
आज कुछ घंटे बाद मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा..? इस पर मोहर लगा सकती है.इसके पहले मध्यप्रदेश के संत उमाभारती को किनारे करके शिवराज ने 18 साल अपना निष्कंटक राज्य चलाया. स्वाभाविक है मध्यप्रदेश की जनता का शिवराज सिंह को आदतन व भाजपा के अंदर मुख्यमंत्री शिवराज को ही अपना आदत बना ली है शिवराज को भी आदत पड़ गई है…मध्य प्रदेश कोहीअपने तौर तरीके से चलने की..लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब उन्हें बर्दाश्त करता नजर नहीं आ रहा है,इसीलिए उसने कई मुख्यमंत्री के चेहरे चुनाव में उतार दिए बावजूद इसके शिवराज ने लाडली बहनों के माध्यम से शिवराज ने प्रमाणित करने का काम किया, की बहनों के प्यारे भैया हैं..लेकिन केंद्रीय नेतृत्व चुनाव में प्रचंड बहुमत प्रमाणित करने के बाद यह प्रमाणित किया कीलाडली बहन तो बहाना था,आपको यूं ही नहीं चुना जाएगा और इसीलिए पिछले एक हफ्ते से बीजेपी हेडक्वार्टर में यह नाटक-नौटंकी जोर से चल रही है….
……………………….( त्रिलोकीनाथ )……………………….
और अंत में यह तय हुआ कि नहीं लोकतंत्र के बहुमत शब्द की नाव पर नय्या पार की जाए और जिस प्रकार से खट्टर हरियाणा में खटाई के रूप में डाले गए थे अब उन्हें जिम्मेदारी दी गई है कि वह मध्यप्रदेश में आकर खटाई डाले.. सवाल यह है की क्या मध्यप्रदेश की पवित्र भारतीय जनता पार्टी के दूध में से खटाई डालने के बाद घी निकालने का प्रोसेस सही साबित होगा ….? औरघी के रूप में कौन सा पवित्र घी निकल सकता है…? इस बात कोअब हमें ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि खटाई डालने के लिए खट्टर आप पहुंचे.
राहुल गांधी जो कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं उन्होंने व्योहारी में आकर स्पष्ट किया था की लालकृष्ण आडवाणी के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रयोगशाला गुजरात नहीं मध्यप्रदेश है,तो क्या हरियाणा में जो नेता ऊपर से टपकाया गया था वह सिद्ध हो चुका है…यानी खट्टर को एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में देखा गया है…शायद इसलिए अब उस सफल मुख्यमंत्री को ही मध्यप्रदेश में भी प्रयोग किया जा रहा है ताकि यह प्रमाणित किया जा सकेकी मध्यप्रदेश में जो भी हो रहा है वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से किया जा रहा है….
बहरहाल प्रयोगशाला में प्रयोग चाहे आरएसएस कर रही हो,भारतीय जनता पार्टी हाई कामन कर रहा हो या फिर भारत की नई आजादी के बाद आया पॉलिटिकल कॉर्पोरेट सिस्टम कर रहा हो…हमें तो अपना मुख्यमंत्री चाहिए जिसे हम 5 वर्ष और झेलें और वह भी मध्यप्रदेश को आनंद से भोगे…जैसा कि शिवराज ने परमानंद काअनुभव किया 18 वर्षों में….जल्द ही एक मुख्यमंत्री परोस दिया जाएगा….ऐसी आशा रखनी चाहिए .
मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चाहे कोई भी हो शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्रों को वह गोद बताई ना ले..क्योंकि अनुभव में यही सिद्ध हुआ है कि मुख्यमंत्री अगर ऐसे क्षेत्रों को गोद लेता है तो वहां पर माफिया तंत्र का राज स्थापित हो जाता है फिर वह करता है अपने माफिया को चलाने के लिए उसके परिणाम पारदर्शी भ्रष्टाचार के अलावा और कुछ भी नहीं होते….?, जिसमें पटवारी प्रसन्न सिंह की दुखद मौत हो जाती है निश्चित रूप से नई सरकार बनने के बाद प्रसन्न सिंह की हत्या का मामला सीएम के उत्साह में दब कर रह जाएगा…. इसमें कोई शक नहीं करना चाहिए. हमें तो सिर्फ इस खेल में दुख और सुखका आनंद लेना चाहिए जैसे प्रचंड बहुमत के असीम आनंद के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 3 तारीख को गैस ट्रेजेडी का दुखद दिन बताया था यह उनका प्रचंड बहुमत आने की दिशा में पहले संवेदना पूर्ण बयान था.
