लोकसभा का अघोषित मध्यावधि चुनाव यानी बिहार विधानसभा चुनाव 2025;समाजवाद की धरती पर पूंजीवादी हमला ; बिहार बना  राजनीतिक प्रयोगशाला-(त्रिलोकी नाथ )

Share

लोकसभा का अघोषित मध्यावधि चुनाव यानी बिहार विधानसभा चुनाव 2025: समाजवाद की धरती पर पूंजीवादी हमला ; बिहार ना  राजनीतिक प्रयोगशाला
    स्वतंत्र भारत की राजनीति में बिहार हमेशा से एक प्रयोगशाला रहा है—जहां जाति, विचारधारा और सत्ता की जटिल जड़ें आपस में उलझी हुई हैं। लेकिन 2025 का विधानसभा चुनाव इस प्रयोग को एक नया मोड़ दे रहा है। यह चुनाव केवल 243 सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवाद के बचे-कुचे अवशेषों पर कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री (कापाई) के रहस्यमयी हमले का प्रतीक है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो भी समाजवादी छवि बची थी, वह अब खतरे में है। भाजपा-नीतीश गठबंधन की आड़ में यह हमला इतना सूक्ष्म है कि परिणाम चाहे जो हो, नीतीश को अगली बार मुख्यमंत्री का ताज पहनाने की कोई संभावना नहीं। यह एक सुनियोजित रणनीति है—समाजवाद को बचाने का ढोंग करते हुए उसे धीरे-धीरे समाप्त करना, जैसे गांधी और पटेल के नाम पर उनकी विचारधारा को खोखला किया गया।
समाजवाद का पतन: कॉर्पोरेट इंडस्ट्री का छिपा चेहरा
बिहार की मिट्टी समाजवाद की है। लोहिया की विरासत यहां आज भी सांस लेती है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा को नीतीश को बर्दाश्त करने की मजबूरी हुई क्योंकि केंद्र की सरकार लड़खड़ा सकती थी। नीतीश अल्पमत में भी मुख्यमंत्री बने रहे, लेकिन अब वह दौर बीत चुका। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने शताब्दी समारोह में लोहिया का नाम लेकर समाजवाद को महत्व देने का ढोंग किया, लेकिन वास्तव में यह एक छलावा है। आरएसएस और कापाई (कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री) का गठजोड़ समाजवाद को गठबंधन की तराजू में तौल रहा है—
समझौते का नाम देकर इसे कुचलना। सत्ता की खून लग चुकी है; नीतीश इससे अलग नहीं होना चाहते, क्योंकि बिना सत्ता के उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। लेकिन यह प्रतिघात इतना बड़ा है कि प्रतिकार भी उतना ही कठोर होगा। बिहार इसकी सबसे बड़ी परीक्षा बनेगा। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे

एनडीए ने सीटों का बंटवारा कर लिया है—जदयू और भाजपा को 101-101 सीटें, एलजेपी (राम विलास) को 29, जबकि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को । नीतीश को सीएम फेस घोषित कर एनडीए ने एकजुटता दिखाई, लेकिन अंदरूनी खींचतान साफ है। भाजपा की पहली सूची में 71 उम्मीदवारों के नाम हैं, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तरापुर से और विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से लड़ेंगे। जदयू ने 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, और नीतीश 16 अक्टूबर को समस्तीपुर से प्रचार शुरू करेंगे विपक्षी महागठबंधन में अभी सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनी, कांग्रेस ने 48 उम्मीदवारों की सूची जारी की लेकिन आरजेडी से पेंच अटका है

प्रशांत किशोर: कापाई का सौदेबाज या नया चेहरा ?

इस सारी साजिश में प्रशांत किशोर का नाम सबसे ऊपर आता है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक किशोर को कापाई का सफल सौदेबाज कहा जा सकता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को जीत दिलाने में उनकी भूमिका थी, लेकिन अब वे बिहार की राजनीति में सीधे उतर चुके हैं। जन सुराज ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है—65 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी हो चुकी, लेकिन किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी ने संगठन मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया, लेकिन लक्ष्य 150 सीटें हैं—कम होने पर इसे हार मानेंगे। किशोर का दावा है कि जदयू को 25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी और नीतीश दोबारा सीएम नहीं बनेंगे।

