
“हम लोग” जो भारत के संविधान के सदस्य हैं शहडोल के जैसे आदिवासी क्षेत्र में पत्रकारिता करते हैं इसलिए आदिवासी पत्रकार हैं क्योंकि आदिवासी समाज से पत्रकार प्रजाति शहडोल में लगभग नहीं निकली है। मैंने काफी प्रयास किया कि कुछ लोग सामने आए आजादी के 75 सालबाद अभी संभावना दूर-दूर तक जिंदा नहीं है इसलिए हम ही आदिवासियों की तरह सोचते हैं आदिवासियों की तरह रहते हैं और आदिवासियों की तरह जीने का प्रयास करते हैं इसलिए अपनी आदिवासी की समझ से दुनिया में क्या हो रहा है और हम उसमें कैसे अपनी भागीदारी कर रहे हैं इस पर सोचते रहते हैं प्रयास करते हैं कि जो कुछ संभव है वह हम अपने लोगों को बता सकें यानी “हम-लोग” जिंदा रह सकें… इस तरह आज की श्रृंखला में हम एपिस्टिन के उल्लू को देखने का प्रयास करेंगे क्योंकि उसका असर भारत में दिखने लगा है गैस की कीमतों ने उड़ान भरना चालू कर दिया है तो पहले समझले की हो क्या रहा है….. (त्रिलोकीनाथ)
“ए आई” आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम गुणवत्ता) पर आधारित एक विश्व स्तरीय सम्मेलन दिल्ली में संपन्न हुआ हालांकि वह किसी अन्य कार्य के लिए जैसे गलगोटिया का चीनी कुत्ता या फिर अधनंगे युवाओं के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “नंगी” की टिप्पणी के लिए चर्चित हो गया।
ए आई के लिए साधन संपन्न माने जाने वाला उसी का एक भाग अमेरिका के उप महाद्वीप में जेफ्री एपस्टीन नामक अनैतिक सेक्स सप्लायर (Jeffrey Epstein) और मोसाद (Mossad, इज़राइल की खुफिया एजेंसी) के बीच संबंध की बात मुख्य रूप से साजिश सिद्धांतों (conspiracy theories), कुछ गवाहों के दावों और हाल ही में जारी एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) से जुड़े दस्तावेज़ों पर आधारित यह आलेख है। जो की ग्रोक के सहयोग से हमने विकसित किया है।
ग्रोक के अनुसार हलां कि यह सिद्ध नहीं हुआ है कि एपस्टीन मोसाद का आधिकारिक एजेंट था। आइए फैक्ट्स और दावों को अलग-अलग देखें घिसलेन मैक्सवेल के पिता का कनेक्शन — घिसलेन मैक्सवेल (Epstein की मुख्य साथी, जो खुद दोषी ठहराई गई) के पिता रॉबर्ट मैक्सवेल (Robert Maxwell) पर लंबे समय से मोसाद से जुड़े होने का आरोप रहा है। कई रिपोर्ट्स और किताबों में कहा गया है कि वह मोसाद के लिए काम करते थे (arms deals, intelligence आदि में)। कुछ लोग मानते हैं कि रॉबर्ट ने एपस्टीन को मोसाद से जोड़ा।
पूर्व इज़राइली इंटेलिजेंस अधिकारी के दावे — Ari Ben-Menashe (पूर्व इज़राइली अधिकारी) ने कहा है कि 1980 से एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल मोसाद के लिए “honeytrap” ऑपरेशन चला रहे थे — यानी सेक्स और ब्लैकमेल के ज़रिए प्रभावशाली लोगों की जानकारी/कमजोरियां इकट्ठा करना। एपस्टीन फाइल्स में FBI दस्तावेज़ (2020 का मेमो) — हाल में जारी दस्तावेज़ों में एक गुप्त सूत्र (confidential human source) ने दावा किया कि: एपस्टीन को जासूस के रूप में ट्रेन्ड किया गया था।वह मोसाद का co-opted agent था।
