“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” आखिर नवरात्रि में झूठ का दबदबा क्यों…? (त्रिलोकी नाथ)

Share

people of these 4 zodiac signs are proficient in lying speak white lies  know in one click from Aries to Pisces - Astrology in Hindi झूठ बोलने में  इन 4 राशियों के   सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा पत्रकारों को आलोचना करने का लोकतंत्र में अधिकार है और आलोचना करने पर प्रकरण दर्ज नहीं होने चाहिए। लेकिन उपराष्ट्रपति जगदीश धनकड़ जी का भी एक बयान आ गया है की मीडिया को खबरों के मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए उन्होंने बहाना लिया कि मीडिया को राष्ट्र विरोधी बयानों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उनके इसी बयान पर आगे अच्छी बात कही गई है कि संपादकीय का स्थान सभी के लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए और आश्चर्य व्यक्त भी किया कि यह गायब क्यों हो रहा है…? यह एक नजरिया है।

—————–(त्रिलोकी नाथ)——————-
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाराष्ट्र में दिए गए बयान में आते हैं कल हरियाणा में चुनाव की जो वोटिंग हुई और जो चुनाव के निष्कर्ष का रुख अखबार वाले फैलाने के मूड में थे कि भाजपा वहां बुरी तरह से हार रही है, इस हेडिंग को ध्वस्त करने के लिए कल वासीम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की कांग्रेस पार्टी को ही “अर्बन नक्सली गिरोह के द्वारा संचालित पार्टी का दर्जा दे दिया…” और पूरे अखबार वालों ने इसे हैडलाइन भी बनाया क्योंकि प्रधानमंत्री ने यह बात कही है। यह खबर उपराष्ट्रपति धनखड़ के विचारों में कितनी सहमत होती दिखती है यह अलग बात है या फिर धनखड़ इस राजनीति की मेहर-पंचायत को हवा दे रहे थे..?, जो अक्सर लगातार पतित हो रही राजनीतिक बयान बाजी को गुलाम मीडिया हैडलाइन बनता चला आ रहा था।झूठे को पकड़ने का तरीक़ा यह है.. - BBC News हिंदी
तो प्रधानमंत्री को खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। तो क्या विपक्ष को या विपक्ष के नेता राहुल गांधी को खारिज किया जाए…? जो कैबिनेट मंत्री प्राप्त दर्जा के संवैधानिक पदाधिकारी हैं। और अगर प्रमुखविपक्षी पार्टी कांग्रेस को अर्बन-नक्सली चला रहे हैं तो क्या राहुल गांधी को अर्बन नक्सली का नेता कहना गलत होगा…? या फिर नरेंद्र मोदी यही भ्रम फैलाने का “हैडलाइन” बना रहे थे…
हालांकि प्रधानमंत्री पद पर प्रतिष्ठित नरेंद्र मोदी की यह बयानबाजी उस मेहर-पंचायत को आगे बढ़ती है जिसमें विपक्ष के नेता “राहुल गांधी की जीभ काटने वाले को 11 लाख रुपए का इनाम” या फिर मोदी मंत्रिमंडल के एक मंत्री के नफरती बयान अथवा भाजपा में एक सिख नेता के उसे बयान को कैसे नजर अंदाज किया जाए जिसमें घोषित तौर पर कहा गया था राहुल गांधी का भी वही हश्र होगा जो उसकी दादी का यानी आयरन लेडी के नाम से स्थापित रही पूर्व प्रधानमंत्रीश्रीमती इंदिरा गांधी का हुआ था; यानी उन्हें गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, तो क्या राहुल गांधी की जीभ काट दी जाए या उनकी हत्या कर दी जाए… और उसके संदर्भ में या इसी विषय वस्तु को आगे बढ़ते हुए पृष्ठभूमि में उसे वातावरण का निर्माण किया जाए जिसमें कहा जाए कि वह अर्बन नक्सली गिरोह से संचालित कांग्रेस पार्टी के संसद में नेता हैं…? इसलिए उनके साथ वह सब निष्कर्षत:है क्यों नहीं होना चाहिए जो हाल में 28 नक्सलवादियों की हत्या करके निष्कर्ष दिया गया था…? या इसी के इर्द-गिर्द उसके परिणाम क्यों नहीं होने चाहिए…?
