मामला श्रीराम मंदिर में चढ़ावा में डकैती का विशेष जांच दल की लंबी खोजबीन के बाद आखिर मिल गए “बलि के बकरे..”/ शहडोल के मोहन राम मंदिर में भी हो रही पारदर्शी डकैती…

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 मामला श्रीराम मंदिर में चढ़ावा में डकैती का
विशेष जांच दल की लंबी खोजबीन के बाद आखिर मिल गए “बलि के बकरे..”
शहडोल के मोहन राम मंदिर में भी हो रही पारदर्शी डकैती..

ram mandir, ram mandir theft caseराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उत्तर भारत में बड़े कार्यालय के रूप में स्थापित अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में दानदाता ऑन की करोड़ों रुपए की प्राप्त धन में पारदर्शी तरीके से हो रही डकैती के बाद संघ से           न्यासियों के आवेदन में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से विशेष जांच दल बनाने का आग्रह किया था अब दैनिक अख़बार जनसत्ता की माने तो अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में वित्तीय अनिमियतताओं से जुड़े मामले में गुरुवार को आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामलादर्ज किया गया है।अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बारे में कहा जाता है कि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत  का वाहन चालक था । पूरा नाम चंपत राय बंसल है। व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं :बंसल का जन्म: 18 नवंबर 1946, नागिना (मोहल्ला सरायमीर), बिजनौर जिला, उत्तर प्रदेश का है
                                                                                         -(त्रिलोकी नाथ)
अखबार के अनुसार इस घटनाक्रम पर टिप्पणी के लिए चंपत राय और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।एसआइटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। यह अलग बात है कि इसमें कई लोग विवादित अधिकारी रहे हैं।दूसरी तरफ आरोप प्रत्यारोप ऑन के आधार पर भारत के सर्वोच्च अधिकारी रहे मंदिर के ट्रस्टी नृपेन्द्र मिश्रा ने इस मामले को मंदिर में डकैती होना स्वीकार किया था। क्योंकि करोड़ अरब रुपए का घोटाला किया गया था तो सवाल यह उठता है की छोटे स्तर के मंदिर कर्मचारी बिना न्यासियों की सहमति से यह पारदर्शी डकैती क्यों डालते चले आ रहे थे और जब यह डकैती स्पष्ट हो रही थी तब पुलिस के पास जाने की बजाय विशेष जांच दल का गठन करके क्या कुछ छुपाने का काम हुआ है।समाचारों में आ रही खबरों के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (राम मंदिर ट्रस्ट) से महासचिव चंपत राय बंसल और ट्रस्टी/सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है दोनों ने शुक्रवार को चढ़ावे/चंदा चोरी मामले की जांच और SIT रिपोर्ट के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा सौंपाउड़ती खबरों के अनुसार ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को दिया गया

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट  में ट्रस्टी/सदस्यों की सूची 
ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं। मुख्य ट्रस्टी/पदाधिकारी निम्नलिखित हैं (आधिकारिक साइट srjbtkshetra.org से):
महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज — अध्यक्ष
स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज — कोषाध्यक्ष
पद्मश्री श्री के. परासरण — फाउंडर ट्रस्टी सदस्य
स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज — सदस्य
स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराज — सदस्य
युगपुरुष परमानंद गिरी जी महाराज — सदस्य
डॉ. अनिल मिश्रा — सदस्य
श्री कृष्णमोहन — सदस्य (कमेश्वर चौपाल के निधन के बाद नियुक्त)
महंत दिनेन्द्र दास जी महाराज — सदस्य
श्री चम्पत राय — महासचिव
श्री प्रशांत लोखंडे, IAS — केंद्र सरकार प्रतिनिधि
श्री संजय प्रसाद, IAS — उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिनिधि
श्री शशांक त्रिपाठी, IAS — अयोध्या DM
श्री नृपेंद्र मिश्र, IAS (Retd.) — निर्माण समिति अध्यक्ष
नोट: कुछ अन्य सदस्य/निर्माण समिति के लोग भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन ऊपर मुख्य ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य दिए गए हैं। ट्रस्ट में स्थायी और नामित सदस्यों का मिश्रण है,
चंपत राय (महासचिव) और डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्ट सदस्य) ने इस्तीफा दे दिया है।