पूर्व इज़राइली पीएम एहुद बराक (Ehud Barak) से उसका गहरा रिश्ता था।
ब्लैकमेल थ्योरी — कई रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि एपस्टीन का पूरा सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क एक intelligence operation था — जिसमें प्रभावशाली लोगों (राजनेता, बिजनेसमैन) को रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल किया जाता था। कुछ इसे मोसाद से जोड़ते हैं, कुछ रूसी खुफिया (KGB/GRU) से, और कुछ अमेरिकी इंटेलिजेंस से। इज़राइल/मोसाद का पक्षइज़राइल के कई पूर्व और वर्तमान नेताओं (जैसे Naftali Bennett, Benjamin Netanyahu) ने ऐसे दावों को पूरी तरह झूठा और “categorically false” बताया है।कोई आधिकारिक सबूत या मोसाद की तरफ से पुष्टि नहीं हुई है। एपस्टीन खुद एक ईमेल में मज़ाक में लिखा था: “You should make clear that I don’t work for Mossad :)” — जिसे कुछ लोग irony मानते हैं।
भारत में कांग्रेस पार्टी आए दिन पत्रकार वार्ता करके अब यह बताने लगी है की “एपिस्टन के उल्लू”किस तरह भारतीय राजनीति को नियंत्रित करते हैं और उसके क्या प्रभाव पड़ेंगे यह अलग बात है भारतीय गुलाम मीडिया भारत में जिम्मेदार विपक्षी राजनीतिक दल कांग्रेस की इन बातों को अपनी हाल में जन्मी राष्ट्रभक्ति के चलते इस स्तर का तवज्जो नहीं देता जिससे आम जनता उसे प्राथमिकता पर ले सके।
यह अलग बात है भारत के पेट्रोलियम मंत्री पूर्व नौकरशाह हरदीप पुरी खुलेआम पत्रकार वार्ता करके सेक्स वर्कर ब्रोकर जैफ्री एपिस्टिन से अपनी कई मुलाकातों को सार्वजनिक किया है यह उससे भी ज्यादा अलग बात है कि सिर्फ मुलाकातों और संबंधों के चलते दुनिया के कई देशों में राजनीतिक पदाधिकारी अधिकारी और उद्योगपतियों ने अपनी जनता से माफी मांगी है और कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया है भारत के पूर्व शासक रहे इंग्लैंड के महाराज के भाई एंड्रयूज ने अपने एपिस्टिन के संबंधों के सार्वजनिक होने के बाद वहां की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और कार्यवाही कर रही है भारत के लोकतंत्र के महाराजाओं पर यह बात लागू नहीं होती वह पत्रकार वार्ता करके गर्व से इस बात को सार्वजनिक करते हैं यह उससे भी ज्यादा अलग बात है कि भारत के प्रधानमंत्री और सरकारी तंत्र के हवाला देकर के एपिस्टिन से खुलकर चर्चा करने वाले उद्योगपति अनिल अंबानी के भ्रष्टाचार पर अचानक तेजी से कार्रवाई हुई और उनके घर भारतीय एजेंसी ने कुर्क कर लिया है । आदि आदि लोगों पर तब भी चर्चा होती रहेगी जब भारतीय ऊंट करवट बदलेगा
भारत के सनातन हिंदू धर्म के सर्वोच्च धार्मिक नेता शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी पर पर छोटे बच्चों पर इसी प्रकार के यौन शोषण के आरोप जैसा एपिस्टिन करता था एक अपराधी आशुतोष के द्वारा लगा दिया गया जब उन्हें गिरफ्तारी पर रोक मिल गई अब वह है अपराधी एजेंट रो-रो कर कह रहा है कि वह मुकदमा वापस कर लेगा।इससे पहले ही शंकराचार्य जी ने एक पत्रकार वार्ता में इस घटनाक्रम पर कहा था कि लोग कहते हैं कि ऐसे आरोप एपिस्टन फाइल की वजह से और उसे दबाने के लिए लगाकर चर्चित किया जा रहे हैं।
