
विकसित भारत के लिए कोयला एक्सचेंज
भारत की कोयला आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सरकार ने देश में कोयला एक्सचेंजों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया है। हाल ही में पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 ने खनिज एक्सचेंज की अवधारणा को लागू किया है और केंद्र सरकार को कोयले और उसके प्रसंस्कृत रूपों सहित खनिजों के पारदर्शी और कुशल व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार दिया है। उपरोक्त के अनुसरण में, कोयला मंत्रालय द्वारा 04.06.2026 को राजपत्र में कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 प्रकाशित किए गए हैं। ये नियम कोयला मंत्रालय की वेबसाइट https://coal.gov.in/sites/default/files/2026-06/09-06-2026a-wn.pdf पर उपलब्ध हैं।इस पहल को सुगम बनाने के लिए, कोयला मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) को कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण के रूप में नामित किया है। पात्र संस्थाओं को सीसीओ द्वारा कोयला एक्सचेंज स्थापित करने तथा संचालित करने, बाजार नियम तथा उपनियम बनाने और कोयला व्यापार को सुगम बनाने के लिए अधिकृत किया जाएगा। पंजीकरण 25 वर्षों की अवधि के लिए वैध होंगे।कोल एक्सचेंज की शुरुआत से कोयला विपणन में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा, क्योंकि यह पारंपरिक “एक से अनेक” बिक्री मॉडल से हटकर एक प्रतिस्पर्धी “अनेक से अनेक” व्यापार मंच की ओर अग्रसर है। इससे पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण संभव होगा, दक्षता में सुधार होगा और वाणिज्यिक तथा कैप्टिव खनिकों सहित कोयला उत्पादकों को खरीदारों के व्यापक समूह तक आसान पहुंच प्राप्त होगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियां भी बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए इस मंच का लाभ उठा सकती हैं।
नटराजन का नामांकन खारिज किया जाना राज्यसभा सीट छीनने का प्रयास: कांग्रेस
नयी दिल्ली: 9 जून (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया जाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा एक सीट छीनने और दिनदहाड़े लूट का प्रयास है।
-फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएगी कांग्रेस, विधायकों को लेकर बेंगलुरू जा रहा विमान रनवे से लौटा भोपाल (ईएमएस)। राज्यसभा चुनाव में मप्र कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त करने का फैसला सुनाया। भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने शपथ पत्र में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। पर्यवेक्षक ने कारण बताओ नोटिस जारी कर मंगलवार शाम तक जवाब मांगा था। इधर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा- मीनाक्षी के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण नहीं है। उन्हें कोर्ट से केवल एक नोटिस मिला था। नामांकन रद्द होने के फैसले के खिलाफ हम कोर्ट जाएंगे। नामांकन खारिज होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस विधायकों को लेकर बेंगलुरू जा रहा विमान भी रनवे से लौट आया। भाजपा की ओर से एडवोकेट संकेत गुप्ता ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष शिकायत पेश करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है
गृह मंत्री ने कहा- यमुना-कायाकल्प खानापूर्ति नहीं, एक मिशन है
नई दिल्ली,(ईएमएस)।
दिल्ली की जीवनदायिनी कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण के अभिशाप से मुक्ति करने के लिए केंद्र सरकार कदम उठा रही है। अब हर 20 दिन में यमुना की समीक्षा की जाएगी। यमुना की गिरती स्थिति पर गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने यमुना सफाई अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है जिसमें 2027 तक 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, साथ ही, अब इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय से उपेक्षित रही यमुना की सफाई अब केंद्र सरकार के शीर्ष एजेंडे में हो गई। हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि यमुना का कायाकल्प केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि एक मिशन है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शाह ने साफ किया कि दिल्ली में सीवेज प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह बदलने की जरुरत है, ताकि एक बूंद भी गंदा पानी यमुना में न गिरे। रिपोर्ट के मुताबिक यमुना में गिरने वाले गंदे नालों की समस्या के समाधान के लिए सरकार ने 59 नए एसटीपी बनाने की योजना तैयार की है। इन संयंत्रों के निर्माण से दिल्ली की सीवेज शोधन क्षमता में भारी वृद्धि होगी। 2027 तक सभी 59 एसटीपी को पूरी तरह कार्यात्मक बनाने का लक्ष्य है। इन नए संयंत्रों में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि पानी को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उपचारित किया जा सके।
उज्ज्वला योजना-12 दिए, घटाकर 9 किया ;अब सिर्फ4 सिलेंडर सालाना फैसला लिया
नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिसे बाद में घटाकर 9 किया गया और अब इसे सिर्फ चार सिलेंडर सालाना करने का फैसला लिया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब पहले की तुलना में कम सिलेंडरों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। नए नियमों के मुताबिक, लाभार्थियों को अब साल के पहले चार रिफिल पर ही प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मिलेगा। इससे पहले तक इस योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों को साल भर में कुल 9 सिलेंडरों की रीफिलिंग पर यह लाभ दिया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार सिलेंडरों की ही वास्तविक खपत होती है, इसलिए वित्तीय सहायता को इसी औसत खपत के स्तर के अनुरूप बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने स्पष्ट किया कि संशोधित पात्रता पूरी तरह से परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है। बता दें कि देश में आम जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जो पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बड़ी बढ़ोतरी थी। इस झटके से लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक और बड़ा झटका दे दिया है। इस सरकारी योजना के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की वार्षिक संख्या में बड़ी कटौती करने का फैसला लिया गया है, जिससे गरीब परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा।

