जब संवैधानिक अधिकार ही न दिए जाएं तो गणतंत्र दिवस का क्या अर्थ: वांगचुक पत्नी/खरगे और राहुल को तीसरी पंक्ति में//महाकाल के सामने सब बराबर हैं,

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जब संवैधानिक अधिकार ही न दिए जाएं तो गणतंत्र दिवस का क्या अर्थ: वांगचुक पत्नी

नयी दिल्ली: 27 जनवरी (भाषा)Gitanjali J Angmo – The Wire – Hindi ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव्स लद्दाख’ की सह-संस्थापक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने कहा कि यह पहली बार था जब उन्हें गणतंत्र दिवस पर परेड देखने की इच्छा नहीं हुई।सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया।

देश को फिर से राजा-महाराजाओं के जमाने में धकेला जा रहा है: राहुल गांधी

नयी दिल्ली: 27 जनवरी (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के मुद्दे पर मंगलवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि देश को फिर से राजा-महाराजाओं के उस जमाने में धकेला जा रहा है, जहां सारी ताकत और संपत्ति गिनती के लोगों के पास होती थी।

अपमान :खरगे और राहुल को तीसरी पंक्ति में बैठाया गया:  अपमान 

नयी दिल्ली: 26 जनवरी (भाषा) ...कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें तीसरी पंक्ति में बैठाया गया।कांग्रेस के कई नेताओं ने समारोह के दौरान अपने नेताओं को पीछे की पंक्तियों में बैठाए जाने की तस्वीरें साझा करते हुए प्रोटोकॉल के उल्लंघन और बर्ताव पर सवाल उठाए।कांग्रेस अध्यक्ष खरगे पहले राहुल गांधी के साथ तीसरी पंक्ति में बैठे हुए दिखाई दिए। बाद में उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बगल में पहली पंक्ति में बैठा दिया गया।कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने राहुल गांधी और खरगे की तीसरी पंक्ति में बैठने वाली तस्वीर साझा करते हुए ‘एक्स’ पर कहा, “क्या देश में विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों को पूरा करता है?”उन्होंने कहा, ‘‘ यह बस एक ऐसी सरकार की हताशा को उजागर करता है जो हीन भावना से ग्रस्त है। लोकतंत्र में मतभेद तो बने रहेंगे, लेकिन राहुल गांधी के साथ किया गया यह बर्ताव अस्वीकार्य है।’’

कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने भी ‘एक्स’ पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘‘ यह प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का घोर उल्लंघन है!! मौजूदा हालात में इसकी उम्मीद करना बेकार है!! राहुलगांधी, खरगेजी।’’तन्खा ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘ गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखते हुए मौजूदा माहौल में सत्ताधारी पार्टी से बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, सत्ताधारी पार्टी की इन छोटी-छोटी हरकतों से लोकतंत्र को ठेस पहुंचती है।’’हालांकि, भाजपा ने पूछा कि गांधी ने उपराष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग क्यों नहीं लिया था।पहले भी गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोहों के दौरान राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हो चुका है।अपने वीडियो संदेश में, तन्खा ने कहा कि राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में बैठे देखकर उन्हें आश्चर्य और दुख हुआ। उन्होंने कहा कि जब सुषमा स्वराज और अरुण जेटली विपक्ष के नेता थे, उन्हें याद नहीं है कि तब उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया हो।

जो सरकार सनातन धर्म के मानने वालों को निराश करेगी, वह कभी सत्ता में वापस नहीं आएगी: शाह
अहमदाबाद: (27 जनवरी) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि संतों के आशीर्वाद से, जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को बनाए रखने में नाकाम रहेगी, वह देश में कभी सत्ता में वापस नहीं आएगी।गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय की एक सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद सनातन परंपराओं के मानने वालों ने लंबे समय तक ऐसी सरकार का इंतज़ार किया, जो सनातन धर्म को उचित महत्व दे और उसके सिद्धांतों के अनुसार शासन करे।उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि संतों के आशीर्वाद से, जो सरकार सनातन धर्म के मानने वालों को निराश करेगी, वह इस देश में फिर कभी सत्ता में नहीं आएगी।”

महाकालेश्वर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

उज्जैन,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से साफ कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता और गर्भगृह में कौन जाएगा, यह फैसला मंदिर प्रशासन को ही करना है, कोर्ट इसमें दखल नहीं देगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपनी मांग मंदिर प्रशासन के सामने रखें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि महाकाल के सामने सब बराबर हैं, कोई विशेष दर्जा वाला नहीं होता। गर्भगृह में प्रवेश का नियम तय करने का अधिकार मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन के पास है, कोर्ट इसमें क्यों हस्तक्षेप करे? याचिकाकर्ता का आरोप था कि गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश बंद है, लेकिन इस दौरान वीआईपी और प्रभावशाली लोगों को नियम तोड़कर अंदर जाने की इजाजत है। उनका कहना था कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

 

 

 


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