शिक्षा विभाग के निर्माण-मरम्मत कार्यों की जांच: विधानसभा प्रश्न के बाद समितियां गठित

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 शिक्षा विभाग के निर्माण-मरम्मत कार्यों की जांच: विधानसभा प्रश्न के बाद गठित समितियां, व्योहारी क्षेत्र की रिपोर्ट कब आएगी? आदिवासी विभाग स्कूलों पर क्या है स्थिति?
शहडोल, मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत विगत तीन वर्षों (2023-2026) के नवीन निर्माण तथा मरम्मत कार्यों की व्यापक जांच शुरू हो गई है। यह जांच मध्य प्रदेश विधानसभा में एक माननीय सदस्य के प्रश्न के बाद शासन द्वारा शुरू की गई है। शासन ने सभी 55 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर तीन वर्षों के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि विधानसभा को संतुष्ट किया जा सके और कागजी कार्यों  वास्तविक कार्यों की पड़ताल हो सके।शहडोल जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण संवेदनशील है। यहां शिक्षा विभाग का एक विकासखंड व्योहारी (ब्यौहारी) शिक्षा विभाग के अधीन है, जबकि शेष चार विकासखंड आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत आते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, शहडोल ने व्योहारी क्षेत्र के सभी स्कूलों के लिए विशेष जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया है।
समिति का गठन इस प्रकार है:
सब-इंजीनियर अभिनव श्रीवास्तव (जिन्हें पहले नवीन निर्माण एवं मरम्मत का कार्य सौंपा गया था, अब जांच सदस्य) आरएमएसए से अरविंद पांडे,जनपद शिक्षा केंद्र से विसंबर पांडे ,संबंधित स्कूल के प्राचार्य व एक वरिष्ठ शिक्षकयह समिति प्रत्येक स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी कि पिछले तीन वर्षों में कुल कितनी राशि से मरम्मत कार्य हुए और कितनी राशि से नवीन निर्माण कराए गए।
आदिवासी विकास विभाग के स्कूलों की स्थिति अभी अनसुलझी
व्योहारी क्षेत्र की जांच रिपोर्ट का इंतजार तो है, लेकिन शहडोल के सहायक आयुक्त (जनजातीय कार्य विभाग) द्वारा आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत आने वाले स्कूलों के लिए कोई समिति गठित किए जाने की आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से भी इस संबंध में कोई स्पष्ट अपडेट उपलब्ध नहीं है।
पृष्ठभूमि: 149 करोड़ का कथित घोटाला और विधानसभा में सवाल
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में राज्य स्तर पर स्कूल मरम्मत अनुदान (केंद्र से प्राप्त 149 करोड़ रुपये) में बड़े अनियमितताओं के आरोप लगे थे। फरवरी-मार्च 2026 में कांग्रेस ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद शासन ने सभी कलेक्टरों को तीन वर्षों के कार्यों की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। शहडोल में जुलाई 2025 में ब्यौहारी के सकंदी सरकारी हाई स्कूल में मरम्मत के नाम पर फर्जी बिलों (4 लीटर पेंट के लिए 168 मजदूरों का बिल आदि) का मामला सामने आ चुका है, जिस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे।
रोचक पहलू: भाजपा शासन के तीन वर्षों में ईमानदारी की परीक्षा अब सवाल यह है कि व्योहारी क्षेत्र की जांच रिपोर्ट कब तक जिला स्तर पर तैयार होकर शासन को भेजी जाएगी? आदिवासी विभाग के स्कूलों के लिए सहायक आयुक्त शहडोल द्वारा समिति कब गठित की जाएगी? तीन वर्षों में भाजपा सरकार के कार्यकाल में जितने भी निर्माण-मरम्मत कार्य हुए, उनमें कितनी पारदर्शिता रही और कितने ईमानदार अधिकारियों-कर्मचारियों ने काम किया? जांच समितियों में शामिल लोग (जिनमें कार्यकर्ता स्वयं जांचकर्ता बन गए हैं) कितनी निष्पक्षता से रिपोर्ट तैयार करेंगे?
यह जांच न केवल कागजी कार्यों की सच्चाई उजागर करेगी, बल्कि सरकारी धन के सदुपयोग की विश्वसनीयता भी स्थापित करेगी। आमजन और विपक्ष दोनों की नजर अब शहडोल की इन समितियों की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई अनियमितता पाई गई तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, यह देखना और भी दिलचस्प होगा।


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