अमेरिकी राष्ट्रपति ने की आर्थिक साम्राज्यवाद के अप्रत्यक्ष तौर पर विश्व युद्ध घोषणा,भारत ने दिखाई रहस्य में चुप्पी..(त्रिलोकी नाथ)

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 …एक पुरानी कहावत है जब रोम जल रहा था नीरो बंशी बजा रहा था वर्तमान हालात कुछ इसी प्रकार के हैं जब पूंजीवादी राष्ट्र का डोनाल्ड ट्रंप भारत व दुनिया को धमका रहा था तब प्रभावित देश इसका जवाब दे रहे थे और भारतीय कुछ मंत्री लोग करोड़ रूपों की शादी में नाच गा रहे थेऔर प्रधानमंत्री या तो जानवरों के साथ अथवा फिर मंदिर मंदिर फोटो खींच रहे थे, यही वर्तमान राष्ट्र की सच है| अब तो हद हो गई है आलोचक पत्रकार रवीश कुमार ने अपनी वीडियो रिपोर्टिंग रवीश कुमार ऑफिशियल में आरोप लगाया है कि अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं भारत को बेनकाब कर दिया भारत अब अधिक मदद करता है ..यही आर्थिक साम्राज्यवाद विस्तार का स्वरूप है।
तो क्या हम आर्थिक साम्राज्यवाद की इस विश्व युद्ध जिसकी घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने कर दी है उसमें युद्ध के पहले ही सरेंडर हो गए हैं तो हमारा कौन सा राज डोनाल्ड ट्रंप ने पकड़ रखा है यह बड़ी बात है अन्यथा ट्रंप भी एक राष्ट्र है और हम भी एक राष्ट्र हैं… आखिर कमजोरी कहां है इसे जरूर देखना चाहिए…        .(त्रिलोकी नाथ)

पता नहीं पिछले 10 वर्ष में भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा अध्यक्ष ने यह रिसर्च अनुसंधान क्यों नहीं कर पाए कि सांसद सदस्यों निलंबन के समय उनको सदन की परिसर से बाहर रखा जाना चाहिए या नहीं जबकि भाजपा अपने फुल फॉर्म में रही और वह जितना हो सका उतना विपक्षी सदस्यों को अपमानजनक तरीके से संसदीय कार्य से बाहर करती रही .यह देखा भी गया है .किंतु जैसे ही 10 साल के सार्वजनिक रूप से अपमानित प्रताड़ित प्रताड़ना के अपमानजनक व्यवहार के बाद भारतीय जनता पार्टी को दिल्ली में सत्ता में बैठने का अवसर मिला उसने पूरी तरह से कथित तौर पर नियम कानून का अनुसंधान करके यह सुनिश्चित किया की विधानसभा अध्यक्ष बृजेंद्र गुप्ता इस बात को परिभाषित करें की सदस्यता की निलंबन का अर्थ होता है विधानसभा परिसर क्षेत्र से प्रवेश पर प्रतिबंधन .यानी सदस्य या पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रीगण भी यदि निलंबित हैं तो उन्हें विधानसभा परिसर में आने की अनुमति नहीं होगी यह भौगोलिक साम्राज्यवाद का लोकतांत्रिक परिचय है जिसकी जितनी औकात होती है वह उतना पूरा प्रयास करता है ।           

किंतु दुनिया भौगोलिक साम्राज्यवाद के घटियापन से शायद मुक्ति पा रही है नवआर्थिक साम्राज्यवाद की ताकत इसकी परिभाषा सुनिश्चित भी कर रहे हैं रूस ने यूक्रेन पर भौगोलिक साम्राज्यवाद के तमाम तरीके अपना लिए ,इसी तरह इजराइल सैकड़ो साल से इस युद्ध को जीतने का प्रयास करता रहा लेकिन अब युग परिवर्तन हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप आर्थिक साम्राज्यवाद के विश्व युद्ध की घोषणा अप्रत्यक्ष तौर पर कर चुके हैं ।पूंजीवादी राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव जीतने के पहले ही पनामा राष्ट्र को विलय करने की घोषणा कर चुके थे। अगर उनकी शर्त नहीं मानी जाती लेकिन यह सहज नहीं था इसलिए उन्होंने आर्थिक साम्राज्यवाद के जरिए अपनी ताकत को दिखाने के लिए सत्ता में आते ही कई राष्ट्रों में अलग-अलग तरीके से आर्थिक साम्राज्यवाद की प्रभु सत्ता को प्रमाणित करने का प्रयास किया है ।और फिलहाल वह मुंह में अपमान करके राष्ट्रपतियों प्रधानमंत्री को अपनी आर्थिक शक्ति से परिचित कराते रहे हैं।

