
– जुर्माना न भरने पर 6 महीने से ज्यादा नहीं हो सकती डिफॉल्ट सजा – हाईकोर्ट ने बदला निचली अदालत का आदेश
बेंगलुरु (ईएमएस)। चेक बाउंस से जुड़े मामलों को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाए जाने पर यदि कोई व्यक्ति जुर्माना या मुआवजा नहीं चुका पाता है, तो उसे दी जाने वाली डिफॉल्ट सजा (जुर्माना न भरने के बदले मिलने वाली जेल) किसी भी परिस्थिति में 6 महीने से अधिक नहीं हो सकती। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने बेंगलुरु के कारोबारी दिनेश कृपलानी की रिहाई का आदेश देते हुए की। दिसंबर 2017 में दिनेश कृपलानी ने जुपिटर कैपिटल लिमिटेड के साथ 10 करोड़ रुपये का ऋण समझौता किया था, जिसमें से उन्हें 5.9 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। अगस्त 2020 में बकाया कर्ज और ब्याज चुकाने के लिए दिनेश ने 50 लाख, 3.5 करोड़ और 5 करोड़ रुपये के तीन चेक जारी किए, लेकिन ये तीनों चेक एक ही दिन बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने साल 2021 में उनके खिलाफ धारा 138 के तहत तीन अलग-अलग केस दर्ज कराए। दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने दिनेश को तीनों मामलों में दोषी ठहराते हुए क्रमशः 61.7 लाख रुपये, 4.3 करोड़ रुपये और 6.2 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया। साथ ही आदेश दिया कि यदि वे जुर्माना नहीं भरते हैं, तो उन्हें प्रत्येक मामले में तीन-तीन महीने (यानी कुल 9 महीने) की साधारण कैद काटनी होगी। जुर्माना न चुका पाने के कारण दिनेश कृपलानी को जेल भेज दिया गया, जिसके बाद उन्होंने इस डिफॉल्ट सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में तर्क दिया गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 65 (जो अब भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 24 है) के मुताबिक, जुर्माना न भरने पर मिलने वाली अतिरिक्त सजा, मूल अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा के एक-चौथाई (1/4) से अधिक नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने इस कानूनी तर्क को सही ठहराते हुए कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध के लिए अधिकतम सजा दो वर्ष की कैद है। इस लिहाज से कानूनन डिफॉल्ट सजा छह महीने से अधिक नहीं हो सकती। अदालत ने जोर देकर कहा कि डिफॉल्ट सजा का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अत्यधिक प्रताड़ित या दंडित करना नहीं है, बल्कि यह केवल जुर्माना वसूलने के लिए दबाव बनाने का एक विधिक साधन है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी पूरी तरह साफ कर दिया कि दोषी को जेल से रिहा करने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह अपनी वित्तीय देनदारी से मुक्त हो गया है। अदालत ने कहा कि दोषी की रिहाई से शिकायतकर्ता कंपनी या राज्य सरकार का जुर्माना वसूलने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं होता है। वे कानून के दायरे में रहकर दिनेश कृपलानी की संपत्ति या अन्य कानूनी तरीकों से अपनी बकाया राशि की वसूली की कार्रवाई जारी रख सकते हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में चेक बाउंस के सैकड़ों मामलों में डिफॉल्ट सजा की कानूनी सीमा तय करने में नजीर साबित होगा।
मोदी सबसे लंबे समय वाले प्रधानमंत्री-रिकॉर्ड
नयी दिल्ली: 10 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर सराहा और उनके ‘‘विकसित भारत’’ के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास तथा सामाजिक न्याय के मामलों में उनके नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए एक प्रस्ताव पारित कियामोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पारित प्रस्ताव में उन्हें चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने पर बधाई दी गई और भरोसा जताया गया कि मोदी के नेतृत्व में भारत ‘‘आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र के तौर पर नई ऊंचाई हासिल करता रहेगा’’।भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और इजराइली राजदूत रूवेन अजार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी।
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप पोलियो मुक्त भारत को बड़ा झटका
गाजियाबाद(ईएमएस)।
भारत के पोलियो मुक्त अभियान को एक बड़ा झटका लगा है। गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा स्थित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से लिए गए दूषित पानी के नमूने की जांच में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (वीडीपीवी) टाइप-1 की पुष्टि हुई है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के सामने आते ही स्थानीय स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए शहरी क्षेत्र की 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के तहत 107 टीमों को तैनात किया है, जो घर-घर जाकर बच्चों की सेहत की जांच करेंगी और उन्हें पोलियो ड्रॉप्स पिलाएंगी।
प्रति घंटे करीब दो आत्महत्या
रिपोर्ट में खुलासा, देश में हुई 1,70,924 में से 15,386 आत्महत्या मप्र में
नई दिल्ली,(ईएमएस)। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2022 के आंकड़ें सामने आ गए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में हुई आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर और हिंदी राज्यों में पहले नंबर है। देश में हुई 1,70,924 में से 15,386 आत्महत्या मध्यप्रदेश में हुईं। आंकड़ों के मुताबिक जहां राष्ट्रीय औसत प्रतिदिन 468 आत्महत्या का है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 42 लोग या प्रति घंटे करीब दो लोगों का है। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में 22,746 आत्महत्या, तमिलनाडु में 19,834, मध्यप्रदेश में 15,386 आत्महत्या हुईं है। कर्नाटक में यह आंकड़ा 13,606 और पश्चिम बंगाल में 12,669 है। वहीं, देश की 17 फीसदी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 2022 में हुई आत्महत्याओं से केवल 4.8 फीसदी मौतें हुईं, जबकि इन राज्यों में सभी आत्महत्याओं का 49.3 फीसदी हिस्सा था, शेष 23 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में थे। इससे यह भी पता चला कि देश में अपना जीवन समाप्त करने वाले 59,087 लोग 18-30 आयु वर्ग के थे। इनमें 38,259 पुरुष और 20,828 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से 31.7 फीसदी लोगों ने पारिवारिक समस्याओं के कारण जबकि 18.4 फीसदी लोगों ने बीमारी के कारण आत्महत्या की। पिछले साल मध्यप्रदेश में इंदौर में 746 आत्महत्याएं हुईं। इसके बाद भोपाल में 527, ग्वालियर में 307 और जबलपुर में 213 आत्महत्याएं हुईं।