कांग्रेस आरोप यह भी लगाती है की एपिस्टम फाइल में जिसे वह “गैंग ऑफ एपिस्टिन” रहती है उसकी वजह से ही हाल के खाड़ी युद्ध की घटनाएं हो रही हैं और उसकी वजह से भारत में अपमानजनक तरीके से अमेरिका ट्रेड डील जिस पर हस्ताक्षर भारतीय प्रधानमंत्री ने नहीं किए हैं उसे अघोषित तौर पर लागू कर दिया गया है। जिसका परिणाम भारत में महंगाई और अन्य प्रकार की आपदा आना तय है
तो क्या मन कर चले की एपिस्टन के उल्लू भारत की साख में आकर बैठ गए है…? जिसके रुझान आना चालू हो गए हैं आज दैनिक जनसत्ता की खबर है कि भारत में रसोई गैस ₹60 और कमर्शियल गैस सिलेंडर 115 रुपए महंगा हो गया है क्योंकि खाड़ी देश में नकली युद्ध के कारण एपिस्टीन के उल्लू इस महंगाई को बढ़ावा देने लगे हैं।
क्या आने वाले दो-तीन हफ्ते चार हफ्तों में हम इस रुझान को बहुत तेजी से बढ़ता हुआ भारत में देखेंगे क्या यह कोविद महामारी की तरह भौतिक रूप से एक नकली महामारी है जिसकी चपेट में भारत आने वाला है ऐसा इसलिए लग रहा है कि भारत में एपिस्टन की कितने उल्लू हैं अभी आधी फाइल ही खुलने पर हरदीप पुरी ने अपने को एक उल्लू सिद्ध किया दूसरा उल्लू अनिल अंबानी है जिसके घर में छापा पड़ रहे हैं कुर्की हो रही है तो क्या वह कहावत सिद्ध होने जा रही है जिसमें कहा जाता है “एक ही उल्लू काफी था, बर्बाद गुलिस्ता करने को; अंजाम गुलिस्तां क्या होगा, जब हर साख उल्लू बैठा हो..”क्या हमें यह पता भी नहीं चलेगा की कितने एपिस्टन की उल्लू भारत में छुपे हुए हैं..
बाबजूद इसके अमेरिका की न्यायपालिका चाहे किसी अघोषित कारण के कारण ही एपिस्टम फाइल पर काम कर रही हो क्योंकि उसने फाइल जारी किया है कहते हैं 3 लाख से ज्यादा फाइल हैं अभी सार्वजनिक नहीं की गई है किंतु उसमें सबसे अच्छी बात यह है की नैतिकता नाम की चिड़िया जो भारत में विलुप्त हो रही है अमेरिका के न्यायालय में उसमें संभावना जिंदा है और उसने जैफ्री एपिस्टीन के अपराधिक दुनिया मैं एक भारतीयलड़की का शोषण किए जाने के कारण उसे मुआवजा देने के लिए भारत सरकार को कहते हैं पत्र लिखा है ताकि उसे न्याय मिल सके यह अलग बात है कि हमारे भारत सरकार उसे लड़की को न्याय दे पानी में कुछ सहयोग करती है या फिर वह इस बात पर गर्व करती रहेगी कि वह 140 करोड़ लोगों का लोकतंत्र है…. और इस भीड़ में किसी एक इसलिए उसे ऐसी किसी लड़की को न्याय दिलाने के लिए सहायता नहीं करनी चाहिए जिसे अमेरिकी न्यायालय ढूंढ रही है… अभी तो यह रुझान है गैस के रेट बढ़ गए हैं किसके-किसके रेट कितने-कितने बढ़ेंगे कहां-कहां तक बढ़ेंगे आपकी क्षमता है या नहीं है भारत के प्रधानमंत्री अपने केयर फंड से इस आर्थिक हमले को बैलेंस करेंगे या नहीं करेंगे अथवा उसे अयोध्या के राम के भरोसे छोड़ देंगे यह हम दिन प्रतिदिन देखेंगे…. क्योंकि फिर से वही अंजाम गुलिस्ता क्या होगा जब हर साख पर उल्लू बैठा हो….?

