

———————( त्रिलोकीनाथ )———–
गुजरात इंडिया कंपनी (ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं) का एक बड़ा चेहरा गौतम अदानी जिसे अर्थशास्त्र की दुनिया में विश्वगुरु बनाने पूरी सरकार लगी हुई थी वह अचानक हेरा-फेरी का गुरु बनता दिखाई देने लगा| इसके पीछे दूसरा उद्योगपति गुजराती है या वास्तव में गौतम अदानी श्री 420 निकला अगर कोई ईमानदारी पूर्ण जांच होती है तो परिणाम सामने आ सकते हैं या वह फिर से 56 इंच का सीना लेकर घूम सकता है…? लेकिन आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला अदानी घोटाला फिलहाल बनता दिखाई दे रहा है ….और जो काम 70 साल में कांग्रेस नहीं कर पाई वह काम 7 साल में सबसे बड़ा घोटाला का घोटालेबाज गौतम अडानी को से ध्यान हटाने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयोग होने लगे| |ताकि भारतीय जनमानस का इस बड़े घोटालेबाज से ध्यान हट सके जो अपनी निजी समस्याओं से प्रताड़ित होकर कुछ सोचने और समझने का प्रयास करने लगी थी तो हम नई दो घटनाओं पर प्रत्यक्ष रूप से चर्चा करना चाहेंगे|
दो प्रकार के घटनाओं पर सांप्रदायिक नफरत पूर्ण भाषा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के कई पार्टी बदलते हुए समाजवादी पार्टी में आया हुआ स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस के तुलसीदास को बदनाम करते हुए उनके एक दोहे को पकड़कर हंगामा खड़ा किए हुए हैं, जिसमें कुछ सदी पहले तुलसीदास जी ने अपनी आध्यात्मिक कृतिमानस में “ढोल ,गवार, शुद्र, पशु, नारी यह सब ताड़न के अधिकारी” का पूछल्ला पकड़कर के पूरी रामचरितमानस और राम को ,लगे हाथ उसके रचयिता जो ब्राह्मण हैं उन पर आक्रमण कर बैठा | रामचरितमानस को ही आग के हवाले करने का काम किया| स्वाभाविक है हिंदू सनातन व्यवस्था पर आस्था रखने वाले तमाम सनातनी समाज जिसमें आर एस एस का हिंदुत्व भी है और आधुनिक हिंदू संत भी हैं जो बलात्कार और हत्या के प्रकरण में बंद है सबको पीड़ा हुई होगी.. क्योंकि संपूर्ण रामचरितमानस में सारांश भाव भगवान राम की उस रामराज्य की कल्पना है जोकि किसी छोटे से भी नागरिक चाहे वह तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था का शूद्र ही क्यों ना रहा हो; धोबी के प्रश्न उठाने पर अपने निजी जीवन से अपनी पत्नी को देवी सीता को सत्ता से अलग करने का निर्देश देते हैं ताकि सुचिता बनी रहे|
ऐसे सुख वाले आध्यात्मिक पुस्तक में किसी एक कड़ी को पकड़कर संपूर्ण रामचरितमानस को और उसके बहाने आस्था पर आक्रमण कर सिर्फ राजनीति और वोट बैंक के ध्रुवीकरण का काम किया गया| इससे अब तक के सबसे बड़े राष्ट्रवादी घोटाले गौतम अदानी की हेराफेरी से लोगों का दिमाग हटा ध्यान भटकाया|
तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत, तथाकथित तौर पर स्वयं ब्राह्मण है उन्होंने आग में घी लगाने का काम किया …नफरत और वैमनस्यता और हजारों साल से चली आ रही तत्कालीन सामाजिक ताना-बाना नष्ट करने ,वर्ग भेद को बढ़ाने वाले वक्तव्य में बिना यह सोचे कि कश्मीरी पंडित पिछले 75 साल से अपने ही देश में अपमान की जिंदगी जी रहे हैं.. उसे और बढ़ाते हुए संघ प्रमुख मोहन ने अनावश्यक बयान देते हुए कहा कि “जातियां ब्राह्मण और पंडितों ने बनाई है भगवान ने नहीं बनाई..” उन्हें रातोंरात ऐतिहासिक घोटालेबाज गौतम अदानी के घोटाले से भी बड़ा घोटाला लगा…
तो भारतीय समाज को सतर्कता और चेतावनी के तौर पर उन्होंने अपने सपने को सुना दिया, क्योंकि मोहन भागवत एक ऐसी संस्था के प्रमुख भी हैं जो कि जिसकी एक शाखा भारतीय जनता पार्टी भारत में सत्ता में है और वह और उसका मुखिया गुजरात से आता है| यह भी सही है गुजरात इंडिया कंपनी का एक टुकड़ा गौतम अडानी इन दिनों बदनामी के सातवें आसमान पर है.. तो सपना मोहन भागवत को क्या इसी बदनामी के माहौल में देखने को मिला या फिर उनकी राष्ट्रवादी सोच की नींद में उन्हें यह सपना देखने को मिला..?
