चर्चित क्यों है..राइट टू हेल्थ बिल : हर नागरिक को स्वास्थ्य का अधिकार

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राजस्थानजल्दबाजी में लाए गए बिल को दिन भर बहस के बाद वापस लिया गया | Rajasthan Right  To Health In Detail | Ashok Gehlot Govt On Health Budget Bill - Dainik  Bhaskar
 राइट टू हेल्थ बिल क्या है?
राइट टू हेल्थ बिल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल कांग्रेस के चुनावी वादों में से एक था। पहली बार वित्त वर्ष 2022-23 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिल को लाने की घोषणा की। इसके मुताबिक, सितंबर 2022 में विधेयक को विधानसभा में पेश किया गया लेकिन अनिवार्य मुफ्त आपातकालीन उपचार के प्रावधान सहित कई अन्य कारणों से यह आगे नहीं बढ़ सका। भारी विरोध के चलते बिल विधेयक को प्रवर समिति को भेजा दिया गया। अब चालू बजट सत्र में मंगलवार को इसे पारित किया गया।
इस बिल से लोगों को क्या मिलेगा?
अस्पतालों में उपचार के लिए मरीजों को मना नहीं किया जाए इसीलिए राइट टू हेल्थ विधेयक लाया गया है। इसके अंतर्गत इमरजेंसी में इलाज का खर्चा सम्बन्धित मरीज द्वारा वहन नहीं करने की स्थिति में भरपाई राज्य सरकार करेगी। राइट टू हेल्थ विधेयक के तहत राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण लॉजिस्टिकल शिकायत का भी गठन किया गया है। साथ ही, जिला स्तरीय प्राधिकरण का प्रावधान भी किया गया है।
बड़े अस्पतालों को राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर जमीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। इन अस्पतालों को राइट टू हेल्थ विधेयक के अंतर्गत जोड़ने का प्रावधान है। इस बिल में राज्य के निवासियों के लिए कुछ अधिकार देने के प्रावधान हैं, जैसे:-
क) निवासियों को स्वयं को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जानकारी लेने का अधिकार।
ख) निर्धारित सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त परामर्श, दवाओं, उपचार, आपातकालीन परिवहन और आपातकालीन देखभाल का अधिकार।
ग) निवासियों को अधिसूचित सभी सार्वजनिक अस्पतालों में सर्जरी के लिए मुफ्त/किफायती देखभाल का अधिकार।
घ) चिरंजीवी योजना के तहत कवर किए गए निवासियों को बीमा योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से बीमा योजना के तहत मुफ्त सेवाओं का लाभ उठाने का अधिकार।
ङ) भूमि आवंटन के माध्यम से स्थापित निजी चिकित्सालयों में रियायती दरों पर निशुल्क सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार।
च) सभी स्वास्थ्य देखभाल प्रतिष्ठानों द्वारा सार्वजनिक या निजी उचित रेफरल परिवहन का अधिकार।
छ) चिकित्सक के परामर्श के बाद भी रोगी के चले जाने की स्थिति में ट्रीटमेंट समरी लेने का अधिकार।
ज) सेवाओं का लाभ उठाने के बाद हुई किसी भी शिकायत के मामले में सुनवाई का अधिकार।
झ) प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र से भुगतान बाकी होने के बावजूद मृतक के परिवार के सदस्य या अधिकृत व्यक्ति को शव प्राप्त करने का अधिकार।

RIGHT TO HEALTH BILL
बिल का विरोध क्यों हो रहा?
बिल की घोषणा से ही इसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीते तीन दिन दिन से राज्य के कई शहरों में डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान जयपुर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल का प्रयोग भी किया। सीएम गहलोत की घोषणा के बाद सबसे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अपना विरोध दर्ज कराया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो इस बिल में निजी अस्पतालों की अनदेखी की गई है। IMA ने इस बिल को राइट टू डेथ करार दिया है।

बिल में निजी अस्पतालों को भी सरकारी स्कीम के मुताबिक सभी बीमारियों का इलाज निशुल्क करना है। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि सरकार अपने सरकारी अस्पतालों में योजना चलाए, लेकिन निजी अस्पतालों पर जबरन बिल लागू किया गया तो निजी अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। बिल में निजी अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज फ्री में करना अनिवार्य है।
बिल में इमरजेंसी की कोई परिभाषा नहीं है। इमरजेंसी में फ्री इलाज देने के बाद सरकार निजी अस्पतालों को भुगतान कैसे करेगी? एम्बुलेंस सर्विसेज की लागत की भरपाई किस तरह की जाएगी ?  (sabhar amar ujala)


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