
भोपाल :

राष्ट्रीय श्रीमती मुर्मु ने किया 7वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन
राष्ट्रीय श्रीमती मुर्मु ने किया 7वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटनवार, मार्च 3राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने कहा है कि मानवता के दुख के कारण का बोध कराना और उस दुख को दूर करने का मार्ग दिखाना, पूर्व के मानववाद की विशेषता है, जो आज के युग में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। धर्म-धम्म की अवधारणा भारतीय चेतना का मूल स्वर रही है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जो सबको धारण करता है, वह धर्म है। धर्म की आधार-शिला पर ही पूरी मानवता टिकी हुई है। राग और द्वेष से मुक्त होकर मैत्री, करूणा और अहिंसा की भावना से व्यक्ति और समाज का विकास करना, पूर्व के मानववाद का प्रमुख संदेश रहा है। नैतिकता पर आधारित व्यक्तिगत आचरण और समाज व्यवस्था पूर्व के मानववाद का ही व्यावहारिक रूप है। नैतिकता पर आधारित इस व्यवस्था को बचाए रखना और मजबूत करना हर व्यक्ति का कर्त्तव्य माना गया है। धर्म-धम्म की हमारी परंपरा में “सर्वे भवंतु सुखिन:” की प्रार्थना हमारे जीवन का हिस्सा रही है। यही पूर्व के मानववाद का सार-तत्व है और आज के युग की सबसे बड़ी जरूरत भी है। यह सम्मेलन मानवता की एक बड़ी जरूरत को पूरा करने की दिशा में सार्थक प्रयास है। यही कामना है कि समस्त विश्व समुदाय पूर्व के मानववाद से लाभान्वित हो।
उद्घाटन-सत्र में शामिल हुए भूटान और श्रीलंका के मंत्री तथा इंडोनेशिया के उप राज्यपाल
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ,प्रदेश की संस्कृति मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर, भूटान के गृह और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री उगेन दोरजी, श्रीलंका के संस्कृति औऱ धार्मिक मामलों के मंत्री विदुर विक्रमनायके, श्रीलंका के प्रो. राहुल अनुनायक थेरा, इंडोनेशिया के उप राज्यपाल प्रो. डॉ. आईआर तोजोकोर्डो ओका अर्थ अरदाना सुकवती उपस्थित थे। पाँच मार्च तक चलने वाले 7वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म -धम्म सम्मेलन में विभिन्न देशों में सांस्कृतिक सामंजस्य और अन्य विषयों पर चर्चा के लिए भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका, नेपाल और भूटान के संस्कृति मंत्री भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया, नेपाल, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका, मंगोलिया और भूटान के विद्वान और शोधार्थी भी सहभागिता कर रहे हैं।

