वोट-चोरी ; नवाचारों का मनोरंजक युग: नरसरहा से बिहार तक लोकतंत्र की पारदर्शी लूट…? (त्रिलोकी नाथ)/यात्रा उद्देश्य, घुसपैठियों की रक्षा करना था- चुनाव प्रचार में गृह मंत्री

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वोट-चोरी; नवाचारों का मनोरंजक युग: नरसरहा से बिहार तक लोकतंत्र की पारदर्शी लूट…? 
प्रशांत कुमार होंगे बिहार के मुख्यमंत्री…? यह भी होगा नवाचार….
  Image result for स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)  भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका मतदान है, लेकिन जब यही मतदान ‘पारदर्शी’ तरीके से चोरी होने लगे, तो यह मनोरंजन बन जाता है। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के नरसरहा मतदाता क्षेत्र की घटना इसकी शुरुआती स्क्रिप्ट थी। तीन कांग्रेसी समर्थक मतदाता, जो दशकों सेवोट डालते आ रहे थे, पिछली विधानसभा चुनाव के दिन पहुंचे तो प्रेसिडिंग ऑफिसर ने कहा: “आपका नाम डिलीट हो गया।” बहस हुई, निरर्थक साबित हुई। फोन पर तत्कालीन कलेक्टर वंदना वैद्य से शिकायत की गई, तो वे हंसते हुए बोलीं: “ऐसा कैसे हो सकता है?” जांच हुई तो पता चला कि BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ने BJP कार्यकर्ता की सहमति और पंचनामा के आधार पर नाम काट दिए, क्योंकि “वे यहां नहीं रहते।” चुनाव गुजर गया, वोट चोरी हो गया। बाद में रस्साकशी के बाद नाम इसी नरसरहा में जुड़ भी गया, लेकिन वोट  तीनों ने नहीं दियाथा.. तो वोट चोरी हो चुका था ; ऐसा कह सकते हैं। अन्यथा किसे  किसका मत कहां पर है और क्यों काटा जाना चाहिए और अगर काटा जा रहा है तो कहां जुड़ा होना चाहिए..? क्या वह जोड़ा गया था.. नहीं . वोट तो चोरी करना था और वोट चोरी हो गया… बस खेल खत्म, प्रयोग सफल रहा…. 
——————-(त्रिलोकी नाथ)———————-
यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक प्रायोगिक सफलता थी –
यह एक सफल प्रयोग भी था ऐसाभी कह सकते हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, जिन्हें बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ‘सफलता’ का श्रेय मिला, ने इसे 12 राज्यों में लागू करने का निर्देश दे दिया। मध्य प्रदेश में नवंबर से SIR शुरू हो गया। लेकिन SIR क्या है? नाम हटाने का वैधानिक हथियार…?
हरियाणा में यह पहले ही खेल चुका था, जहां मतदाता सूची में ब्राजीलियन मॉडल की महिला का नाम बार-बार उभरा। राहुल गांधी ने तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे उजागर किया। पहली दो में वोट चोरी के पारंपरिक तरीके – डुप्लिकेट वोटर, डिलीशन, माइग्रेशन फर्जीवाड़ा। लेकिन 5 नवंबर की कॉन्फ्रेंस ‘हाइड्रोजन बम’ थी। हरियाणा चुनावों पर केंद्रित, लेकिन वोट चोरी को ग्लोबल बताया – ब्राजीलियन मॉडल का नाम मतदाता सूची में! यह मैनिपुलेशन का नया आयाम। राहुल ने पूछा: चुनाव आयोग सबसे पारदर्शी है, तो विदेशी नाम कैसे?

पेगासस अफवाह थी, अब यह नई कथा बनेगी – विदेशी एजेंसी की मदद से सूची फर्जीकरण, जहां इंडियन नाम चुनने की रुचि ही नहीं?
  6 नवंबर को बिहार के पहले चरण का मतदान।सांसद राकेश सिन्हा वोट डालते दिखे वही, जो फरवरी में दिल्ली विधानसभा में वोट कर चुके थे। कानूनी अवतार में वोट चोरी! का यह नया संस्करण रहा। और इस चोरी में वह सीनाजोरी भी करते हैं। की क्या मानहानि नहीं किया जाना चाहिए..।
रेल गाड़ियां भर-भर कर मतदाताओं को बिहार पहुंचा रही थीं, खर्च अज्ञात ‘आसमानी ताकत’ से
BJP के आईडियोलॉजी चेहरे कानून की आड़ में गुणगान कर रहे थे। बिहार में बाहुबली गोलियां चला रहे, 50-100 गाड़ियों का काफिला आम हैं .देश के गृह मंत्री कहते हैं छुटपुट घटनये होती रहती हैं क्योंकि बिहार में मोकामा में माफिया गिरी के चलते एक प्रत्याशी के समर्थक की चुनाव प्रचार के दौर गोली मार, हत्या कर दी , मोकामा का ‘छोटे सरकार’ जेल जाते हुए सरकार को गरिया रहा था।