क्या यह मिथक है कि किशोर भाजपा की उपमुख्यमंत्री या सीएम बन सकते हैं?
उनकी रणनीति में राघोपुर (तेजस्वी यादव का गढ़) से लड़ने की चर्चा थी, लेकिन अब चंचल सिंह को टिकट मिला। किशोर भाजपा की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रहे हैं—गोदी मीडिया के चैनल जदयू की कमजोरी पर चिल्लाते हैं, लेकिन भाजपा की सीटों पर सवाल नहीं उठाते। अगर जन सुराज तेजस्वी के खिलाफ खड़ी हो जाती है और जदयू को कम सीटें मिलती हैं, तो किशोर एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।नीतीश की ईमानदार छवि को नष्ट करने का ठेका किशोर को सौंपा गया लगता है।

सौदा अमेरिकी पूंजीवादी लोकतंत्र जैसा —ट्रंप की तरह धमकियां देकर शांति का नोबेल दावा करना। मोदी की चुप्पी इस सौदेबाजी की सहमति है। किशोर की पदयात्रा और ‘बिहार बदलाव’ रैली से वे तीसरा विकल्प बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जाति-तटस्थ मुद्दों (रोजगार, शिक्षा) पर फोकस करते हुए भी कापाई का चेहरा छिपा नहीं पाते।

शाम दाम दंड भेद: संस्थाओं का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का चरम
नामांकन की अंतिम तारीख (17 अक्टूबर) नजदीक आते ही ताश के पत्ते खुले जा रहे हैं सीबीआई, ईडी, चुनाव आयोग और न्यायपालिका को हथियार बनाया जा रहा है। वोट चोरी के आरोप, इलेक्टरल बॉन्ड से इकट्ठे हजारों करोड़ों के काले धन का इस्तेमाल—यह सब समाजवाद की धरती पर एक बड़ा प्रयोग है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी से 20% प्रवासी युवाओं को वंचित किया जा रहा। एनडीए का ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान और मोदी की बूथ वर्कर्स से बातचीत इसी की कड़ी है।
तेजस्वी के खिलाफ अगर वे राघोपुर में खड़े होते, तो वोट विभाजन से महागठबंधन कमजोर होता। लेकिन किशोर की रणनीति साफ है—समाजवादियों को एकजुट होने दो, हम कापाई वाले इकट्ठे होकर हमला करेंगे। लाल किले से मोदी का 15 अगस्त भाषण, जहां आरएसएस को एनजीओ बताया, एक हस्ताक्षर था—बिहार तक मोदी की कुर्सी सुरक्षित।
बिहार: लोकसभा का मध्यावधि चुनाव
यह चुनाव लोकसभा का मध्यावधि परीक्षण है। अगर एनडीए हारती है, तो केंद्र लड़खड़ा सकता है। तेजस्वी यादव महागठबंधन के चेहरे हैं, लेकिन किशोर का प्रवेश त्रिकोणीय लड़ाई बना रहा। भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचेगा—क्योंकि हार का मतलब कापाई और आरएसएस का राजनीति से खात्मा। किशोर खुद कहते हैं कि जन सुराज अर्श या फर्श पर होगी, लेकिन यह भाजपा के लिए कोडवर्ड है।
भारत का ऊंट किस करवट…?

इस तरह बिहार की 12 करोड़ जनता के पास देश के 140 करोड़ जनता का भविष्य इस विधानसभा कम लोकसभा के मध्य अवधि चुनाव की जिम्मेदारी को भी देखना होगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे भारत की राजनीति में जो प्रदूषण आया था जो गंदगी आई थी उसका परिणाम हम शहडोल के सुहागपुर विधानसभा चुनाव में उसे परिणाम के रूप में दिए थे जिसने दुनिया के पहलेकिन्नर विधायक शबनम मौसी को विधायक बनाकर लोकतंत्र की सत्ता को हमने चुनौती दी थी। इस बार बिहार की जनता पर यही चुनौती देने का गंभीर संकट आप पड़ा है देखते हैं क्या होता है बिहार की जनता के हाथ में है—समाजवाद बचाना है या पूंजीवादी सौदेबाजी को बढ़ावा देना। नीतीश-तेजस्वी गठबंधन ने साबित किया कि समाजवादी एक हो सकते हैं, लेकिन कापाई-भाजपा का हमला बेशर्म है। अगर सफल हुए, तो किशोर उपमुख्यमंत्री बन शपथ लेंगे; हार गए, तो भाजपा का दागदार चेहरा उजागर होगा। यह ‘इस पार या उस पार’ की लड़ाई है—स्वतंत्र भारत की भविष्य कल्पना यहां आकार लेगी। देखते हैं, ऊंट किस करवट बैठता है। बिहार की धरती पर समाजवाद की जड़ें गहरी हैं; शायद यही प्रतिकार का बीज बोए।

                                                                  ————–त्रिलोकी नाथ G——————-


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles