जब याचिका लगाने पहुंचा प्रताड़ित और त्रस्त, जंगली जानवर तेंदुआ गाजियाबाद न्यायालय में….

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गाजियाबाद,Leopard seen in Ghaziabad s Raj Nagar area see VIDEO - गाजियाबाद के पॉश  इलाके में टहलता दिखा तेंदुआ, लोगों में हड़कंप, देखें VIDEO

8 फरवरी।आज जनसत्ता में  खबर को अवश्य देखना चाहिए कि हम अमृत महोत्सव कॉल तक पहुंचते-पहुंचते कितने बर्बाद हो चुके हैं; पर्यावरण के दृष्टिकोण से . यह सांकेतिक लेख ही है, किंतु यही सत्य है कि भारत की पर्यावरण परिस्थितिकी के साथ जितना नंगा नाच हमारी व्यवस्था ने किया है उसका उससे ना सिर्फ आम आदमी बल्कि आम जानवर भी बहुत त्रस्त और परेशान है और वह इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के बड़े शहर के न्यायालय में लिफ्ट तक पहुंच गया… अब उसे मालूम होता लिफ्ट कैसे चलाया जाता है तो निश्चित तौर पर वह बटन दबाकर न्यायाधीश तक पहुंच जाता कि कुछ तो जागी महाराज… हम सब बर्बादी और विनाश की तरफ है; अगर वह बोल सकता है तो तेंदुआ जरूर बोलता अन्यथा तेंदुआ को न्यायालय के दरवाजा तक पहुंचने की जरूरत कैसे आन पड़ी…. इस बात को हमारे सत्ताधीश शायद तब भी ना समझेंगे जब तेंदुआ राष्ट्रपति भवन में घुसकर अनुसूचित जनजाति की हमारी महामहिम राष्ट्रपति के पास जाकर उनसे याचिका लगाएगा और कहेगा कि “आप भी वहीं से हैं और मैं भी वहीं से हूं…,बताइए राष्ट्रपति महोदय क्या लोकतंत्र का निर्माण इसी आधुनिक जंगलराज के लिए हुआ था..? जहां हमारी मर्यादाआएं, हमारी सीमाएं और नैतिकता हमें यह भी सीख नहीं दे पाए की लोकतंत्र किस भाषा में चलाया जाता है… |गाजियाबादः पॉश कॉलोनी राजनगर के राजकुंज में दिखा तेंदुआ, मचा हड़कंप -  Ghaziabad Leopard In Raj Nagar Rajkund Area Create Furore - Amar Ujala  Hindi News Live

हालांकि जॉर्ज फर्नांडिस ने राजनीति की परिभाषा को लोकतंत्र में समझाने का काम जरूर किया था कि राजनीति का मतलब लोगों की सेवा होता है किंतु यह बीते दशक की बात हो गई है, अब राजनीति का मतलब होता है आधुनिक संतहत्यारे और बलात्कारी आसाराम और राम रहीम जैसे संत जो राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न्यायालय के जरिए पैरोल पर छोड़ दिए जाते हैं, आधुनिक हिंदुत्व,जिसमें स्वामी प्रसाद मौर्य और मोहन भागवत जैसे लोग संदेश देने का प्रयास करते हैं कि रामचरितमानस को और  श्रीमदभगवत गीता जैसी धार्मिक पुस्तकों को अगर आग भी लगाना पड़े तो लगा देना अगर वोट बैंक का धंधा के लिए यह जरूरी हो… ?और आधुनिक नेता, जो लाखों करोड़ों रुपए किसी  गुजरात इंडिया कंपनी के (ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं) के किसी तथाकथित उद्योगपति को दुनिया में पैसे वालों का विश्वगुरु बनाने के चक्कर में पूरा तन-मन-धन भारत का लगाना पड़े तो लग जाए; ऐसे लोगों के जंगलराज से हमें बचाइए….; इसके लिए कोई तेंदुआ अगर हिंसक भी हो जाए तो उसे क्या हम समझने का प्रयास करते हैं| क्या हम जानवर भी हो पाए…? अन्यथा तेंदुए को गाजियाबाद के न्यायालय में क्यों आना पड़ा …इसे उसकी भाषा में समझने की जरूरत है. तो समझ लीजिए कि जंगली जानवर तेंदुआ कैसे गाजियाबाद न्यायालय में हंगामा मचा दिया, अपनी बात समझाने के लिए….

गाजियाबाद न्यायालय परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक तेंदुआ यहाँ घुस आया। तेंदुए ने अदालत के अंदर मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। हमले और भगदड़ के कारण छह लोग जख्मी हुए हैं। तेंदुआ कोर्ट परिसर में लगी लिफ्ट में जा पुसा था। वकीलों और पैरवी में पहुंचे अन्य लोगों ने खुद को बंद कर जान बचाई। पुलिस और वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए चार घंटे तक संयुक्त अभियान चलाया और उसे अंततः पकड़ लिया गया। तेंदुए के भूतल पर आने पर पुलिस और वन अधिकारियों ने स्थिति संभाली और बढ़ा पिंजरा लगाकर उसे पकड़ा वन छह लोग अधिकारियों ने तेंदुए को
पकड़ने के लिए मेरठ से विशेषज्ञों को बुलाया था।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ लिया गया है। कचहरी से लगे inform कर और कलेक्ट्रेट में लोगों ने खुद को अंदर बंद कर लिया। सूचना पर वन विभाग की टीम और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया है। बुधवार शाम करीब चार बजे तेंदुआ अदालत परिसर में घुसा और उसने लोगों पर हमला शुरू कर दिया। तेंदुए के हमले में
एक व्यक्ति महिला और एक वकील समेत छह लहूलुहान लोग घायल हो गए हैं। घायलों को एंबुलेंस से संयुक्त जिला चिकित्सालय और सर्वोदय अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों में पुलिसकर्मी भी बताए जा रहे हैं। तेंदुए के हमले के बाद अदालत परिसर में भगदड़ की स्थिति बन गई और पूरा परिसर खाली हो गया। इतना ही नहीं अदालतों के दरवाजे एवं
वकीलों के चैंबर भी सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए गए। आसपास के क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति थी। कचहरी परिसर में घुसे तेंदुए का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा हो रहा था। बताया गया कि घायलों में एक होटल के मालिक नमन ओझा और
एक सरकारी अधिवक्ता भी शामिल हैं। तेंदुए के पुराने की सूचना पर कलेक्ट्रेट और विकास भवन के कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया था।


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