हम भी चाहते हैं अगर इसमें जरा भी सच्चाई है तो यह होना ही चाहिए.. क्योंकि देश में देशद्रोहियों और गद्दारों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.. लेकिन सवाल यह है कि किसी को भी राह चलते “अर्बन-नक्सली” कह देना किसी की भी “जीभ काट लेना” कह देना अथवा किसी की भी हत्या की धमकी देना यह सब आम क्यों होता जा रहा है…? और अगर इस पर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को चिट्ठी लिखते हैं तो उसका जवाब प्रधानमंत्री की ओर से न देकर के भारतीय जनता पार्टी के संगठन के अध्यक्ष जगत प्रसाद नड्डा यह कह कर देते हैं कि वह कितना जायज क्यों नहीं है.. अगर कांग्रेसियों के पूर्व के बयानों को देखा जाए..? तो क्या यह “मेहर-पंचायत” नहीं है…?
या फिर क्या अखबारों में हैडलाइन बदलने के लिए अपने गुलाम मीडिया के माध्यम से उन्हें “खबर का कोड” दिया जाता है ताकि मीडिया वही खबरों को उस दिन चर्चित करें जिस दिन उसकी आवश्यकता हो… चाहे उसका कोई आधार हो अथवा ना हो…? चुंकि एक प्रतिष्ठित पदाधिकारी संवैधानिक पद से इसे बोल रहे हैं इसलिए उसे सिर्फ उस दिन की हेडलाइन बने का अवसर क्यों मिलना चाहिए..? अगर वह हैडलाइन निराधार है…? अगर वह हैडलाइन भ्रम फैलाने वाली है…? अथवा इस हैडलाइन का कोई निष्कर्ष नहीं होता है.. यानी परिणाम दायक बयान नहीं होता..? ऐसी हालत में आखिर हैडलाइन बदलकर के किन खबरों को दबाया जाता है या उन्हें भुलाने का काम किया जाता है…?
यह भी भारत के लोकतंत्र के साथ पत्रकारिता की एक बड़ी गद्दारी होगी और यह गद्दारी पर लगातार हैडलाइन बदलने की हो रही है तो यह धीरे-धीरे पूरी पत्रिका में पुरुषार्थ हैं पत्रकारिता को आगे बढ़ा रही है इसे क्यों नहीं बचना चाहिए और जैसा की उपराष्ट्रपति जी ने अपने अर्धसत्य में कहा भी की संपादकीय से महत्वपूर्ण मुद्दे गायब क्यों हो रहे हैं यह आश्चर्यजनक है..
बहरहाल अगर सच में कांग्रेस पार्टी को जैसा की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उनके नेता या अन्य लोग खुली अभिव्यक्ति की तहत कई गंभीर आरोप लगाते रहते हैं तो उन पर प्रमाण सहित कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होती है उनके पूरे नेता पदोशी हैं वह जेल में क्यों नहीं है यह बड़ा प्रश्न है और उससे ज्यादा बड़ा प्रश्न है किचन में आप सरकार जो यह बयान करती रहती है आखिर कार्यवाही करने में असफल होकर वह क्या साबित करना चाहिए की भारत शासन लाचार और असहाय लोगों हाथ में है या फिर वह स्पष्ट रूप से एक ऐसा मेहर पंचायत करते रहते हैं जिससे जनता का ध्यान लगातार भटकता रहे और वह अपना काम करते रहे जो उनके लक्ष्य है किंतु इससे भारत की राजनीतकियों की छवि बद से बदतर होती चली जा रही है और लोकतंत्र में नैतिकता कर्तव्य निष्ठा तथा ईमानदारी बुरी तरह से खत्म हो रहा है यह भारत के लोकतंत्र के खतरनाक संकेत थे और खतरनाक भविष्य की लक्षण क्या इसे बचा नहीं जा सकता लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है वह भी नवरात्रि की महत्वपूर्ण दिनों में जब हमारे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी आदिशक्ति की उपवास में रहकर यह सब बोलते हैं तो झूठ तो नहीं बोलते होंगे… सिर्फ ऐसी आशा की जा सकती है…और अगर ऐसा हो रहा है.. तो सत्ता में रहने के लिए झूठ की सीमा का अंदाजा लगाना मुश्किल है यही वर्तमान राजनैतिक संवादों का प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है…..

देवी मंदिरों को मिट्टी में मिलाने की कोशिश, लेकिन भारत ने जीवित रखी परंपरा


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles