
अडाणी समूह ने चैनल एनडीटीवी को खरीदा
तो अमन कुमार सिंह चैनल के बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किए गए..
नई दिल्ली
3 मार्च। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पैसे की भूख ने भ्रष्टचार को कैंसर की तरह पनपने में मदद की है। उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ की भाजपा नीत पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार में प्रधान सचिव रहे अमन कुमार सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए उक्त टिप्पणी की। शीर्ष अदालत के इस फैसले के साथ ही सिंह और उनकी पत्नी यासमीन सिंह के खिलाफमुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायालय ने कहा कि संविधान के तहत स्थापित अदालतों का देश के लोगों के प्रति कर्तव्य है कि वे दिखाएं कि भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। साथ ही वे अपराध करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी करें। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना में धन का समान वितरण कर भारत में लोगों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का वादा किया गया है, जिसे पूरा करने में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में राज्य के पूर्व प्रधान सचिव अमनसिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में दर्जपूर्ववर्ती प्राथमिकी को रद्द करने का फैसला निरस्त कस्ते हुए अदालत ने कहा कि पैसे की भूख ने भ्रष्टाचार को कैंसर की तरह पनपने में मदद की है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के साथ ही सिंह और उनकी पत्नी यासमीन सिंह के खिलाफ मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है। निरस्त करते हुए कहा था कि मामला दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का ‘दुरुपयोग’ था और आरोप प्रथमदृष्टया संभावनाओं पर आधारित थे।
बाद में, नवंबर 2022 में वे ‘कारपोरेट कस्टोडियन एंड कारपोरेट अफेयर्स’ प्रमुख के
रूप में अडाणी समूह से जुड़े। बाद में जब अडाणी समूह ने समाचार चैनल एनडीटीवी को खरीदा तो सिंह चैनल के बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किए गए। पीठ ने कहा, ‘यह पूरे समुदाय के लिए शर्म की बात है कि हमारे संविधान निर्माताओं के मन में जो ऊंचे आदर्श थे, उनका पालन करने में लगातार गिरावट आ रही है और समाज में नैतिक मूल्यों का ह्यस तेजी से बढ़ रहा है। पीठ ने कहा, ‘भ्रष्टाचार की जड़ का पता लगाने के लिए अधिक बहस की आवश्यकता नहीं है। (SABHAR DAINIK JANSATTA)