राहुल गांधी चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग नवाचारों में व्यस्त – वे नवाचार जो कानून अमान्य करता है,

फिर भी संज्ञान बाहर सुप्रीम कोर्ट की स्वयं संज्ञान प्रणाली ‘शो मोटा’ मोड में क्यों नहीं…?
राहुल ने कहा: बोट चोरी पर तीन वार्ताएं सार्वजनिक, कोर्ट देख रहा, फिर क्यों चुप? शहडोल की याद आती है – बंद हो चुके ‘दैनिक जनबोध’ में खबर: तत्कालीन मंत्री कृष्णपाल सिंह निर्वाचन अधिकारी के कक्ष में निर्वाचन के फॉर्म भरने पहुंचते हैं तब, निर्वाचन अधिकारीअधिकारी मुस्कुराते स्वागत करने की खबर छपती है दो लाइन में। यह खबरटेलीग्राम से कटिंग दिल्ली भेजी गयी तो तत्काल अधिकारी बदले। वह संवेदना थी, मत की सुरक्षा की। अब बिहार में खुली लूट।

अब कल्पना करें: सोहागपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बनी शबनम मौसी अगर प्रधानमंत्री हैं और वह निरंतर सत्ता सुख  चाहिए, तो लोकतंत्र नियंत्रित कैसे करेंगी? वास्तव में शबनम मौसी को ज्ञान कम है, ऐसी स्थिति स्थिति में उसे नियंत्रित करने वाला सिस्टम पूरा – यूनिवर्सिटी, बौद्धिक विज्ञान, वोट चोरी के हर आयाम की रोडमैप करके देगा। तभी यह संभावना है अलग-अलग नवाचारों से नए आयाम से वोट चोरी के रास्ते शबनम मौसी तलाश करेगी तभी वह सत्ता पर रह सकती है अन्यथा नहीं।

काकस तैयार: BLO से SIR तक, रेल गाड़ियां से विदेशी मॉडल तक। BJP कार्यकर्ता जैसे लोकल एजेंट, चुनाव आयोग जैसे सेंट्रल कंट्रोलर। नरसरहा भी प्रयोग था.
बिहार परिणाम 14 नवंबर को आएगा लेकिन वह वास्तव में लोकसभा को प्रणाम दी निष्कर्ष भी देगा। अगर विधानसभा चुनाव में हम बिहारी तरीके से मनोरंजन पूर्ण निष्कर्ष पर सपना देखे तो, तो मनोरंजन पीक पर प्रशांत कुमार मुख्यमंत्री बनें, तो नया युग की शुरुआत होगी। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लाने का दावा यही प्रशांत कुमार करते रहे। तो आश्चर्य क्यों होना चाहिए आखिर मनोरंजन ही तो है।तब तक यह क्लाइमैक्स फिल्म – नरसरहा से ब्राजील तक, पारदर्शी वोट चोरी की अनंत कथा का मनोरंजन क्यों न करें?

 

 ‘घुसपैठियों के लिए गलियारा’ बनाने की कोशिश का आरोप लगाया-शाह 

सासाराम/अरवल (बिहार): (9 नवंबर) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को विपक्ष पर “घुसपैठियों के लिए गलियारा” बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “औद्योगिक गलियारा” बनाना चाहते थे।विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के प्रचार के अंतिम दिन, बिहार के सासाराम और अरवल शहरों में लगातार रैलियों को संबोधित करते हुए, शाह ने भविष्य का वादा करते हुए कहा कि “पाकिस्तान पर गिराए जाने वाले मोर्टार गोले इसी राज्य की एक आयुध फैक्ट्री में बनाए जाएँगे”।शाह ने आरोप लगाया, “हाल ही में, राहुल और लालू के बेटे (तेजस्वी यादव) ने ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ निकाली थी। इसका उद्देश्य बिहार में रहने वाले गरीबों, दलितों और अति पिछड़ों के जीवन में कोई सुधार लाना नहीं था। इसका उद्देश्य घुसपैठियों की रक्षा करना था।”

 


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