पटवारी के बाद अब माफिया-बॉन्ड ने पुलिस एएसआई की कुचल कर कर दी हत्‍या…..

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शहडोलके पुलिस महानिदेशक डीसी सागर का बयान आ गया जिसमें उन्होंने कहा है कि किसी वारंटी को पकड़ने के लिए गए व्यवहारी थाना क्षेत्र के एएसआई बागड़ी की अवैध रेत भरे ट्रैक्टर में कुचलने से मृत्यु हो गई।.इसके पहले भी देवलोंद थानाक्षेत्र में जांच में गए पटवारी

की रेट स्मगलरों ने हत्या कर दी. कुछ ही दिन पूर्व खनिज विभाग के दोनों इंस्पेक्टर के ऊपर प्रेत माफिया ने पपौंध थाना क्षेत्र में में हमला कर दिया।
    दरअसल इन सब के पीछे शहडोल में सिस्टमैटिक स्थापित हो चुका रेट माफिया का अवैध रेत खनिज का कारोबार जुड़ा हुआ है।थोड़ा और पीछे जाएं जब शहडोल क्षेत्र में मध्य प्रदेश का शासन अचानक सस्ते पानी जैसे बहने वाले सुनहले रेत को कीमती सोने की तरह कीमत बढ़ाकर नीतिगत तरीके से बड़े माफिया डॉन का अड्डा बना दिया. तब से अभी तक प्रशासन के दो कर्मचारी पटवारी प्रसन्न सिंह और एक सहायक पुलिस उप निरीक्षक बागड़ी की हत्या कर बलिदान दिया जा चुका है।

इस सिस्टमैटिक माफिया को उस समय पहचान लिया गया था जब कलेक्टर सत्येंद्र सिंह को मूलत इसी विवाद के  माफिया-बांड के कारण चलते शहडोल से कलेक्ट्री का हाथ धोना पड़ा और तब नई कलेक्टर वंदना  जैसे ही शहडोल आई तो सबसे पहले उन्होंने माफिया-बंधु पर एडीजीपी सागर के साथ मिलकर बड़ा हमला किया। परिणाम तत्काल निकाल कर आए कि कैसे कलेक्टर सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल में खुलेआम विशेष कर व्यवहारी थाना क्षेत्र माफियाओं के लिए स्वर्ग बना हुआ था. करीब 56 गाड़ियां डंपर एक साथ पकड़े गए हालत यह पकड़ा .

सोहागपुर क्षेत्र के तत्कालीन एसडीएम लोकेंश जांगिड़ के समय भी काफी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने भी कई गाड़ियां और जेसीबी पकड़ रखी थी उनका क्या हुआ कभी पुलिस विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपडेट नहीं किया है। लेकिन किसी अन्य विवाद को सामने रखते कारण शहडोल के माफियाओं के हितों को देखते हुए शिवराज सरकार ने जांगिड़ का तबादला उन्हें अपमानित करके भोपाल कर दिया था।

अब यह बातें इसलिए स्पष्ट होती जा रही हैं क्योंकि यदि यह चिन्हित कर लिया गया था की शहडोल में अवैध अरबो रुपए  के कारोबार में रेत का काला बाजार स्वर्ग बन गया है तो उसमें नियंत्रण कैसे पाया जाए…?  पर्याप्त समय पुलिस और प्रशासन को मिला किंतु सिस्टम ने माफिया-बंधु पर बजाये परिणाम दायक कार्यवाही करने के सिस्टम को पनपने दिया और उसका परिणाम यह हुआ शहडोल में कभी हजार रुपए में मिलने वाला रेट₹20000 तक गाड़ी चला गया. इससे यह तो स्पष्ट है की वैध और अवैध तरीके से इस बड़े हुए रेत ने अघोषित स्थापित माफिया-बांड को स्वीकृति दे दिया था. जिसका परिणाम यह हुआ कि अब एक पुलिस के अधिकारी स्तर की हत्या, सिस्टम ने कर दी है.. सिस्टम वह चीज होता है जो किसी अवैध कार्य को अदृश्य तरीके से चलने में मदद करता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज की घटनाक्रम कुछ इस प्रकार की बताई गई है।शहडोल जिले के ब्‍यौहारी इलाके में शहडोल जिले में रेत माफ‍िया ने एएसआईमहेंद्र प्रसाद बागरी की हत्‍या कर दी शहडोल जिले में सक्रिय रेत माफियाओं ने पटवारी के बाद अब एक पुलिसकर्मी को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डाला है। यह घटना ब्यौहारी थाना क्षेत्र के बड़ौली गांव के हेलीपैड के पास शनिवार की देर रात की है।ब्यौहारी थाने मे पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक एएसआई महेंद्र प्रसाद बागरी के ऊपर अवैध रेत से लदे ट्रैक्टर को चालक चढ़ाकर भाग गया, जिससे एएसआई की मौके पर ही मौत हो गयी।
जानकारी के अनुसार बीती रात एएसआई बागरी अपने दो अन्य पुलिसकर्मी साथियों के साथ एक फरार वारंटी को पकड़ने जा रहे थे।पुलिस के अनुसार इस मामले में जमोड़ी निवासी ट्रैक्‍टर चालक राज रावत और उसके साथी आशुतोष को रात को गिरफ्तार किया गया है जबकि ट्रैक्‍टर मालिक सुरेंद्र सिंह की तलाश की जा रही है। आशुतोष सुरेद्र सिंह का पुत्र है।
अपने वाहन से उतरकर सहायक उप निरीक्षक बागरी ने इसे रोकने का प्रयास किया,लेकिन ट्रैक्टर चालक ने पुलिस को देखते ही एएसआई के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। इसके बाद अवैध रेत से लदा ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया।

मृतक पुलिसकर्मी के साथी सहकर्मी एएसआई गया प्रसाद कनौजिया एवं आरक्षक संजय द्विवेदी ने मामले की जानकारी थाने एवं वरिष्ठ अधिकारियों को दी। मामले की जानकारी लगते ही मौके पर कुछ मिनट के अंदर ही थाना स्टाफ पहुंचा जब तक एएसआई महेंद्र की मौत हो चुकी थी।मालूम हो कि बीते कुछ माह पहले उक्त क्षेत्र मे ही रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन को रोकने पटवारी का एक दल पहुंचा था, जिसमे पटवारी को रेत माफियाओ ने ट्रैक्टर से कुचलकर मार डाला था। दो दिन पूर्व रेत माफिया इसी क्षेत्र में खनिज विभाग की टीम पर हमला करते हुए रेत से भरे ट्रैक्टर को लेकर फरार हो गए थे।
घटना की जानकारी लगने के बाद देर रात ही शहडोल एडीजीपी डीसी सागर, पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक एवं वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे गए थे। घटना के बाद फरार ट्रैक्टर चालक व एक अन्‍य को पुुलिस ने कुछ घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतक एएसआई के परिवार में पत्नी के अलावा तीन पुत्रिया हैं, जिसमें सबसे बड़ी पुत्री की उम्र करीब 14 वर्ष है। वह मूल रूप से सतना जिले के रहने वाले थे।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश तिवारी ने कहा है कि शहडोल में विगत एक दशक से ज्यादा समय से अवैध रेत , कोयला केअवैध कार्यो को रोकने वाले विभागों के मिली भगत के कारण खुलेआम सभी की जानकारी में यह अवैध व्यवसाय जारी है ।जब कोई बड़ी घटना हो जाती है तो दिखावे के लिए प्रशासन द्वारा कुछ कार्रवाई कर दी जाती है और कुछ दिनों बाद फिर से सब कुछ पहले जैसे चलने लग जाता है। भाजपा नेता ने कहा है कि अवैध रेत का कारोबार इस समय सबसे सरल अवैध कारोबार है इस कारण से जिले भर में सैकड़ो अपराधी प्रवृत्ति के लोग इस काम में लग गए हैं।संभाग मुख्यालय तक इससे अछूता नहीं है। खुलेआम यहां की जनता को मनमाने दरों पर रेत खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। जहां पर सभी बड़े से बड़े अधिकारी रहते हैं। जब संभाग मुख्यालय में यह हाल है तो ग्रामीण एवं पहुंच विहीन क्षेत्रों में क्या हाल होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। शहडोल जिले के समाचार पत्रों तथा मीडिया में अवैध कार्यों की जानकारी प्रतिदिन प्रकाशित होती रहती है लेकिन कोई भी कार्यवाही न होने के कारण इस प्रकार की हृदय विदारक घटनाएं सामने आ रही हैं।

 

      यदि तत्कालीन पुलिस विभाग और प्रशासन अपनी प्रारंभिक कार्यवाही को पहचान कर सिस्टम को पनपने का अवसर नहीं देता यदि पुलिस विभाग भारतीय सेवा के लेफ्टिनेंट कमांडर के पत्र को गंभीरता से लेते और दोनों, क्षेत्र के गांव सुखाड़ में भारत की सेना के जवान राजभान तिवारी की शिकायत पर सिस्टम को नियंत्रित करते तो दो-दो लाशें पुलिस और प्रशासन को माफिया सिस्टम के द्वारा उपहार स्वरूप भेंट नहीं की जाती और सिस्टम जड़ से मर जाता किंतु अब माफिया-बांड का सिस्टम ही पुलिस और प्रशासन के लिए एक खतरनाक चुनौती बन गया है. इसमें शासन के उन छोट-भैया नेताओं की भूमिका कमजोर नहीं है जो पुलिस और प्रशासन की कड़ी बनकर माफिया सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं देखना होगा कि सिर्फ इस क्षेत्र में 3 वर्ष के लिए आने वाले उच्च अधिकारी इस सिस्टम को खत्म करने में अपनी योग्यता को चुनौती देते हैं अथवा वह अघोषित तौर पर सिस्टम के हिस्सा बने रहने में ही अपनी योग्यता समझते हैं…?


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