फर्जी राष्ट्रवाद ने फैलाया कन्फ्यूजन….. “ऐसा कलयुग आएगा,…. कौवा (मुनीर)मोती खायेगा..” (त्रिलोकी नाथ)

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फर्जी राष्ट्रवाद ने फैलाया कन्फ्यूजन….. “ऐसा कलयुग आएगा,…. कौवा (मुनीर)मोती खायेगा..” (त्रिलोकी नाथ)

       “मुनीर, महामानव और मोदी…” लिखूं या फिर “महामानव,मुनीर और मोदी…” लिखूं अगर प्रचलित राष्ट्रवादी हो जाऊं तो लिखूं “मोदी, महामानव और मुनीर..” इस हेडिंग को लेकर मैं उतना ही कंफ्यूजन में हूं जितना इस देश के देशवासी इस तरह से कंफ्यूज हैं… की पहलगाम की हत्या के मामले में निर्णायक बिंदु के पहुंचने के पहले आखिर किन लोगों ने और किन शर्तों में, किस उद्देश्य के लिए.. तथाकथित ऑपरेशन सिंदूर को विराम दिया विराम इसलिए क्योंकि भारतीय सत्ताधारी नेताओं का दावा है की ऑपरेशन सिंदूरजारी है।
                                                                   ( त्रिलोकीनाथ )
  मरने वालों को क्या है हमेशा जिंदा रहने के लिए थोड़ी आए हैं गाजा में कहते हैं 60000 आबादी मर गई ,यूक्रेन में भी कई मरे, भारत में तो आतंकवादी हमले में मरते ही रहते हैं। आतंकवादियों द्वारा इसलिए बहुत सोचना भी सिर दर्द है देश दुनिया की राजनीति कुछ इसी दिशा में काम कर रही है..
“ऑपरेशन सिंदूर” जारी है बावजूद इसके पाकिस्तान के राष्ट्रपति को नहीं बल्कि वहां के सेना जनरल मुनीर को स्वयं को शांति का नोबेल प्राइज का हकदार मानने वाले महामानव डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में राष्ट्रपति भवन में लंच के लिए बुलाया। भारत यह मानता है की मुनीर ही वह शख्स है जो आतंकवादियों को तन मन धन से संरक्षित करता है और वह फिर भारत में आकर आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं । पाकिस्तान के राष्ट्रपति तो सिर्फ शतरंज के दिखावटी मोहरे हैं इस बात को महामानव ने इस बार प्रमाणित भी किया है। पाकिस्तान के नेताओं को उनकी औकात में रहने का संदेश देकर किक करते हुए उनके शब्दों में “प्यारे पाकिस्तान” के मुनीर को बुलाकर अपने मोहब्बत का इजहार किया…. हमें तो चींटा लगना ही था क्योंकि तमाम आतंकवादियों को सम्मानजनक तरीके से पाकिस्तान में रखने वाले मुनीर को मोहब्बत जो परोसी जा रही थी। हमारे माय डियर फ्रेंड के द्वारा….
खैर,दुख इस बात का नहीं है कि महामानव ने पाकिस्तान का मुखिया किसे घोषित किया; दुख इस बात का है कि हमारी जो 35 मिनट की बातचीत महामानव से हुई उसका जब खुलासा विदेश सचिव के द्वारा किया तब भी यह नहीं बताया की व्हाइट हाउस में हमारे मोदी को भी बुलाया गया था, हो सकता है वह बिटवीन टू की बात रही हो… इसलिए हम सिर्फ 35 मिनट को 35 मिनट में सीमित कर दिए. अब महाप्रभु के दरबार में आकर प्रधानमंत्री मोदी जब यह कहते हैं की ट्रंप ने उन्हें भी खाने में बुलाया था लेकिन उन्होंने महाप्रभु (भगवान जगन्नाथ जी) के मोहब्बत में ट्रंप (महामानव) के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। बहुत गौरव की बात है हम ट्रंप को जवाब दे सकते हैं, लेकिन यही बात जब फोन पर हुई थी उसके बाद ठीक उसी समय उसी अंदाज में अपनी अपनी गति के हिसाब से ट्वीट करके कनाडा की ही धरती से ट्विटर के माध्यम से या किसी अन्य माध्यम से बोल दी गई होती की निमंत्रण महामानव का इसलिये अस्वीकार कर दिया. क्योंकि महाप्रभु से मोहब्बत थी। तो बात दिल को छू जाती, हम महरूम रह गए. कान तरस गए यह ना हो सका।
अब “का, वर्षा जब कृषि सुखानी…”के अंदाज में मोदी जी बोल रहे हैं तो कन्फ्यूजन हो रहा है कि वह क्या सच बोल रहे हैं या फिर यूं ही फेंक रहे हैं… इस सुख का लाभ बताओ नागरिक एक प्रधानमंत्री हमें क्यों नहीं दे पाए… इसका भी कंफ्यूजन है ।
