सोहागपुर विधानसभा से निकला था पहला संसदीय कॉकरोच… ( त्रिलोकी नाथ )

Share

  Cockroach Janta Party के 11 मिलियन फॉलोअर्स पार...पार्टी चीफ अभिजीत दीपके  ने क्या-क्या किए हैं वादे, केजरीवाल से कैसा कनेक्शन? जानिए सबकुछ | Republic  Bharat    इस ठीक संदर्भ में देखें तो शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में जो शोषण और दमन का तब राजनीतिक स्तर पर सिस्टम बन चुका था उसके जवाब देने के लिए यहां का मतदाता बेचैन था क्योंकि वोट की राजनीति में वोट की चोट ही मूर्खता  पूर्ण राजनीति पर सबसे बड़ा हमला है। और यही कारण था कि जब सामंतवादी  स्वयं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्र में अपने को परिवर्तित कर ली तब सुहागपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान के ठीक 1 दिन पहले जो आज का कॉकरोच सोशल मीडिया में धीरे-धीरे चल रहा था वह रात्रि में किसी निर्णय पर आ पहुंचा और उसे वोट की चोट कर शहडोल की राजनीति पर हमला करने का निर्णय कर लिया, इसका परिणाम भी आया की रातों-रात एक अंडर-करंट तेजी से फैल गया और सुबह सुहागपुर विधानसभा क्षेत्र में अभूतपूर्व मतदान मजाक में ही सही खड़ी किए गए शबनम मौसी के पक्ष में पड़ गया और 

   Transgender Shabnam Mausi : केवळ दोन वर्षे शिक्षण; पण 12 भाषांचे ज्ञान  असलेल्या शबनम मौसी | India First Transgender MLA Shabnam Mausi Political  Journey | Sarkarnamaशबनम मौसी पहली बार भारत के लोकतंत्र में जनमत की साकार रूप लेकर विधायक बन गई. हो सकता है उस जनमत ने शबनम मौसी से यह जानते हुए भी कि जब स्वस्थ मानव मन राजनेता इस लोकतंत्र में कुछ नहीं कर पाए और शहडोल को लूटने खाने और शोषणकारी व्यवस्थाका अड्डा बना दिए माफियाओं को संरक्षण देने लगे और माफिया राजनीति में स्थापित होने लगे लोकनेता सामंतवाद का माफियाबाद का चेहरा और गुलाम बनकर काम कर रहे थे तब शबनम मौसी एक इलेक्टेड प्रतिनिधि के रूप में भारत के लोकतंत्र को आईना दिखाने के लिए सामने आई और इस बात को सही प्रमाणित करते हुए तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त गिल ने सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को बधाई दी थी।.                                                ( त्रिलोकीनाथ  

 

“कॉकरोच जनता पार्टी” स्पष्ट रूप से मुफ्त में प्राप्त भारत का जनमत संग्रह का एक स्वरूप है, लोगों में कितना आक्रोश है इसका एक मौखिक दस्तावेज भी है. भलाई सरकार लोकतंत्र में चल रही इस आंधी में शुतुरमुर्ग की तरह अपना सर बालू में घुसेड ले और इसे अनदेखा करना चाहे ,सोशल मीडिया में इसके अकाउंट्स बंद कर दे किंतु यह आक्रोश आंकड़ों में उभर कर आ चुका है… इसमें कोई शक नहीं, हो सकता है इससे घबरा कर ही नरेंद्र मोदी जी भारत में लौटने पर पहला काम कैबिनेट की बैठक करके चीजों से निकलने का रास्ता देखने लगे हो. यह इसलिए भी है कि आंकड़ों की दुनिया सांख्यिकी विभाग भारत में तमाम आंकड़ों को छुपाता रहा है इसलिए वस्तु स्थिति और जमीनी हकीकत से सरकार का नाता टूट गया है और वह आर्थिक साम्राज्यवाद के उपनिवेश की ओर बढ़ चली है… जिसमें एक लोकतांत्रिक सरकार जो तमाम दमन के बाद भी स्व-तंत्रता पर विश्वास उसे ज्यादा दिन नहीं दबाया जा सकता…

