
प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्…
तीर्थराज प्रयाग में शंकराचार्य के अपमान यज्ञ की ओर खींचते शुतुरमुर्ग…..
जोशीमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को तीर्थराज प्रयाग क्षेत्र में अपमान की स्थिति में धरना पर बैठे हुए आज 8 दिन हो गये। इस धरना यज्ञ में सनातन की हवियों को आवाहन किया जा रहा है परिणाम स्वरूप दुनिया की सनातन पर विश्वास करने वाले तमाम आस्थाबान प्रयागराज में धरना-यज्ञ की आहुति की लपटों में तपिश हो रहे हैं किंतु जो हिंदू सनातन धर्म का झंडा बरदार रहे उन्होंने प्रयागराज की अपमान के तूफान से पैदा मरुस्थल भूमि की आंधी में बड़े-बड़े शुतुरमुर्ग अपना सर बालू में छुपा लिए हैं ताकि तूफान का एहसास ना हो, किंतु अपमान यज्ञ की आंधी असली सनातन बनाम नकली सनातन धर्मियों का पर्दाफाश कर रही है। इस यज्ञ से यह भी स्थापित होने जा रहा है धर्म और धर्म का उपयोग करने वाली विचारधारा से भारत की धार्मिक सनातन विरासत को स्थापित करने वाली आदि शंकराचार्य जी की चारों पीठ से भी यह आवाज उठने लगी हैं की सत्ता को अपने बल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। जैसा कि मालूम है की जोशीमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को गंगा स्नान करने जाते वक्त वहां के बड़े-बड़े पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में न सिर्फ अपमानित किया गया बल्कि अपमान करने की सभी सीमाओं को किनारे रखकर शंकराचार्य जी के बटुक शिष्य, वृद्ध साधु शिष्यों के साथ गाली गलौज और मारपीट भी की गई तब से शंकराचार्य जी धरने पर हैं जब तक धर्म पीठ से प्रायश्चित नहीं कर लिया। (त्रिलोकीनाथ)
राजनीति के जो शुतुरमुर्ग इस घटना को अनदेखा करना चाहते थे, भारत भर से या यूं कहें दुनिया भर से आवाज़ शंकराचार्य जी के पक्ष में आने लगी. उससे कम से कम यह तो एहसास हो ही गया कि हिंदू सनातन के क्षत्रप की छाया में सत्ता तो पाई जा सकती है किंतु सनातन धर्म की क्षत्रप का स्थाई तौर अपहरण नहीं किया सकता। जबकि ऐसा करने का संदेश शंकराचार्य जी को कालनेमि रक्षस की संज्ञा देकर अप्रत्यक्ष तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जो स्वयं नाथ-संप्रदाय के महंत हैं देने का प्रयास किया था किंतु शंकराचार्य जी ने कालनेमि नाम का शब्द मारक-शस्त्र को उल्टा वापस मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पर फेक दिया बल्कि साथ में औरंगजेब की औलाद इत्यादि शब्द शस्त्रों का भी उपयोगकर डाला। मामले को बिगड़ता देख धर्म का पारदर्शी उपयोग करने वाली नागपुर की राष्ट्रीयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी में भी अंदर बगावत के सुर उठने लगे परिणाम स्वरुप डैमेज कंट्रोल के लिए प्रयास तो किया गया.
किंतु आठ दिनों से शंकराचार्य जी की अपमान की ज्वाला धर्म को राजनीति से कितना अलग कर पाएगी कहना अभी मुश्किल है….. बावजूद इसके “होईहैं वही जो राम रचि राखा….” के तर्ज पर घट रही प्रयागराज की घटना में शंकराचार्य जी द्वारा अकस्मात आहुतित धरना-यज्ञ में किसका-किसका बलि होगा यह देखने की बात होगी..। हिंदुत्व की इस महाभारत में किन-किन शुतुरमुर्ग को आहुति देनी पड़ेगी यह भी आने वाला वक्त बताने वाला है। फिलहाल शंकराचार्य जी के अपमान से प्रकट हुआ यह धरना-यज्ञ की लपटे भारत के विभिन्न शहरों गांव में अब मुखर होने लगी है.
यूजीसी बिल 2026
यह धारणा भी स्पष्ट होती जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी अब वह धार्मिक पार्टी नहीं रही, साथ ही इसी समय केंद्र सरकार द्वारा स्वर्ण विरोधी “यूजीसी बिल 2026” में जिन प्रावधानों के तहत नोटिफिकेशन जारी किया गया है उससे भी प्रयागराज के धरती पर चल रहे अपमान यज्ञ को बल मिला है… एक बड़ा तबका खास तौरसा युवाओं का जो शिक्षित बेरोजगार होकर भटक रहा अथवा शिक्षा क्षेत्र मेंआगे बढ़ना चाहता है वह महाविद्यालय जीवन में उमंग और उत्साह की बजाय अब भयभीत होकर जीवन बसर का प्रशिक्षण प्राप्त करने को बाध्य हो क्योंकि किशोर उम्र में तनातनी, आवेश के साथ वैचारिक मंथन का विद्रोह पैदा होता है ऐसे यूजीसी बिल के जरिए विशेष कर अनारक्षित वर्ग के लोगों को कभी भी किसी भी झूठी शिकायत का भयानक खामियाजा भोगना पड़ेगा, उसका चरित्र प्रमाण हमेशा के लिए खराब हो जाएगा… साथ ही उनकी सर्विस भी बर्खास्त हो सकती है.. यूजीसी बिल 2026 इसी अपमान-महायज्ञ का एक बड़ा सहायक बनकर भारतीय नागरिक के लिए दोहरी नागरिक व्यवस्था का इशारा भी कर रही है… तथा उसे दोयम दर्जे का नागरिक बनाए जाने का संदेश भी दे रही है.. जैसा की धर्म का नकाब पहनकर सत्ता के नशे में मदहोश लोगों हजारों साल की धर्मध्वज के वाहक शंकराचार्य जी का ही गंगा स्नान पाबंदी लगाकर अपना संदेश दिया था… जबकि किन्हीं भी परिस्थितियों में धर्म क्षेत्र प्रयागराज इन धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थापित मेंले का स्वरूप ले ली है। इसे संयोग कहे या प्रयोग की धर्म ध्वज का क्षत्रप में अपना कब्जा सिद्ध करने के चक्कर में धर्म का दुरुपयोग करना उनके लिए अब भस्मासुर साबित होने वाला है…
देखते हैं घट रहे घटनाक्रम प्रतिदिन प्रयागराज में प्रत्यक्ष को प्रमाणित कर रहे हैं तो कह सकते हैं कि “प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्…” प्रयागराज में बीतता प्रतिपल नवीन सृजन का संदेश देता जा रहा है, धर्म की जय होगी या अधर्म का नाश…. या फिर अधर्म, धर्म का नकाब कर पॉलिटिकल इंडस्ट्री के सहारे एक बार स्वयं को फिर बचा सकेगी। क्योंकि जो घटनाएं घट रही हैं वह स्वयं साक्षी हैं की कैसे कारणों से शंकराचार्य जी को गंगा स्नान से रोकने के बहाने अपमानित किया गया शिष्यों के साथ मारपीट हुई और कैसे उनके पसंदीदा बाबाओं को कालीन बिछाकर गंगा का स्नान कराया गया….?

