
अब राजनीतिक दल शहडोल में एक परिवार में खुलेआम बिहारी स्टाइल पर दबंगई दिखाते हुए बलबहरा गांव में हमला करते हैं और परिवार के 2 युवकों की हत्या कर देते हैं एक के एक को मरनासन्न छोड़ देते हैं। इसमें भाजपा के नेताओं के साथ हत्यारों की फोटो भी आती है इस पर कोई चर्चा नहीं होती…. भाजपा की राजनीति में जन्मोत्सव का पाखंड आडंबर के रूप में इस मृत्यु उत्सव में उनके सोशल मीडिया में भी छाया रहा। यह घटना आदिवासी क्षेत्र शहडोल में छोटे सरकारों का छायाचित्र है। आज ही खबर है इसी क्षेत्र में किसी महिला ने आवाज लगाई है जनसुनवाई में कि उनके द्वारा की गई खेती को दबंग काटने नहीं दे रहे हैं यही तो दबंगई है यही ट्रेनिंग सेंटर है यही ट्रेलर है फिल्म का…? ——(त्रिलोकी नाथ)—–
तो लिए आज चाय पर चर्चा करते हैं पूरी फिल्म का मनोरंजन देखते हैं आखिर झूठ में मनोरंजन देखने में हर्ज क्या है। हमें क्यों गर्व नहीं होना चाहिए कि हमने भारत के पहले थर्ड जेंडर शबनम मौसी को मतदान किया था क्योंकि लोकतंत्र में शबनम मौसी भी हमारे नेता होती हैं तो यह भी लोकतंत्र है…
चाय पर चर्चा: चांदनी चौक का धमाका और लोकतंत्र का शोर-गुल
चर्चा तो चाय पर बनती ही है। नरेंद्र मोदी जी के शब्दों को आदर्श मानें तो कह सकते हैं कि कनपटी पर कट्टा रखकर किसी ने चांदनी चौक, दिल्ली में कार विस्फोट कर दिया। खबर है कि इस हत्याकांड में तेरह लोग मारे गए। भारत की राजधानी दिल्ली में ऐसे दावे के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है, खून-खराबा खुलकर हुआ।
समय का संयोग: बिहार चुनाव से पहले का धमाका
घटना बिहार के चुनावी परिणाम आने के तीन दिन पहले हुई और अंतिम चरण के मतदान के एक दिन पहले। शोर-शराबा और हल्ला-गुल्ला के बीच चुनाव आयोग की ईमानदारी पर चर्चा न हो, इसलिए यह सब…? बिहार के सर्वेक्षण में भाजपा और उसके समर्थित लोग सत्ता में आ रहे हैं – यह चर्चा का विषय न बने, इसलिए ऐसी घटनाओं को अनदेखा करने का अपना अंदाज है। चांदनी चौक के विस्फोट को नजरअंदाज कर प्रधानमंत्री भूटान की यात्रा पर कथित तौर पर जन्मदिन मनाने चले गए। वहीं से चांदनी चौक विस्फोट की तह तक जाने की बात कही। लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया दोनों ने भूटान यात्रा के बाद उनके मित्र अदानी को हजारों करोड़ों रुपए के अनुबंध को उजागर किया। कहीं निगाहें, कहीं निशाना – इसी तर्ज पर भारतीय लोकतंत्र दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाने का दावा करता है।
गृहमंत्री का ‘सुरक्षित’ डर और चुनाव आयोग की निष्पक्षता
जब देश के गृहमंत्री को निर्वाचन आचार संहिता के दौरान भी बिहार में अपने हेडक्वार्टर पर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर किसी अनजाने डर से सुरक्षित होने की खबरें लीक हो रही हों, और यदि यह सुविधा गृहमंत्री के लिए चुनाव आयोग उपलब्ध करा रहा हो, तो ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव होने का दावा कैसे कर सकता है? वैसे उसकी निष्पक्षिता पर चर्चा गर्म रही है।
इस बीच बिहार की ‘छोट सरकार’ की घोषणा ‘बड़ी सरकार’ का गोदी मीडिया अपने अंदाज में कर ही दिया। सर्वेक्षण सिस्टम पूरी तरह अविश्वसनीय रहे या भोंपू कंपनी का मनोरंजन बना रहे। फिर कहा जाए कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है – वही सच और झूठ का फैसला करती है, भले वह झूठ या सच सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड न किया जा सके।
चुनावी टोटका: विस्फोट का पुराना पैटर्न…
चाय पर चर्चा इस बात पर भी हो जाए कि हर चुनाव के पहले यह टोटका हो चला है – कहीं न कहीं विस्फोट होना चाहिए। इस टोटके को अंजाम हमेशा आतंकवादी ही देते हैं। लेकिन इस बार दुखद रहा कि बिहार में ‘छोटी सरकार’ के निर्माण और उसकी प्रसव-पीड़ा की चीख ज्यादा बड़ी न सुनाई दे, इसलिए दिल्ली के दिल चांदनी चौक को चुना गया। ठीक कनपटी पर कट्टा दाग दिया।
अगले एक हफ्ते में कितना शोर-गुल: लाल किले के पास हुए इस विस्फोट पर मृत्यु-उत्सव की चर्चा हो या भूटान के राजा के जन्मोत्सव पर, या अदानी के साथ भूटान-अनुबंध पर, या चुनाव आयोग की प्रस्तुति ‘छोटी सरकार’ पर। चर्चा कुछ भी हो, हंगामा इतना कि शोर-गुल में जनता जनार्दन को स्वस्थ लोकतंत्र का चेहरा दिखाई नहीं देता। या तो उसकी आंख कमजोर हो रही है या चश्मा खराब हो गया। फिर भी वह जनता जनार्दन है – उसी के नाम पर यह सब होता रहता है। अक्सर भाजपा प्रवक्ता इसी को जीत का आधार मानते हैं: जनता के दरबार में अंतिम फैसला होता है।
एग्जिट पोल का निष्कर्ष और भविष्य का भारत..
फैसला हो चुका है, बस भोंपू मंडली को गुणगान करना है। फिलहाल एग्जिट पोल का निष्कर्ष यही: एक पोल ने विपक्षी पार्टियों को सिर्फ 32 से 49 सीटों में समेट दिया। यही पोल डायरी है। अब 12 राज्यों में चुनाव आयोग मतदाताओं का SI कराएगा और भविष्य का भारत इसी तर्ज पर निर्माण किया जाएगा। जहां समझना मुश्किल हो जाएगा कि भारत के नागरिकों की चांदनी चौक पर मृत्यु-उत्सव महत्वपूर्ण है या अदानी के अनुबंध वाला भूटान राजा का जन्मोत्सव…?यही चाय की चर्चा है आज की। ऐसी चाय पीने की आदत डाल लेनी चाहिए – यही मनोरंजन है, एक क्रूर मनोरंजन…!