भारतीय जनता पार्टी का यह घमंड उसे वक्त टूट गया जब वह अपने तमाम तंत्र-मंत्र से सरकारी संस्थाओं के सहयोग से पश्चिम बंगाल असम या अन्य चुनावों को जहां वह प्रभावित करना चाहती थी, सफलता के साथ प्रभावित करते हुए जनमत को कुचलना चाहा तभी अचानक एक गैर जिम्मेदार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सामान्य रूप से आम नागरिक की अवहेलना करते हुए बेरोजगारों को सोशल मीडिया और अन्य कार्यकर्ताओं को भारत का कॉकरोच बता दिया… यही नहीं रुके वह उसी भाषा को बोल रहे थे जो भाषा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के अंदर संसदीय भाषा के रूप में विकसित किया था और आम नागरिकों को बौद्धिक समाज व मंथन करने वाले स्वयंसेवकों को “परजीवी “कहा था PM narendra Modi visit RSS Nagpur headquarters first time after becoming  prime minister- RSS नेताओं के साथ मीटिंग कर सकते हैं नरेंद्र मोदी,  प्रधानमंत्री के तौर पर पहली बार ... और उस पर उन्हें कोई प्रायश्चित भी नहीं हुआ… संसद के अंदर इस बड़ी लोकतांत्रिक त्रासदी पूर्ण स्थिति एक कानूनी शब्द के रूप में उसे वक्त स्वीकार हो गई इस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया श्री सूर्यकांत शर्मा ने इसी “परजीवी” शब्द को एक मुकदमे के दौरान अपनी टिप्पणी के रूप में दर्ज कर दिया…और जब उसका विरोध हुआ तो उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी देनी चाहि. यह अलग बात है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कोई सफाई नहीं दी… उन्होंने उसे एक घोषित कानून के रूप में स्थापित करने का काम किया और उसे मान्यता दिलाने के लिए जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने दोहराने का काम किया….

बहरहाल चीफ जस्टिस की स्पष्टीकरण आ भी गई है किंतु भारतीय जनमानस ने उनके द्वारा कही गई भारतीय नागरिकों के मामले में “कॉकरोच और परजीवी” शब्द को अस्वीकार कर दिया और जैसे ही एक मंच मिला जनमत का इस सिस्टम के खिलाफ जो शोषण और दमन को मान्यता देता है, उस तानाशाही के खिलाफ भी जो अस्वीकार है, “कॉकरोच जनता पार्टी” का मंच सोशल मीडिया में जैसे ही आम नागरिकों को हासिल हुआ वह एक विशाल जनमत के रूप में पूरे सिस्टम पर टूट पड़े…, खासतौर से उस भारतीय जनता पार्टी के उसे घमंड को लतार दिया जिसमें वह फर्जी तरीके से सबसे बड़ी सोशल मीडिया की लोकप्रिय संस्था के रूप में स्थापित थी… और भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता या उसके मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अथवा अन्य गुप्त मार्गदर्शक जो विदेश में बैठे हो… वह घबरा गए और इतना घबरा गए कि उन्होंने इस सोशल मीडिया हैंडल को जिसके जरिए भारतीय जनता पार्टी को भारत में स्थापित किया गया “कॉकरोच जनता पार्टी” के सोशल मीडिया मंच से भारत की असुरक्षा का जिम्मेदार ठहराते हुए उसे बंद करने के आदेश भी दे दिए…

 

यह अलग बात है कि कॉकरोच-बैक करते हुए वापस आया और नए सोशल अकाउंट से स्वयं से स्थापित कर दिया… तो यह एक विशाल जनमत के रूप में देखा जाना चाहिए ठीक उसी तरह जिस तरह शहडोल जिले में शबनम मौसी को चुनाव जीत कर तब के सिस्टम बन चुकी, सड़ी हुई राजनीति और उसे वक्त के सड़े हुए लोकतंत्र के खिलाफ आम नागरिकों में मौसी को चुनाव जीत कर दस्तावेगी संज्ञान दिया था ठीक इसी प्रकार से कॉकरोच जनता पार्टी वर्तमान सत्ता और उसके तमाम देसी और विदेशी संरक्षकों को चेतावनी के रूप में जनमत सौंप दी है अब उसे दिल्ली में बैठकर प्रधानमंत्री और उसकी सरकार माने चाहे ना माने या शहडोल आदिवासी क्षेत्र में बैठकर इस सरकार के जन्मदाता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत माने चाहे न माने।

