मकसद ‘‘चुनिंदा मित्रों की तिजोरियां भरने’’ के अलावा और क्या हो सकता है-प्रियंका

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नयी दिल्ली: छह अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘इंडियन मेडिसिंस फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (आईएमपीसीएल) के निजीकरण की कथित योजनाओं को लेकर रविवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि इसका मकसद ‘‘चुनिंदा मित्रों की तिजोरियां भरने’’ के अलावा और क्या हो सकता है।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा की ये टिप्पणी इन खबरों के बीच आयी है कि सरकार की दवा कंपनी के विनिवेश योजना है जिससे कई स्थानीय निवासियों के बीच चिंता पैदा हो गयी है जिनकी आजीविका इससे प्रभावित हो सकती है.

जयराम रमेश का NTA चीफ पर गंभीर आरोप, कहा- MPPSC अध्यक्ष रहते संदिग्ध रहा इनका रिकॉर्ड - jairam ramesh raised question nta chairman says very dubious record as mppsc chief brk -   कांग्रेस ने रविवार को कहा कि पिछले 10 वर्षों में ‘‘बेहद हानिकारक आर्थिक रुझान’’ देखने को मिले हैं और मानसून भले ही कमजोर हो गया है लेकिन नए तथ्यों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर अब भी कम से कम ‘‘तीन तरह के काले बादल’’ मंडरा रहे हैं।कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थक अर्थव्यवस्था के बारे में बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन इन दावों में उन चुनौतियों पर पर्दा डाला जा रहा है जिन्हें अगर अभी गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे आने वाले वर्षों में विकास क्षमता को बाधित कर सकती हैं।

शिक्षा न तो सत्ता की दासी है और न ही कानून की किन्करी

  भोपाल : रविवार, अक्टूबर 6    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरुकुल परंपरा हमारे देश की शिक्षा का आधार रही है। शिक्षक हमेशा पूज्य थे और पूज्य रहेंगे। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  सुरेश सोनी ने कहा कि वास्तव में विकास तभी हो सकता जब हमारे आसपास के परिवेश और जीवन मूल्यों का विकास हो। उन्होंने 1928 में गुजरात विद्यापीठ में दिए गए काका कालेलकर के संबोधन को उद्घृत करते हुए कहा कि शिक्षा ने अपने स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि शिक्षा न तो सत्ता की दासी है और न ही कानून की किन्करी है, न ही यह विज्ञान की सखी है औप न ही कला की प्रतिहारी यह अर्थशास्त्र की बांदी, शिक्षा तो धर्म का पुनर्रागमन है, यह मानव के हृदय, मन और इन्द्रियों की स्वामिनी है। मानव शास्त्र और समाज शास्त्र, इनके दो चरण हैं, तर्क और निरीक्षण शिक्षा की दो आँखें हैं, विज्ञान मस्तिष्क, इतिहास कान और धर्म शिक्षा के हृदय है। श्री सोनी ने बताया कि काका कालेलकर ने अपने संबोधन में कहा था कि उत्साह और उद्यम शिक्षा के फेफड़े हैं। शिक्षा ऐसी जगत जननी जगदम्बा है, जिसका उपासक कभी किसी का मोहताज नहीं होगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।”

 


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