दुर्भाग्य; जिन्होंने सवा सौ करोड़ देशवासियों को आर्थिक आतंक से मुक्त किया, उन्हें दो गज जमीन भी नसीब नहीं..

Share

 2 मिनट के लिए मान ले की सत्ता का परिवर्तन हो गया है… और कांग्रेस का शासन है, भाजपा की लोकप्रिय नेता की मृत्यु हो गई है.. और उन्हें दिल्ली में उनके गरिमा और सम्मान के सम्मानजनक तरीके से भाजपा के द्वारा मांगे जाने पर भी जमीन नहीं दी 

जाती.. कि जहां उनका अंतिम संस्कार हो सके। बल्कि उससे भी ज्यादा अपमानित तरीके से किसी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया जाता है और भाजपा के मांगने पर भी अंतिम संस्कार के लिए जमीन नहीं दी जाती ताकि उनका यदि कोई अच्छे काम हो तो उसका स्मारक भी बन सके।
क्योंकि जब भाजपा शासन में थी तो उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से डॉ मनमोहन सिंह के निधन पर एक ऐसा अघोषित कानून स्थापित किया था। जिसमें निधन के पश्चात सम्मानजनक तरीके से दुनिया में आर्थिक साम्राज्यवाद के खतरनाक मन्सा की बाढ़ को रोक कर जब मनमोहन सिंह ने भारत की

DR. Manmohan Singh Passes Away: Congress Party Mourns the Death of Former PM of India (See Tweet) - www.lokmattimes.com

 रक्षा की, तब वह दुनिया की नजर में उत्कृष्ट अर्थशास्त्री की श्रेणी में स्थापित हो गए। दुनिया में उन्हें सम्मानित नेता और अर्थशास्त्री के रूप में स्वीकार किया और ऐसे समान प्राप्त व्यक्ति ने भारत में भी आम आदमियों के लिए आजादी से जुड़ी गारंटी वाली कई नियमों को कानून बनाया। ऐसा व्यक्ति जो की सम्मान की पात्रता की गारंटी रखता हो। उसे ही कहे जाने पर भी अगर सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार के पश्चात उनकी स्मारिकाओं को आने वाली पीढियां के लिए सुरक्षित रखा जाए.. ऐसा ना किया जाए। और उसमें घृणित राजनीतिक बदले का नियम बनाया जाए और यह नियम तथा कानून उतना ही समय लेकर के किसी भाजपा नेता की मृत्यु के बाद इसी तरह से पालन किया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी या उसे मानने वाले उसके समर्थकों के दिल में क्या बीत रही होगी… क्यूंकि मृत्यु तो सत्य है उसे आना ही आना है. इस भयानक कष्टप्रद भविष्य की दुर्घटना का अनुमान लगाकर ही मन में बेहद दुख और निराशा उत्पन्न होने लगती है।

लगता है नरेंद्र मोदी और उनके प्रिय अमित शाह की जोड़ी ने ऐसे कानून क्यों बनाई थी..? जो अनुगामी सत्ताधारी लोगों के लिए उदाहरण बन जाए ।हो सकता है स्मारिका में रखने के लिए आपके पास कुछ ना हो बावजूद इसके देश की नेतृत्व की गरिमा का बोझ ही जिन कंधों ने सहा है उसका सम्मान का हकदार वह फिर भी है।

कुछ इसी प्रकार की हालत वर्तमान में कांग्रेस पार्टी ही नहीं डॉक्टर मनमोहन सिंह को दुनिया में चाहने वाले हर व्यक्ति जो उनके व्यक्तित्व से परिचित हैं उन्हें महान दुख हुआ है।भारत की सरकार की 56 इंच की छाती अपने ही गौरवशाली नेता को जो भारत में सिख समुदाय का पहला प्रधानमंत्री हुआ 5 – 6 इंच जगह भी ना दे पाई।
सांप तो निकल गया अब लाठी पीटने का समय है.. बल्कि कहे तो ड्रम बजाने का और ढोल बजाने का भी समय है.. जिससे कुछ मिलने वाला नहीं।सिवाय इसके की तत्कालीन दलित उत्थान के प्रणेता डॉक्टर अंबेडकर के अपमान बड़ा है या 21वीं सदी में आर्थिक गुलामी से सवा सौ करोड़ भारतीयों को मुक्ति उत्थान दिलाने वाले अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का अपमान बड़ा है…?
क्या मनमोहन सिंह का अपमान का आडंबर, अंबेडकर के अपमान को झुठला देगा.. या फिर इन दोनों नेताओं का लगातार अपमान दर अपमान से अपमानित भारतीय जनमानस भारतीय राजनीति की पतन की नई लकीर खींचेगा।
जिसमें वह कह सकेगा कि गर्व से कहो कि हम अपने ही नेताओं काअपमान करने में भी अपना रिकॉर्ड बनते हैं….।हो सकता है कोई बहुत गहरे मतभेद या सत्ता के सौदे की कोई डील मनमोहन सिंह से सुनिश्चित न हो पाई हो…. जिस कारण व्यक्तिगत तौर पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को जो दुनिया में अपनी एक धमक रखते हैं उन्हें वक्त पर सम्मान देने से भारतीय जनता पार्टी की सरकार चूक गई हो…. और इसकी खाना-पूर्ति करने के लिए कहीं पर किसी महत्वपूर्ण जगह में उसे महिमा मंडित करें… या सरदार पटेल से बड़ी भी उनकी मूर्ति कहीं लगवा दें… यह बताने के लिए की दुनिया में डॉक्टर मनमोहन सिंह अर्थशास्त्र के महान प्रणेता थे।
किंतु वास्तव में वक्त, हाथ से फिसल गया भविष्य में यदि कांग्रेस धोखे से भी सत्ता में आई और इसी प्रकार की मूर्खता की जिस प्रकार के नीतिगत मूर्खता मोदी सरकार ने की है तब वह इसलिए जयस्त ठहराया जाएगा क्योंकि यह नियम खुद मोदी सरकार ने बनाया था। एक महान अर्थशास्त्री के लिए।
डॉक्टर मनमोहन सिंह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वह भारत के बंटवारे के समय पाकिस्तान के निवासी थे और उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भारत में आना पड़ा दरअसल संयुक्त भारत के संतान थे। इस तरह वह जमीन से उठे शीर्ष पर पहुंचने वाले महान अर्थशास्त्री भी थे। उनके निधन पर जो भी घटिया कूटनीति, राजनीति या भ्रष्ट नीति की गई है उस देश का बड़ा अपमान हुआ है। इसमें कोई शक नहीं है। देखना होगा कितना इस फटे पर अब सरकार रफू करती है या फिर वह अपने घटिया प्रस्तुति को गौरवशाली बनाकर के इतिहास को कुरूप बनती है। जब भी इतिहास महान अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह की मृत्यु की घटना को याद रखेगा निश्चित तौर पर मोदी सरकार की मूर्खता-पूर्ण इस कदम को हमेशा याद रखा जाएगा… जो भारत का एक बड़ा कलंक कहलाएगा। देखते हैं की क्षतिपूर्ति होती भी है या इस आग में और नमक तथा केरोसिन डालने का काम अभी बाकी है… बहरहाल सत्य को कभी दबा कर झुलाया नहीं जा सकता इतिहास इस सत्य को हमेशा याद रखेगा….

                                                                                                         ( त्रिलोकी नाथ )


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles