
अमरकंटक ताप विद्युत गृह ,लागत 11 हजार 476 करोड़ 31 लाख रूपये का अनुमोदन चचाई की पुनरीक्षित लागत का अनुमोदन
मंत्रि-परिषद द्वारा म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की 660 मेगावाट की अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई की पुनरीक्षित लागत 11 हजार 476 करोड़ 31 लाख रूपये का अनुमोदन प्रदान किया गया है। परियोजना का वित्त पोषण 20:80 अंशपूँजी एवं ऋण के अनुपात में किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा 20 प्रतिशत अंशपूँजी में से 699 करोड़ 90 लाख रुपये की राशि प्रदान की जायेगी और शेष राशि की व्यवस्था मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड दवारा स्वयं के स्त्रोत से की जायेगी। राज्य शासन दवारा वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रदान/आवंटित की गई 365 करोड़ रुपये की राशि के अतिरिक्त शेष राज्यांश वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक की अवधि में 66 करोड़ 98 लाख रुपये विभागीय बजट के माध्यम से प्रत्येक वर्ष म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड को उपलब्ध कराई जायेगी।
अल्पावधि में डॉलर के मुकाबले 88.75रुपये में गिरावट से निर्यातकों को मदद मिलेगी
मुंबई: 23 सितंबर (भाषा) रुपया मंगलवार को 47 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.75 (अस्थायी) के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के रिकॉर्ड 88.75 के स्तर से नीचे गिरने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन निर्यातकों ने आगाह किया है कि यह उतार-चढ़ाव आयात के मोर्चे पर कई चुनौतियां पैदा कर सकता है।कहा कि रत्न एवं आभूषण, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयात-निर्भर क्षेत्रों को लागत में वृद्धि के कारण कम लाभ मिल सकता है।
बिना सर्जरी के मस्तिष्क कोशिकाओं को उत्तेजित करने वाली नैनो सामग्री का आविष्कार
इसके विपरीत, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों द्वारा पहचाने गए ग्रेफाइटिक कार्बन नाइट्राइड, न्यूरॉन्स से स्वाभाविक रूप से “क्रियाशील” करने में सक्षम है। तंत्रिका कोशिकाओं के पास रखे जाने पर, यह मस्तिष्क के वोल्टेज संकेतों के प्रत्युत्तर में सूक्ष्म विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये क्षेत्र न्यूरॉन्स पर कैल्शियम चैनल खोलते हैं, जिससे कोशिकाओं की वृद्धि होती है और उनके बीच सम्बंध बिना किसी बाहरी उपकरण के बेहतर होते हैं।

चित्र: g-C3N4 प्रेरित तंत्रिका विभेदन और नेटवर्क निर्माण की हमारी प्रस्तावित क्रियाविधि का आरेख। तंत्रिका कोशिकाएं विश्राम झिल्ली विभव (-90 mV) से क्रिया विभव (+55mV) से गुजरती हैं।यह पदार्थ एक स्मार्ट स्विच की तरह कार्य करते हुए न्यूरॉन्स की विश्राम और सक्रिय अवस्थाओं के साथ प्रतिक्रिया करता है तथा स्वस्थ मस्तिष्क गतिविधि के लिए सही परिस्थितियां निर्मित करता है।वैश्विक जनसंख्या के वृद्धावस्था वर्ग में, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियां तेजी से आम होती जा रही हैं।इस समस्या के समाधान के लिए आईएनएसटी के शोधकर्ताओं ने इस अर्धचालक पदार्थ को इस परिकल्पना के साथ चुना कि ऋणात्मक झिल्ली क्षमता की उपस्थिति में यह पदार्थ चालू अवस्था में होगा और कोशिकाओं को उत्तेजित करेगा, जबकि धनात्मक झिल्ली क्षमता की उपस्थिति में यह बंद अवस्था में होगा, जिससे कोशिकाएं थकान की स्थिति से गुजर नहीं पाएंगी।
उन्होंने व्यापक प्रयोगों के आधार पर इस परिकल्पना की पुष्टि की है। इसमें न्यूरोनल नेटवर्क गठन और परिपक्वता, जीन अभिव्यक्ति विश्लेषण और इम्यूनोफ्लोरेसेंस-आधारित अध्ययन को समझने के लिए Ca2+ इमेजिंग अध्ययन शामिल थे।मस्तिष्क कोशिकाओं को उत्तेजित करने और रोग-सम्बंधी प्रोटीन को कम करने की क्षमता वाला यह जैव-संगत नैनोमटेरियल लाखों लोगों के लिए एक संभावित गैर-आक्रामक चिकित्सा प्रदान करता है।अध्ययन को निर्देशित करने वाले डॉ. मनीष सिंह ने बताया है कि यह अर्धचालक नैनोमटेरियल द्वारा बिना किसी बाहरी उत्तेजना के सीधे न्यूरॉन्स को नियंत्रित करने का पहला प्रदर्शन है। यह पार्किंसंस और अल्ज़ाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के लिए नए उपचार का मार्ग प्रशस्त करता है।यह सफलता “ब्रेनवेयर कंप्यूटिंग” जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए भी लाभदायक हो सकती है। दुनिया भर के वैज्ञानिक ब्रेन ऑर्गेनॉइड्स—प्रयोगशाला में विकसित छोटे मस्तिष्क ऊतकों—का जैविक प्रोसेसर के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। इन्हें g-C₃N₄ जैसे अर्धचालक नैनोमैटेरियल्स के साथ जोड़कर इन लिविंग कंप्यूटरों को और अधिक कुशल बनाया जा सकता है और इससे जैव-प्रेरित कंप्यूटिंग में नए आयाम खुल सकते हैं।
डॉ. सिंह यह भी कहा, “हमारा मानना है कि यह न्यूरोमॉड्यूलेशन अनुसंधान में एक बड़ा बदलाव है। मस्तिष्क की चोटों के उपचार से लेकर न्यूरोडीजनरेशन के प्रबंधन तक, अर्धचालक नैनोमटेरियल भविष्य के लिए अपार संभावनाएं रखते हैं।”आईएनएसटी की टीम ने बताया कि मानव अनुप्रयोगों से पहले अधिक प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल अध्ययनों की आवश्यकता है।मस्तिष्क की चोटों के उपचार या अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज में मदद करने के लिए विकल्प खोजने की दिशा में यह शोध ऊतक इंजीनियरिंग प्रयोजनों के लिए अर्धचालकों के चिकित्सीय अनुप्रयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भाजपा सांसद सुधाकर की पत्नी ने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के ज़रिए 14 लाख रुपये गँवाए, रकम बरामद
बेंगलुरु: (23 सितंबर) बेंगलुरु पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई में, भाजपा चिक्कबल्लापुर सांसद के. सुधाकर की पत्नी प्रीति द्वारा ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के ज़रिए साइबर धोखाधड़ी में गँवाए गए 14 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं।पुलिस के अनुसार, यह घटना 26 अगस्त को हुई थी।डिजिटल गिरफ्तारी एक साइबर घोटाला है जिसमें धोखेबाज़ पुलिस या प्रवर्तन एजेंसी के अधिकारियों का रूप धारण करके व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ितों को धमकाते हैं और दावा करते हैं कि उन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