      अयोध्या राम मंदिर न्यास में कोई भी धर्म संस्थाओं से जुड़े साधु महात्माओं को लगभग नहीं रखा गया है सभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े व्यक्ति इस मंदिर ट्रस्ट में काम कर रहे थे ऐसे में इस पारदर्शी डकैती के लिए जो लंबे समय से होती चली आ रही थी सिर्फ दान पात्र में हुई चोरी तक सीमित रखना से अयोध्या के राम मंदिर की छवि कलंकित होती है की मंदिर में चोरों और डकैतों का साम्राज्य रहा और वहां की पुलिस सोती रही या फिर इस डकैती की जांच के लिए जानबूझकर संघ से जुड़े सदस्य न्यासियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर स्वयं को बचाने का काम किया…? भारत में पीएम केयर फंड को छोड़ दें तो राम मंदिर का यह न्यास भी अत्यंत रहस्यमय तरीके से दानदाताओं की धनराशि पर डाका डलवाता रहा मामला तब विवाद में आया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश सिंह ने इस पर कड़ी टिप्पणी की जो सही साबित हुई .
इसके पूर्व भी आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने करोड़ों रुपए की जमीन घोटाले का जांच की मांग की थी जो न्यासियों के भ्रष्टाचार से संबंधित थे हालांकि सांसद संजय सिंह ने अयोध्या थाने में भी इस मामले में आवेदन पत्र दिया है किंतु थाना पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की बल्कि विशेष जांच दल ने उन्हें पत्र लिखकर अपना पक्ष रखने को कहा था बताया जाता है लखनऊ में पहुंचकर टीम के एक सदस्य को उन्होंने 11  भूमि घोटाले न्यासियों द्वारासैकड़ो करोड रुपए किए जाने की आवेदन दिया है देखते हैं भारत के पीएम केयर फंड के अलावा सबसे गुप्त बना दिए गए इस राम मंदिर ट्रस्ट की रहस्य में भानुमति के पिटारे में और कितने भ्रष्टाचार प्रमाणित होते हैं… अथवा उन्हें छुपाए रखने में प्रभावशाली लोग कितने सफल होते हैं….? कहा जाता है इन सब के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े चंपत राय बंसल की मुख्य भूमिका रही है यह वही व्यक्ति है जो राम मंदिर लोकार्पण में मंच पर बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय सेवक संघ के मोहन भागवत मुख्यमंत्री योगी नाथ के साथ मंच पर लगातार बना रहा। ऐसी स्थिति में क्या सिस्टम जो भ्रष्ट लोगों की टीम था इन्हें छूने का साहस कर सकता है शायद इसीलिए विशेष जांच दल बनाकर इत्मीनान से तत्कालीन सामने आई राम मंदिर के दान पर डकैती कांड में अब तक आठ “बलि के बकरे”चिन्हित किए गए हैं और मजे की बात यह है कि जिस भ्रष्ट ट्रस्ट को इस अपराध में शामिल करना चाहिए वह आवेदक बनकर साहूकार की तरह थाना और पुलिस का उपयोग कर रहा है…
 एस आइ टी ने लवकुश आदि को ठहराया जिम्मेदार, शहडोल का लवकुश बचा है बरकरार।
        इसी तरह शहडोल के मोहन राम मंदिर में भी पारदर्शी तरीके से अनियमितता, चोरी और डकैती डाली जा रही है जिसमें तत्कालीन अपदस्थ किए गए न्यासी लवकुश की प्रमुख भूमिका है खबर तो यह भी है कि लवकुश यह भी साहस  है की चोरी और बेईमानी और डाके के प्रति इसकी निष्ठा इतनी बढ़ गई है की कलेक्टर के खिलाफ भी शिकायत कर बैठा है.. यानी “चोरी ऊपर से सीना जोरी”शहडोल के राम मंदिर में पूजा पाठ के नाम पर काम करने वाले अपदस्थ न्यासियों का उत्साह बन गया है। सूत्र बताते हैं की 2012 में उच्च न्यायालय ने एक आदेश में इन लोगों को हटाकर एक निष्पक्ष “स्वतंत्र कमेटी “का गठन किया था जो शहडोल की मोहन राम मंदिर का प्रबंध देखता, जब तक की मामले का निराकरण न हो जाए किंतु उसे निष्पक्ष कमेटी को पक्ष्कार न्यासियों के द्वारा 14 साल बाद भी न्यास प्रबंध का प्रभार नहीं दिया गया है और जब भी प्रभार की बारी आती है चोरी और डकैती की पोल खुल जाने के दर से लवकुश आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगता है. कहते हैं इस बार कलेक्टर पर ही आरोप लगा दिया कि वह दबाव बना रहे हैं कि हम प्रभार दे दे.., यही तो हाई कोर्ट ने कहा था की प्रभार दे दो भाई… और हुआ भी यही के प्रभार नहीं दिए जाने से मंदिर में विधिवत चीजें संचालित नहीं हुई परिणाम स्वरूप मंदिर का तालाब ईदगाह के और सिंधी धर्मशाला के लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया  तालाब पर कब्जा कर लिए कई लोगों ने कहते हैं अवैध तरीके से पेपर्स भी बनवा लिया। जहां लवकुश कब्जा करके रहता था.उसके ठीक सामने तीन-चार साल पहले मर चुके किराएदार ने दो मंजिला भवन भी पक्का तैयार कर लिया. लवकुश सामने देखकर चौकीदारी करता था। क्योंकि उसे पूजा पाठ करने का अधिकार मिला था और उसने न्यासी के रूप में अपने समस्त प्रभार को गुंडागर्दी करके दबा कर बैठा था.. सब कुछ पारदर्शी आखिर अयोध्या से लेकर शहडोल राम मंदिर तक क्यों होता चला आया..? यह बड़ा प्रश्न है तो क्या लवकुश ने भी किसी संघ को अपना संरक्षक बना लिया है ..क्योंकि अयोध्या में न्यासियों के संघ के संरक्षण में एक न्यासी  नृपेंद्र मिश्र, IAS (Retd.) के अनुसार डाका होता रहा। शहडोल में किसके संरक्षण में मोहन राम मंदिर में डाका पड़ रहा है कौन बताएगा….? राम जाने..