बीते दिन भारत के साथ भी ऐसा स्पष्ट तौर पर संदेश चलाया है कि अगर आप अपने नागरिकों से ज्यादा पैसा वसूलते हैं टैक्स ले रहे हैं तो उसके मालिक हम पूंजीपति राष्ट्र हैं कुछ इसी नजरिए से उन्होंने अपना संदेश दिया है। ऐसा पहले ब्रिटिश राजतंत्र में देश की आजादी के पहले होता रहा है तब नियंत्रण अंग्रेजों के हाथ में भारत का था अब अमेरिका इस नियंत्रण को हासिल करने के तमाम रास्ते अपना रहा है Modi & Adani Friendshipआर्थिकसाम्राज्यवाद का उपनिवेशवाद कितना खतरनाक होगा इसके अंजाम हमें मीठे जहर के तरीके से समझ में और अनुभव में आएंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सत्ता में आए तो अपने साथ गुजरात के गौतम अडानी को भी ले आए और और उसे दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनने के चक्कर में तमाम प्रकार की पूंजीवाद प्रयोग करने वालों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां उनके हाथों में सौंप जाने लगी लोकतंत्र पूंजीवाद कैसे प्रभावशाली तरीके से कम करें यह देखा गया जिस पेट्रोल डीजल और अमेरिकी डॉलर की की कीमत चढ़ने उतरने से किसी प्रधानमंत्री की उम्र चढ़ती उतरती थी देश की इज्जत बंटी और बिगड़ी थी वह सब कुछ बदल चुका है अब इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि विकास के नाम पर अधिक अधिक पैसा आम नागरिकों और प्राकृतिक संसाधनों से एकत्र करना है ताकि उस दुनिया का कोई बड़ा आदमी भारत में पैदा किया जा सके यह अलग बात है कि जिसे बड़ा आदमी बनाया जा रहा था वह अमेरिका में अपराधी बन बैठा यही पूंजीवाद के आंगन में तेरा क्या काम है के अंदाज में भारतीय नवधानडों को नचाया जाता है।
    पीएम मोदी से मिले एलन मस्क, अपने 3 बच्चों को लेकर गए थे साथ, प्रधानमंत्री  को गिफ्ट भी दिया - Elon Musk met PM Modi took his three children along with  him   अमेरिका में प्रत्यक्ष रूप से यह कम दिखने वाला है उदाहरण के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका में सामने ही कोई पूंजी पति एलन मस्क सत्ता का भागीदार होने के नाते अपने परिवार के छोटे-छोटे बच्चों के साथ भारत के प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करता है तो यह पारिवारिक रूप से पूंजीवाद की अधीसत्ता को भारत के लोकतंत्र में सार्वजनिक तरीके से थोपे जाने का काम होता है। इसकी धमक लोकतंत्र के नेता महसूस तो करते हैं किंतु प्रकट नहीं करते।
अब स्पष्ट तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के कभी मित्र रहे और अब घनिष्ठतम मित्र हो चुके जिनके मान अपमान उन्हें अपना लगने लगा है वह डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ आर्थिक साम्राज्यवाद के लिए विश्व युद्ध की घोषणा कर दी है।अब यह हमारे लोकतंत्र के लिए चुनौती है कि वह इसका मुकाबला कर सकता है या नहीं..? वह जवाब दे सकता है या नहीं..?

जबकी दैनिक जनसत्ता विशेष लिखता है ट्रंप ने कहा संबोधित करते हुए कहा कि अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ शुल्क लगाए हैं औरअब हमारी बारी है कि हम उन देशों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करें। यूरोपीय संघ (ईयू), चीन, ब्राजील,भारत, मेक्सिको और कनाडा क्या आपने उनके बारे में सुना है। ऐसे अनेक देश हैं जो हमारी तुलना में हमसे बहुत अधिक शुल्क वसूलते हैं। यह बिल्कुल अनुचित है। कांग्रेस को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, भारत हमसे 100 फीसद से अधिक आटो. ‘शुल्क वसूलता है।’ फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका प्रशासन जल्द भारत और चीन जैसे देशों पर जवाबी शुल्क लगाएगा। उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी यह बात दोहराई थी। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत को अमेरिका के जवाबी शुल्क से नहीं बख्शा जाएगा और इस बात पर जोर दिया कि शुल्क संरचना पर कोई भी उनसे बहस नहीं कर सकता। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा लगभग 100 अरब अमेरिकी डालर है। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार 50 लाख अमेरिकी डालर का ‘गोल्ड कार्ड’ डेवलप कर रही है, जिससे प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों को अमेरिकी | नागरिकता मिल सकेगी। उन्होंने इसे ग्रीनकार्ड से बेहतर विकल्प बताया।
अथवा जैसा की ट्रंप मोदी से ने अपने मुलाकात के बाद संदेश दिया था कि उसे हमारे कबाड़ हो चुके एफ 35 सैनिक हवाई जहाज खरीदने होंगे.. तो क्या हम ब्लैकमेल होने के तैयार हैं.. अगर हम खरीद लेते हैं तो हम आर्थिक साम्राज्यवाद की युग की घोषणा में स्वयं को सरेंडर कर देते हैं ,ऐसा मानकर क्यों नहीं चलना चाहिए।
तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई आर्थिक साम्राज्यवाद के विश्वयुद्ध जैसा उसने अपनी तरफ से  घोषणा की हैहालांकि पत्रिका समाचार पत्र में आज एक अच्छी खबर आई है वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने कहा है कि अमेरिका से एफ 35 लड़ाकू विमान खरीदना फ्रिज या वाशिंग मशीन लेने जैसा नहीं है जिसे बिना देखे भाले खरीद ले। एयर मार्शल ने कहा अमेरिका में इस बारे में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है और ना ही हमने इसकी लागत जरूरत आदि पर विचार किया है। हालांकि सिंह ने चीन की छठी पीढ़ी की विमान परीक्षण को देखते हुए त्वरित खरीद या स्वदेशी विमान कार्यक्रम तेज करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एफ 35 फाइटर जेट की पेशकश की थी। कहा जाता है करीब 665 करोड रुपए (80 मिलियन डॉलर) की लागत वाला यह जेट विमानों बाजार में सबसे महंगी विकल्पों में से एक है।

 


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