई, इसलिए नामांतरण और बंटवारा अवैध व शून्य है। आदिवासी बेटी केवल हिंदू कानून के आधार पर दावा नहीं कर सकती हाईकोर्ट ने माना कि, पक्षकार बिंझवार अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। उन पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होता। अपीलकर्ता यह सिद्ध करने में विफल रहीं कि जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार प्रणाली छोड़ी है। कोर्ट ने बुटाकी बाई बनाम सुखबती बाई (2014) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी बेटी केवल हिंदू कानून के आधार पर पैतृक संपत्ति का दावा नहीं कर सकती। 41 साल बाद मुकदमा, समय-सीमा में फंसा दावा कोर्ट ने यह भी अहम टिप्पणी की कि, वर्ष 1972 में प्रमाणित नामांतरण आदेश को 2013 में चुनौती देना कानूनन अस्वीकार्य है। इतने लंबे समय तक चुप्पी, दावे को समय-सीमा के बाहर ले जाती है। राजस्व रिकॉर्ड दशकों तक लागू रहे हों, तो उन्हें हल्के में खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक लागू रहे नामांतरण आदेश वैध माने जाते हैं, जब तक धोखाधड़ी का ठोस प्रमाण न हो। फर्जीवाड़े के भी आरोप साबित नहीं अपीलकर्ता यह भी सिद्ध नहीं कर सकीं कि, उनके हस्ताक्षर या अंगूठा निशान फर्जी था। नामांतरण प्रक्रिया में धोखाधड़ी या जबरन सहमति ली गई। इसके उलट रिकॉर्ड से यह सामने आया कि, अपीलकर्ता को भूमि का एक हिस्सा मिला और वे चार दशकों से उस भूमि पर काबिज रहीं। इससे उनकी सहमति और जानकारी स्वत: सिद्ध होती है। ट्रायल कोर्ट का फैसला सही हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया है। कानून और परंपरागत अधिकारों की भी सही व्याख्या की। उसने किसी भी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं की, इसलिए सेक्शन 96 सीपीसी के तहत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया और 23 दिसंबर 2014 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 26
इन्दौर (ईएमएस) भागीरथपुरा में इन्दौर नगर निगम द्वारा सप्लाई पानी से हुई आज एक और मौत के बाद भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 26 तक पहुंच गया है।भागीरथपुरा निवासी बद्री प्रसाद उम्र 63 साल को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद गत 17 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान आज उनकी मौत हो गई। उन्हें टीबी की शिकायत भी थी। बद्री प्रसाद की मौत के बाद अब तक भागीरथपुरा में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अभी गंभीर हालत में 10 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

