
राजनीति की कुत्ता-घसीटी फंसी न्यायपालिका पर संदेह के बादल
राजनीति की कुत्ता-घसीटी फंसी न्यायपालिका पर संदेह के बादल
आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जो भारत के संविधान सभा के अध्यक्ष थे उनके नेतृत्व में कई सदस्यों ने आजाद भारत के में हम कैसे स्वतंत्रता पूर्ण तरीके से रहेंगे इसके लिए एक आचार संहिता एक संविधान बनाने का काम किया काफी मोटी पुस्तक संविधान के रूप में हमें विरासत में मिली है. जब भी संविधान की चर्चा होगी बी एन राव साहब का नाम जो कि संविधान को संपूर्ण आकार देने में अहम भूमिका अदा किए थे उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बहरहाल जो संविधान हमें विरासत में मिला है हम अब उनके नायकों को लेकर ही उन्हें भगवान बनाने का काम करना चालू कर दिए हैं जबकि वे स्वयं इन सब के विचारों से अलग भारत के संविधान में भारतीय नागरिक कैसे रहे कैसे उनका विकास हो इसके लिए काम करते रहे लेकिन आज जो परिणाम सामने आ रहा है वह चाहे वोट बैंक की राजनीति के चलते राजनेताओं की तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार को अनैतिक रूप से संविधान का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया में संविधान को ही भ्रष्ट बनाने के लिए काम कर रहे हैं. जिसका परिणाम यह हुआ है की दिल्ली का स्वयं को सबसे सबसे पढ़ा लिखा तबका बताने वाला राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी से दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल एक बड़ी प्रयोगशाला के रूप में सामने आए हैं उन्हें मुख्यमंत्री रहते हुए न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार किया बल्कि वह मुख्यमंत्री रहते हुए दिल्ली की जेल में रहकर स्वयं को निर्दोष साबित किया, आबकारी भ्रष्टाचार के मामले मेंl
अब उसकी अपील चल रही है यहां बताना उचित होगा की 21वीं सदी की शुरुआत में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री उमा भारती जो संत स्वभाव की हैं उन्होंने कर्नाटक के तिरंगा प्रकरण में जेल जाने की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री पद की गरिमा को बचाने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था अब वह स्थितियां नहीं है ऐसे मुख्यमंत्री पैदा होना ही बंद हो गए हैं।
क्योंकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार आधारित उन सभी लोगों को जिन पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए अपनी पार्टी में मिलकर उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाने का भी काम किया यह उनकी अपनी राजनीति है ऐसे में उमा भारती की नैतिक विचारधारा दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती। जबकि वह भाजपा के ही मुख्यमंत्री रहीं।
यह बीते कल की बात हो चुकी है वर्तमान में जबकि कलयुग यानी “तंत्र का युग” यानी इजरायली कंप्यूटर सॉफ्टवेयर “पेगासस”हो या हो या सेक्स व्यभिचार कारोबार का अनैतिक सम्राट स्थापित हो चुका और इसी के बलबूते ब्लैकमेलिंग करने वाला अमेरिका का जैफ्री एपीस्टिन का ब्लैकमेलिंग के जरिए दुनिया की राजनीति को कारोबार में बदलने वाले “एपिस्टन फाइल”के रिमोट कंट्रोल से जब दुनिया चल रही है… ऐसे में भी भारत में उसकी काली छाया पड़नी ही थी। यह अलग बात है कि इससे प्रभावित लोग इस फाइल को दबा रखने के लिए इसे खारिज करते हैं। जबकि दुनिया में इसके चलते एक प्रकार का “रहस्य युद्ध” भी चल रहा है जिसके परिणाम में मध्य पूर्व का तेल के लिए एक युद्ध दुनिया भोग ही रही है। हाल में हमने देखा भी की दो हफ्ते की शांति वार्ता के लिए जब युद्ध को रोका गया तो रहस्य युद्ध का कारोबार अमेरिका में फिर सर उठाने लगा और एपिस्टन फाइल में फंसा हुआ अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी को स्वयं सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि उसका एपिस्टन फाइल से कोई संबंध नहीं है क्योंकि युद्ध चाहने वाला इजरायल इस रहस्य युद्ध को कहीं ना कहीं नियंत्रित करता दिखाई देता है। इस प्रकार के वातावरण में भी भारत का