यह भी संयोग है कि जब इतना विशाल जनमत जो भारतीय जनता पार्टी के तमाम सोशल मीडिया में स्थापित लोकप्रियता को लकारते हुए उससे दोगुनी लोकप्रियता हासिल कर रही है शहडोल की शबनम मौसी आज फिर से पूरे देश में उभर कर आ रही है और शबनम मौसी यह बतला रही है कि आप ठीक नहीं कर रहे हैं लोकतंत्र की भाषा को और कैसे बताया जा सकता है यह अलग बात है कि जिस प्रकार एक तानाशाह इस आवाज को दबाता है उसी भाषा में भाजपा सरकार इस जनमत को दबाने के षड्यंत्र रच रही है.. कितनी सफल होती है किस प्रकार से सफल होती है उसे कौन से रास्ते अपनाने चाहिए यह वक्त बतलाएगा किंतु जब भी प्रश्न पूछने का अवसर आता है तो यह प्रश्न अधूरा रह जाता है कि इस परिस्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है और किस दंडित किया जाएगा…?

उसे अधूरे प्रश्न की तरह जो नॉर्वे में एक 26 साल की युवा लड़की पत्रकार भारत के प्रधानमंत्री को प्रश्न तो करती है किंतु वह मुंह छुपाते हुए प्रश्न से भागने का प्रयास करते हैं… और उत्तर नहीं देते और यही स्थिति एक उत्तर के रूप में पूरे भारत ही नहीं दुनिया में अपना संदेश दे देती है और यही उसे पत्रकार की सफलता है उसका वह प्रश्न, उत्तर विहीन नहीं है उत्तर प्राप्त कर चुका है.. इसमें कोई शक नहीं और भारत में जनमत संग्रह कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में एक दस्तावेजी प्रमाण है… आप इसे चाहे कितना भी भाग जाएं वक्त मिलने पर जैसे शबनम मौसी रातों-रात लोकप्रिय प्रतिनिधि के रूप में सामने आ गई थी उन तमाम सिस्टम को लात मारते हुए जिसमें नेता नामक परजीवी पैदा हो रहे थे और लोग हित तिरोहित हो रहा था …

वर्तमान में दिल्ली में बैठे हुए प्रधानमंत्री और शहडोल में बैठे हुए उनके संरक्षक मोहन भागवत इस पर जरूर विचार करना चाहिए फिर से मुड़कर देखना चाहिए की जो आप कर रहे हैं वह देश हित में है या नहीं और यह आपकी चाहत है कि आप इसमें सकारात्मक परिवर्तन करें या नकारात्मक अथवा विद्वासात्मक, आपकी इच्छा है क्योंकि आपके हाथ में आज ताकत है कल किसके हाथ में होगी कौन जाने.. फिलहाल “कॉकरोच जनता पार्टी” हो या “शबनम मौसी” हमारी एक स्थापित सत्ता है इसको समझाना और सोचना और निष्कर्ष निकलना सत्ता में बैठे हुए और उनके संरक्षकों की जिम्मेदारी है कि देश को उन दोस्तों से जो अमेरिकी साम्राज्यवाद के भारतीय प्रतिनिधि के रूप में भारत को लूटने का काम कर रहे हैं और पूरा पूंजी निवेश अमेरिका में कर रहे हैं कैसे बचाया जाए… क्योंकि यह सिस्टम बहुत खराब है और गंध करने लगा है जनता इसे समझना भी लगी है आप चाहे कितना भी आप मूंद ले.. लोकतंत्र और पत्रकारिता किसी सीमा में नहीं बंधे होते आप भारत में भाग रहे होते हैं पर नार्वे में टकराया जाता है और कोई बात नहीं…. सोचिए आपकी समझ में यदि क्षमता है नहीं तो रामराज चल ही रहा है… किसने रोका है धर्म का जाति का अफीम का नशा जब उतरेगा तब तक कौन पता है किसने देखा है…कोई अमर होकर नहीं आया है…भारत के आध्यात्म में हमने तो यही जाना है। वह जब भी सामने आता है तो शबनम मौसी या फिर कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में उभर कर आया बच सकते हैं तो बच लेंगे या फिर स्वयं को इसमें समावेश कर लें। स्वतंत्रता भारतीय नागरिकों का जन्म सिद्ध अधिकार है इसमें कोई शक नहीं….

कॉकरोच जनता पार्टी समाचार: इंस्टाग्राम पर CJP ने BJP को पछाड़ा, 5 दिनों में  10 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया - इंडिया टुडे


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles