
नयी दिल्ली: 22 सितंबर (भाषा) मणिपुर में जारी संकट के बीच कांग्रेस सांसद ए. बिमल अकोइजाम ने केंद्र की ‘‘निष्क्रियता’’ पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्तर प्रदेश और बिहार में पैदा हुई होती तो इसे अनसुलझा नहीं छोड़ा जाता.
नयी दिल्ली: 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली का जंतर-मंतर रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के झंडे के पीले और नीले रंगों से सराबोर हो गया। पार्टी के बैनर के साथ नारे लगाते हुए आप के सैकड़ों समर्थकों ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ खड़े होने का संकल्प जताया।जब केजरीवाल अपनी पहली ‘जनता की अदालत’ जनसभा में सफेद शर्ट पहनकर मंच पर आए तो माहौल में जोश भर गया। उनका स्वागत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ जैसे गानों से किया गया। जंतर-मंतर आप नेताओं और समर्थकों से भरा हुआ था
मोदी जी को लगा कि ये समस्या खड़ी कर सकता है तो हमें भ्रष्टाचारी साबित करने के लिए हमारी ईमानदारी पर चोट की गई, हम सब को जेल में डाल दिया।भाजपा वाले मुझे चोर कहते हैं मुझे दुख होता है, इसीलिए इस्तीफा दिया है।मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है।मैं भ्रष्टाचार के दाग के साथ नहीं जी सकता। इसलिए सीएम पद से इस्तीफा दिया हमैं कहता हूं कि केजरीवाल चोर है या केजरीवाल को जेल भेजने वाले चोर हैं।आरएसएस वाले कहते हैं कि हम राष्ट्रवादी हैं मैं मोहन भागवत से पूछ रहा हूं। जिस तरह मोदी जी दूसरे दलों के नेताओं को लालच या धमकी देकर तोड़ रहे हैं क्या ये सही है?मैं पूछना चाहता हूं कि क्या इस तरह की राजनीति ठीक है?आरएसएस भाजपा की मां के समान है आज वह बेटा अपनी मां को आंखे दिखा रहा है।जब नड्डा ने आरएसएस के लिए कहा कि हमें उसकी जरूरत नहीं है, क्या ये सही है?उम्र का जो नियम भाजपा के नेताओं पर लागू है वह मोदी पर क्यों लागू नहीं है?मैं उम्मीद करता हूं कि भागवत जी इन प्रश्नों का जवाब देंगे।आने वाला चुनाव मामूली चुनाव नहीं है यह अरविंद केजरीवाल की अग्नि परीक्षा है।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश): उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को यहां राम मंदिर में पूजा-अर्चना करने से परहेज किया और कहा कि आंशिक रूप से निर्मित मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं की जा सकती।उन्होंने कहा कि वह राम मंदिर में तभी पूजा-अर्चना करेंगे, जब मंदिर का शिखर (सबसे ऊपरी हिस्सा) पूरी तरह से बन जाएगा।राम मंदिर न जाने के बारे में पूछे जाने पर सरस्वती ने संवाददाताओं से कहा, “अधूरे रूप से निर्मित मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं की जा सकती। यह अधूरा है। मैं राम मंदिर में तभी पूजा-अर्चना करूंगा, जब मंदिर का शिखर पूरी तरह से बन जाएगा।”