संविधान कितना भी कुचल दिया गया हो इसकी संभावना उसे सुरक्षित बनाए रखती है। किंतु भारतीय राजनीति का पतन की पराकाष्ठा यह है की जो “कुत्ता-घसीटी” (मरे हुए कुत्ते को घसीट कर ले जाना)राजनीति में चल रही है इसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी न्यायपालिका में अब दिखने लगा है हाल में जिस न्यायमूर्ति यशवंत शर्मा के घर में करोड़ों रुपए जले हुए नोट मिले उन्होंने इस्तीफा दिया किंतु यह रहस्य युद्ध की नोट किसका है अभी तक साफ नहीं हुआ है।
अब बारी दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश स्वर्ण कांत शर्मा की है जिन पर आप लगाकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया है
जनसत्ता अखबार लिखता है की पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से सोमवार कोकहा कि आबकारी नीति मामले में उनके (न्यायमूर्तिशर्मा) पिछले फैसलों ने उन्हें (केजरीवाल) लगभगदोषी और भ्रष्ट घोषित कर दिया था। केजरीवाल ने दलील दी कि न्यायमूर्ति शर्मा भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा की तरफ झुकाव रखती हैं तथा इन संगठनों का वैचारिक विरोधी होने के नाते उन्हें न्याय न मिलने की आशंका है। केजरीवाल ने आशंका जताई कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा आबकारी नीति मामले में उन्हें (पूर्व मुख्यमंत्री को) आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई जारी रखती हैं तो उन्हें न्याय र नहीं मिलेगा। वहीं न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से सोमवार को कहा कि मेरे जीवन में पहली बार किसी ने मुझसे खुद को इस मामले से अलग करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी दलील इस मामले से अलग करने की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से हटाए जाने के अनुरोध वाली अपनी याचिका पर दलीलें पेश करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई से अलग किए जाने संबंधी कानून के तहत सवाल न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा या ईमानदारी का नहीं है, बल्कि वादी के मन में उनके पूर्वाग्रह से ग्रस्त होनेकी उचित आशंका का है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक ने दावा किया कि सीबीआइ की याचिका औरभाजपा के एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से जुड़े एक अन्य मामले को छोड़कर, न्यायमूर्ति शर्मा के समक्षकिसी अन्य मामले की सुनवाई इतनी तेज गति सेनहीं हो रही है।
इस स्थिति में यह एक प्रकार की देश की मरी हुई राजनीति का “कुत्ता-घसीटी” ही है जो भारत के संविधान की श्रेष्ठ स्तंभ न्यायपालिका को भी छूत कर रही है ऐसा तो हमारे संविधान को बनाते वक्त सोचा भी नहीं गया होगा लेकिन तब शायद यह भी नहीं सोचा गया होगा कि कलयुग 21वीं सदी में ही आ जाएगा सॉफ्टवेयर के जरिए और देश दुनिया की संपूर्ण राजनीति चुनाव आयोग न्यायपालिका कार्यपालिका पत्रकारिता तो है नहीं फिर भी मन लेते हैं उसे भी अपने पैरों तले दबकर संविधान की ही दुहाई देकर लोकतंत्र को खत्म करने का काम करेगा लेकिन हमारा मानना है की करीब 300 लोग जब मिलकर संविधान का निर्माण कर रहे थे इतना कच्चा संविधान तो होगा नहीं बात यह है कि उसे तलाश करना पड़ेगा किसी अंबेडकर को भगवान बनाकर नहीं उसे संविधान में ही संविधान की स्वतंत्रता में ही ढूंढना पड़ेगा यही न्याय होगा खुद अंबेडकर के साथ, बी एन राव के साथ और उसे पूरी संविधान सभा के साथ जिन्होंने इसे बनाने में अपनी भूमिका अदा की थी भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर सभी को बधाई