यह तो जब उनकी इच्छा होगी दोबारा तब बताएंगे और अगर उनकी इच्छा नहीं होती है तो वह नहीं बोलते..? यह एक अलग बात है कि अपनी इस इच्छाधारी सोच.. इस शिखर पर बैठने के लिए उन्होंने ब्राह्मण बनिया और चतुर्वर्ण व्यवस्था सीड़ी का इस्तेमाल किया था और भारतीय जनता पार्टी के ऊपर यह आरोप भी लगता था कि वह ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी है| किंतु अब इस कलंक से मुक्त होना चाहते हैं| किंतु हिंदुत्व की डुगडुगी भी बजाना चाहते हैं| लेकिन इससे बड़ी डुगडुगी प्रायोगिक तौर पर आरक्षण में 70 साल पहले ऐसी बजी की अब वह मजबूरी बन गई है हर राजनीति को सत्ता में पहुंचने के लिए भारतीय समाज की जातियों की सच्चाई एक बड़ा वोट बैंक बन गया है| मोहन भागवत इस वोट बैंक के डमरु को बजाने के तमाम रस्ते देखते रहते हैं |और इस बार उन्होंने अपने टारगेट किलिंग में ब्राह्मण और पंडितों को टारगेट बनाने का काम किया… इसमें कोई शक नहीं, यह बड़ा पारदर्शी भी है|
अगर मोहन भागवत और उसके बौद्धिक संगठन को जरा भी अपने विवेक का इस्तेमाल किया होता राष्ट्रवादी सोच में इस चीज की संभावना देखी होती कि जो प्रमाण पत्र ब्राह्मणों और पंडितों को आप दे रहे हो वह ब्राह्मण, कथानको का सबसे गरीब सामाजिक तबका रहा है| ऐसा नहीं कि उसे अवसर नहीं था…जैसे 7 साल में अवसर मिल गया तो गौतम अदानी दुनिया का विश्व गुरु बड़ा आदमी बनाने का ख्वाब देखे जाने लगा था.., तू जब से हिंदू सनातन व्यवस्था चली है हजारों साल से, तब से जब भी किसी भी कल्पनाकार अपनी कहानी लिखी है तो उसमें कहीं नहीं लिखा कि फला नगर में या देश में कोई “अमीर ब्राह्मण” रहता था… कहानियों की किस्सों में ब्राह्मण हमेशा “गरीब ब्राह्मण” का प्रमाण पत्र और पाता रहा है.., पद चरित्र पाता रहा है| और यह सच्चाई भी है क्योंकि आज भी हजारों साल से सत्ता नजदीक रहने वाला रहने वाला ब्राह्मण समुदाय बहुतायत संख्या में गरीब है …आर्थिक रूप से कमजोर है.. क्योंकि उसने जिस आध्यात्मिक उत्थान के लिए कार्य किया उसमें त्याग और समर्पण पहली शर्त होती थी| उसकी आजीविका भिक्षाटन पर आधारित था | क्योंकि उसका संबंध यज्ञ, अग्नि और देवता से प्रारंभ होता था |
बहराल मोहन भागवत ने उठाया, जातियों का निर्माण भगवान ने नहीं किया | तो या तो उन्होंने अपने भगवान से कभी पूछा नहीं, क्योंकि तथाकथित तौर पर आर एस एस में ब्रह्मचारीओं की संख्या बहुत है जैसा कि अटलबिहारी वाजपेई भी कहते थे|
तो उन्होंने अपने भगवान से पूछा भी नहीं कि ..हे भगवान कृष्ण, आपने गीता में झूठ क्यों बोला…?
शायद वह यह ही भूल गए कि भगवान श्रीकृष्ण ने खूद गीता मे कहा है :—-चातुर्वणर्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः। तस्य कर्तारमपि मां विद्धयकर्तारमव्ययम।। (4/13)
…. हे अर्जुन, ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शुद्र — इन चार वर्णो का समूह, गुण और कर्मो के विभागपूर्वक मेरे द्वारा रचे गए है।इस प्रकार इस सृष्टि — रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी परमेश्वर को तु वास्तव मे अकर्ता ही जान। …..
(गीता अमृत अध्याय १८ उपसंहार सन्यास की सिद्धि
है.. या अपने भगवान राम से ऐसा प्रश्न नहीं किया वे रघुकुल के क्षत्रिय बनकर क्यों चले आए थे…? और जाति व्यवस्था को उन्होंने नहीं बनाया तो उन्होंने माना क्यों…?
यह मान सकते हैं कि राजतंत्र में अगर मोहन भागवत पैदा हुए होते तो उनकी भी हैसियत नहीं होती, ऐसा प्रश्न उठा सकते ..? लोकतंत्र में पैदा हुए हैं तो भी तो उन्हें भगवान से पूछना चाहिए था कि उन्होंने झूठ क्यों बोला या भगवान के ऊपर एक मुकदमा चला देना चाहिए…?; उन्होंने गीता संदेश में झूठा क्यों बयान क्यों किया ..?
जैसे कि स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस को आग लगाकर अपनी महान अभिव्यक्ति को पूर्ण आजादी के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं ..मोहन भागवत को भी भगवान कृष्ण के गीता संदेश को आर एस एस की सभी शाखाओं में आग लगाने का निर्देश देना चाहिए…अगर उन्हें लगता है याने आर एस एस को लगता है की भगवान कृष्ण ने झूठी बयान बाजी की थी कुरुक्षेत्र के मैदान में या फिर यह पुस्तक ही झूठी है किसी ब्राह्मण और पंडित ने लिखी होगी तो फिर राम मंदिर निर्माण का पाखंड को हिंदुत्व की गौरवशाली राष्ट्रवादी सांस्कृतिक मंदिर बनाने के लिए हजारों हिंदुओं की हत्या होने की घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं को भंग करने का क्या फरमान जारी करेगा….? और उसे ऐसा फतवा जारी करना चाहिए| अगर मोहन भागवत अपने बयान पर कायम है ..?
अन्यथा सिर्फ वोट बैंक के लिए ध्रुवीकरण के लिए अपने इस धूर्ततापूर्ण ज्ञान बांटने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए आर एस एस के प्रमुख पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए| —————————————–( जारी भाग 2 )