मंदिर प्रकोष्ठ के जरिए का मंदिर का नियंत्रण उचित नहीं,राम के नाम पर वोट लिया, अब नोट (चंदा) ले रहे हैं:कांग्रेस 

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने आज  दिल्ली में AICC कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।इसमें उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (राम मंदिर ट्रस्ट) पर सवाल उठाए, चंदा/चढ़ावे की कथित अनियमितताओं (चोरी के आरोप) का जिक्र किया और ट्रस्ट को तुरंत भंग करने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने तथा संतों-धर्माचार्यों को कमान सौंपने की मांग की।
राजीव शुक्ला ने सवाल उठाए  ट्रस्ट में BJP/RSS से जुड़े लोग  क्यों हैं? धार्मिक लोग (संत-धर्माचार्य) होने चाहिए, राजनीतिक लोग नहीं।चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे लोगों के इस्तीफे से समस्या हल नहीं होगी — अगर हजारों करोड़ की अनियमितता हुई है तो बड़े स्तर पर जांच होनी चाहिए। राम के नाम पर वोट लिया, अब नोट (चंदा) ले रहे हैं —
ट्रस्ट में पारदर्शिता की कमी, छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर डालकर बड़े लोगों को बचाने की कोशिश का आरोप कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर पहली बार विस्तार से बात की।


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