रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 94.85 पर /लॉकडाउन की गुंजाइश नहीं -वित्त मंत्री/पत्रकारों के सामाजिक सुरक्षा मांग/

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 94.85 पर बंद हुआ
मुंबई: (27 मार्च)... शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 94.85 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की चिंताओं का मुद्रा और समग्र आर्थिक परिदृश्य पर भारी असर पड़ा।फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितताओं के बीच डॉलर के मजबूत होने से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि डॉलर की लगातार मांग और ऊर्जा से जुड़ी महंगाई के जोखिमों के कारण रुपया दबाव में बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में कोई सार्थक सुधार नहीं होता, तब तक रुपये की स्थिति कमजोर ही बनी रहेगी। 

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, लॉकडाउन की गुंजाइश नहीं

नयी दिल्ली: 27 मार्च (भाषा) संसद ने शुक्रवार को आम बजट 2026-27 को मंजूरी दे दी तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य के आसमान छूने के बीच दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है तथा इसे लेकर गलतफहमी नहीं फैलायी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वेस्ट एशिया विवाद के मद्देनजर उनकी तैयारियों और योजनाओं का रिव्यू किया।ऑफिशियल सूत्रों ने बताया कि वर्चुअल मीटिंग का मकसद ‘टीम इंडिया’ की भावना से कोशिशों में तालमेल पक्का करना था।यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री ने वेस्ट एशिया विवाद पर मुख्यमंत्रियों के साथ ऐसी मीटिंग की, जो 28 फरवरी को ईरान पर US-इज़राइल के हमले के साथ शुरू हुआ था। ईरान ने भी अपने खाड़ी पड़ोसियों और इज़राइल पर गोलीबारी करके जवाबी कार्रवाई की। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष का असर अब विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने एक उच्चस्तरीय इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (आईएमजी) का गठन किया है, जो इस संकट से उत्पन्न होने वाले संभावित प्रभावों पर नजर रखेगा और समय रहते आवश्यक निर्णय लेगा। इस ग्रुप की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसके अलावा, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत अन्य संबंधित मंत्रालयों के मंत्री इसमें शामिल होंगे।

सांसद चौधरी ने पत्रकारों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने रखी मांग नई दिल्ली,

(ईएमएस)। पत्रकारों की सुरक्षा और उनके कल्याण को लेकर लोकसभा में शुक्रवार को अहम मुद्दा उठाया गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने सरकार से पत्रकारों के लिए एक समग्र और प्रभावी सुरक्षा एवं कल्याण नीति बनाने की मांग की। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पत्रकारों को यात्रा में पहले की तरह 50 प्रतिशत रियायत फिर से बहाल की जाए, जिससे उन्हें काम के दौरान सहूलियत मिल सके। सांसद ने पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा की व्यापक व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों के बच्चों के लिए शिक्षा में सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल पत्रकारों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाएगा। सांसद चौधरी ने आवास से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकारों को आवास या प्लॉट आवंटन की सुविधा दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्थायी आवास व्यवस्था पत्रकारों के जीवन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएगी। टोल टैक्स में रियायत देने की मांग इसके अलावा सांसद चौधरी ने नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स में रियायत देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लगातार यात्रा करनी पड़ती है, ऐसे में यह राहत उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगी। साथ ही, बदलते समय के साथ पत्रकारिता के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एआई आधारित जर्नलिज्म के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की भी आवश्यकता बताई। पत्रकारिता पेशा नहीं एक मिशन सांसद चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है। यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो सत्ता को जवाबदेह बनाता है और समाज को जागरूक करता है। उन्होंने कहा कि जहां कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा और संस्थागत सुविधाएं प्राप्त हैं, वहीं पत्रकारों को भी उसी अनुपात में संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चाहे पत्रकार फील्ड में रिपोर्टिंग कर रहे हों या किसी संवेदनशील मुद्दे को उजागर कर रहे हों, उन्हें कई तरह की चुनौतियों और असुरक्षाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा एक ठोस और प्रभावी नीति बनाए जाने की मांग उन्होंने सदन में रखी है। हिदायत/ईएमएस 27मार्च26

 


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