
हालांकिडॉ मोहन यादव की नियुक्ति के साथ ही मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के मार्गदर्शक मंडल नेताओं की घोषणा नहीं की गई है बावजूद इसके जैसे ही मोहन यादव की नियुक्ति हुई वैसे ही अप्रत्यक्ष तौर पर एक मार्गदर्शक मंडल का निर्माण भी लगभग अघोषित तौर पर घोषित हो गया है जिसमें उमा भारती ,शिवराज सिंह चौहान,प्रहलाद पटेल,कैलाश विजयवर्गी के साथ नरेंद्र तोमर भी मार्गदर्शन के रूप में नियुक्त हो गए हैं. क्योंकि मुख्यमंत्री के पद पर मोहन यादव एक कमजोर मुख्यमंत्री ना बने इसलिए मार्गदर्शकों की फेहरिस्त भी तैयार हो गई है.
भलाई मुख्यमंत्री मोहन यादव रहेंगे किंतु उनका मार्गदर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश के अनुभवी नेताओं कोअपनी कर्तव्य निष्ठा का परिचय देना होगा .इसी तरह केंद्र के सांसद पद से आए विधायक पद पर आसीन किए गए राकेश सिंह उदय सिंह रीति पाठक की भी भूमिका अहम मानी जाएगी ..उन्हें भी मार्गदर्शन के रूप में अपने अनुभवों को डॉ मोहन यादव के साथ साझा करना होगा.कुछ इसी प्रकार से मोहन यादव के रूप में उसकी सत्ता को मजबूत करने का काम करना पड़ सकता है. क्योंकि चार-पांच महीना चुप ही रहना होगा सिर्फ कर्तव्य निष्ठा का पालन 2024 तक तो दिखाना ही पड़ेगा. इसके बाद आगे क्या होता है यह “भानुमती का कुनबा” ही तय करेगा .इससे यह तय तो हो ही गया है कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति चाहे कितना भी यह बात स्वीकार करने की घोषणा करती रहेकि वह जातिवाद की राजनीति नहीं करती है,लेकिन सही बात यह है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार से नई जातियों को परिभाषित किया है उसमें गरीब,महिला,युवा और किसान शामिल हैं.यह एक मुखौटा होगा जातिगत राजनीति का किंतु वास्तव में जमीन पर वही राजनीति काम करेगी जिसकी पृष्ठभूमि डॉक्टर मोहन यादव केरूप में मध्य प्रदेश में लिखी गई है.यह बदली हुई राजनीत की नई परिभाषा है और भविष्य की राजनीति इसी भ्रामक परिस्थितियों में अपने रास्ते सुनिश्चित करेगी.वैसे भी भारतीय जनता पार्टी में नए इवेंट खड़ा करके पुराने इवेंट को भूलाने के नए-नए प्रयोग किए जाते रहे .किंतु सुखद यह है की मध्यप्रदेश में चेहरा बदलने से जो परंपरागत विकास के नाम पर आदिवासी विशेष क्षेत्र में माफिया तंत्र स्थापित हो गया है उसके भी बदल जाने का इस लोकतंत्र में एक आश्वासन मिला है जो एक सुखद कल की ओर अग्रसर हो या ना हो किंतु बदलाव की ओर समर्पित होगा और हो सकता है इस बदलाव के चक्कर में लोकतंत्र स्थापित हो जाए…ऐसी कामना करनी चाहिए.जिसका चेहरा-चाल और उसका चरित्र मोहन यादव के मंत्रिमंडल के गठन के बाद स्पष्ट हो सकेगा फिलहाल सुखद शुभकामना की आशा रखनी चाहिए.

