
शहडोल में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण: व्यापारियों का गुस्सा और प्रशासन की चुनौती
शहडोल, 9 अक्टूबर 2025 :
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बुढार रोड मुख्य मार्ग पर एक व्यापारी के अवैध निर्माण को नगर पालिका ने आज ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई व्यापारी लाहोरानी की दुकान पर की गई, जो बिना नगर पालिका की अनुमति के निजी भूमि पर बनी थी। हालांकि, यह भवन सड़क या उसके अतिक्रमण को किसी भी रूप से प्रभावित नहीं कर रहा था। इस घटना ने स्थानीय व्यापारी वर्ग में भारी असंतोष पैदा कर दिया है, जो पहले ही अतिक्रमण हटाने और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आंदोलनरत है।
घटना का विवरण: रिश्वत की मांग या सख्ती का संदेश?
व्यापारी लाहोरानी ने ध्वस्तीकरण के बाद एक संवाददाता से बातचीत में दावा किया कि नगर पालिका के अधिकारियों ने भवन को वैध बनाने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। “मैं पेनल्टी देने को तैयार था, लेकिन अवैध राशि देने के पक्ष में नहीं था। इसके बावजूद इस अस्थाई भवन को उठा दिया गया,” लाहोरानी ने कहा। उन्होंने बताया कि भवन निजी भूमि पर था और सड़क चौड़ीकरण या सार्वजनिक हित को प्रभावित नहीं कर रहा था।
नगर पालिका के अधिकारियों ने इस आरोपों का खंडन किया है, लेकिन कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई हालिया सड़क चौड़ीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसमें इंदिरा चौक से बलपुरवा चौक तक कई व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस दिए गए थे। पूर्व में भी इसी तरह के अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई चुनिंदा और मनमानी है।
शहडोल में अवैध निर्माण की पुरानी बीमारी: दोहरी नीति का आरोप
शहडोल, जो संभाग मुख्यालय होने का दावा करता है, अवैध निर्माण और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। शहर के गुरु नानक चौक से साइन मंदिर चौक तक की सड़क, जो कमिश्नर बंगले तक जाती है, चौड़ीकरण के बाद भी अविकसित बनी हुई है। इस लगभग 300 मीटर के हिस्से में अतिक्रमण न हटाए जाने से करीब 1 किलोमीटर लंबी चौड़ी सड़क की सुंदरता नष्ट हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि यहां कुछ स्वार्थी नेताओं के हित जुड़े होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक पुरानी घटना इस दोहरी नीति को उजागर करती है। करीब 10-12 साल पहले, नया गांधी चौक पर शासकीय जमीन पर रातों-रात बने तीन मंजिला अवैध भवन पर न्यायालय ने 90,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। इस निर्माण के दौरान कई वर्ष पुराने पीपल के पेड़ भी काट डाले गए थे। भवन नगर पालिका कार्यालय के ठीक बगल में बना, लेकिन नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। तहसीलदार के गिराने के आदेश के बावजूद भवन आज भी खड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि अवैध निर्माण के आधे हिस्से पर भूमिहीन होने का दावा कर पट्टा हासिल कर लिया गया, जो न्यायालय की कार्रवाई के बावजूद संभव हुआ। यह भवन अब “भ्रष्टाचार का चंद्रलोक” कहलाता है, जो नगर पालिका के आंतरिक भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है।
व्यापारियों का विरोध: नगर बंद से चुनौती का जवाब
इस दोहरी नीति के खिलाफ व्यापारी वर्ग में लंबे समय से गुस्सा पनप रहा था। हाल ही में इंदिरा चौक से बलपुरवा चौक तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नोटिस मिलने के बाद व्यापारी संघ ने नगर बंद का आयोजन किया। उन्होंने मांग की कि ऐसी कार्रवाइयां व्यापारियों की सहमति से हों और शहर के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्रशासन ने इसका जवाब लाहोरानी के भवन को ध्वस्त कर एक प्रकार की चुनौती के रूप में दिया है, जो संदेश देता है कि “काम में कोई समझौता नहीं होगा”।
हालांकि, व्यापारी इसे निष्पक्ष नहीं मानते। “यह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण कार्यवाही की श्रेणी में नहीं आता। करोड़ों रुपये खर्च कर पदाधिकारी पद पर कब्जा करने वाले अपना मुआवजा कहीं न कहीं वसूलते हैं,” एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा। व्यापारी संघ का कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव में नागरिकों में भारी असंतोष है।
भविष्य की आशंका: दिवाली पर साया या सुधार की उम्मीद?
इस घटना के बाद व्यापारियों का दिवाली उत्साह फीका पड़ गया है। कुछ का मानना है कि यह चुनौती उनके “दीवाले” निकाल देगी, जबकि अन्य उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस असंतोष पर नजर रखेगा। सवाल यह है कि क्या शहडोल प्रशासन भ्रष्टाचार के “राम राज्य” में मौन व्रत धारण कर लेगा, या पारदर्शी और निष्पक्ष नीतियां अपनाएगा? शहर के विकास के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन मनमानी कार्रवाई से व्यापारी वर्ग का विश्वास टूट रहा है। नगर पालिका को चाहिए कि वह सभी स्तरों पर एकसमान नीति अपनाए और रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए। अन्यथा, यह विवाद और गहरा सकता है, जो शहडोल जैसे संभाग मुख्यालय की छवि को धूमिल करेगा।