और जब मुख्यमंत्री का चुनाव होना है तब उन्होंने अपने संदेश में सबको राम-राम भेजा है…क्योंकि शिवराज सिंह अनुभव से मजे हुए खिलाड़ी हो चुके हैं तो उन्होंने राम-राम संदेश के जरिए क्या अपने हेड क्वार्टर को भी राम-राम का संदेश दिया है…? कि ऐसा ना हो कि उन्हें राम-राम करना पड़े…या फिर उस राम-राम को समझ कर शिवराज का बेड़ा पार किया जाए…उसके संदेश भी मुख्यमंत्री का रिजल्ट निकालने के बाद स्पष्ट हो जाएगा .किंतु यह भी उनका अनुभव था की खुद उनके गुरु आडवाणी मार्गदर्शक मंडल के लोकप्रिय नेता बन गए थे…या बना दिए गए थे…
इस अनुभवों से ही अपना निर्णय लेंगे इसमें कोई शक नहीं करना चाहिए..फिलहाल जनता को यह देखना है की नई संसद चलने के बाद बहुजन समाज पार्टी के नेता ने सांसद दानिश अली ने फिर से उपद्रव मचाने का प्रयास किया कि उनका अपमान हुआ है……. उसपर न्याय किया जाए…तो पहले तो लोकसभा के अध्यक्ष उनके अपमान के बाद भी उन्हें बहुत डांटेते हुए नैतिकता का पाठ पढ़ाते रहे कि वह सभ्यता से संसद के अंदर आचारसंहिता का पालन करें और जब वह नहीं रनहीं माने और 3 विधानसभा में जीत के प्रचंड बहुमत को आनंद को खटाई में डालने का काम कर रहे थे इसी बीच उनकी बहुजन समाज पार्टी ने उन्हें अपने पार्टी से निष्कासित कर दिया… आचारसंहिता का हवाला देकर जिस आचार संहिता के पालन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उन्हें डांट रहे थे…यह भी संयोग था या फिर प्रयोग…?इससे शिवराज सिंह की राम-राम को सबक मिला होगा की आपको किस दिशा में चलना है भलाई आप मुख्यमंत्री बन जाए… लेकिन आचारसंहिता का पालन आपका नैतिक कर्तव्य है और यही “कॉर्पोरेट-पॉलीटिकल-सिस्टम” का नया संदेश है कि कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना के अंदाज पर कारवाहियां करने में कोई देर नहीं लगेगी…कोई जरूरी नहीं है कि आप अपमानित अथवा पीड़ित होते हुए दूसरे दल के सांसद हैं तो आपको कोई सुरक्षा की गारंटी मिल गई है…आप संयोग के भी शिकार हो सकते हैं……
यही “मोदी की गारंटी की गारंटी की गारंटी है….”;यही नई भारत की नई राजनीति है…और इस राजनीति में जो मध्यप्रदेश का नया नेता निखर कर आएगा वह खट्टर से कमजोर नहीं होगा…इसी का जिक्र शायद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी व्योहारी की आमसभा में कर रहे थे. तो देखते हैं भाजपा के भानुमति के माया-जाल में अब कौन सा मुख्यमंत्री निकाल कर आ रहा है…. और मध्य प्रदेश में किस कमल को नए अंदाज पर विकास की रास्ते पर ले जाएगा …तो आप भी आनंद लीजिए और हम भी आनंद लेते हैं… यहीमध्य प्रदेश की जनता का परमानंद होगा …….शुभम मंगलम|