इसलिए हेडिंग कंफर्म नहीं हो रही है कि आगे महामानव है या मुनीर है या मोदी है यह अलग बात है कि ना तो महामानव (ट्रंप जो बात बात में झूठ बोलते हैं ऐसा प्रमाणित हुआ है,) अमेरिका है या मुनीर है (जो पाकिस्तान का ना तो राष्ट्रपति है ना कोई जनप्रतिनिधि है बल्कि आतंकवादियों आपका शरण डाटा मुखिया है) जो कुछ नहीं होकर भी सब कुछ है, उसे व्हाइट हाउस (सफेद भवन) में उसके काले कारनामे छुपाने के लिए किसी सौदेबाजी के लिए बुलाया जाता है.., खाना खिलाया जाता है तो कन्फ्यूजन तो होता है । लेकिन उससे ज्यादा कन्फ्यूजन तब होता है जब कनाडा में यही महामानव हमारे मोदी जी को बुलाता है और मोदी जी इस महान अवसर का लाभ उठाते हुए महाप्रभु के मोहब्बत में जो निमंत्रण स्वीकार करते हैं उसे वह कनाडा से ट्वीट ना करके “सत्य कहूं मैं शपथ जान-की के अंदाज में..”महाप्रभु की धरती से जो बात बोलते हैं उससे तो कन्फ्यूजन पैदा ही होता है.. कि उन्होंने कनाडा की धरती में जो आपदा आए उसका अवसर का लाभ क्यों नहीं उठाया…? कुछ होता या ना होता पिछले 30-35 दिन से पहलगाम की हत्या कांड के बाद जो भारत का आतंकवाद के विरुद्ध जो मन एकात्मवाद की तरह उठ खड़ा हुआ था अब वह भारतीय गंगा की तरह प्रदूषित हो चुकी भारतीय राजनीति में डुबकी लगाने लगा है, ऐसा लगता है मानो कुंभ तो हमने स्नान किया उसके लिए सैकड़ो की संख्या में हमने बलिदान भी दिया …लेकिन हजारों करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद हमें 144 साल बाद आए इसकुंभ में नहाना तो इलाहाबाद की नाली के पानी से पड़ा .. यह अलग बात है कि उसमें गंगा समाहित थीं इसलिए हम गंगाजी से अभीभूत होकर डुबकी लगाई तबीयत भी खराब हुई लेकिन संतोष था “तेरी एक बूंद के प्यासे हम… के अंदाज में एक बूंद ही सही गंगा का कुंभ में हमें लाभ मिला.. बाकी गंगा मां जाने। जिन्होंने मोदी को काशी में बुलाया था…
बहरहाल कन्फ्यूजन बहुत है की हेडिंग किसको बनायें। क्योंकि अगर मुनीर के साथ मोदी महामानव पर दावत व्हाइट हाउस में स्वीकार करते तो बात किसी न किसी निर्णय पर तो पहुंच ही जाती। जब मध्यस्थता ट्रंप महामानव को ही करना था…।
तो क्या यही कंफ्यूजन था मोदी जी को कि उन्होंने निमंत्रण अस्वीकार कर दिया की एक और सफाई कहां तक दे पाएंगे…? डियर फ्रेंड के चक्कर में। वह तो सनकी है ही, इस समय सौदेबाजी के चक्कर में माया मिली ना राम के तर्ज में इजराइल को भी भ्रम में रखा और ईरान को भी… दोनों को लड़ा भी दिया, आत्महत्या करने के लिए। इसलिए लगता है बेहतर किया मोदी जी ने।
रही अडानी की बात तो अमेरिका में उनका प्रकरण भारत में अमेरिका वाशी पूंजी पत्तियों के पैसे से टेंडर पाने के चक्कर में तथाकथित 2200 करोड रुपएघूंस बांटने का है इसे फिर किसी निमंत्रण में सुलझा लिया जाएगा। ठीक ही किया जो दूरी बना ली।
लेकिन फिर कहते हैं जो राष्ट्रीय गौरव हो फील-गुड होने का अवसर था, कनाडा की ही धरती से क्षण भर के लिए ही हमें सुख जो मिलना था ट्विटर के माध्यम से कि हमने निमंत्रण अस्वीकार कर दिया… उसका सुख हमें नहीं मिल पाया हे। महाप्रभु हमें भी इतनी बुद्धि देना कि हम आलेख की हेडिंग में आगे मोदी का नाम लिख सके, नहीं तो अमेरिका का प्यार पाकिस्तान को यूं ही मिलता रहेगा। कोई नमूना मुनीर , नापाक तरीके से पाकिस्तान की धरती में जो कभी हमारी ही धरती थी आतंकवादियों का ट्रेनिंग सेंटर बनाकर शांति का नोबेल पुरस्कार या तो लेने चला जाएगा या फिर महामानव को दिलाने चला जाएगा। यह आपका कैसा कंफ्यूजन है….?


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