
दिल्ली में प्रदूषण अपने चरम पर है इस प्राकृतिक आपदा का लाभ उठाते हुए संकट निवारण के मध्य नजर bs6 के वाहनों को दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दिया गया है अब जो है इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी)/ इलेक्ट्रिक वाहन या अडानी अंबानी टाटा आदि आदि लोगों की गाड़ियों को बेचने में सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री रेखा को प्रकृति ने यह रेखा दे दी है. अगर मॉडल सफल रहा तो पूरे देश में बड़े शहरों में प्रदूषण को इस स्तर पर फैलाना चाहिए ताकि गाड़ी बेचने वालों को सरलता हो सके. रही प्रदूषण की बात गंगा जमुना आदि नदियों की तरह प्रदूषण भगवान भरोसे बनता बिगड़ता रहेगा।प्रदूषण के भयावह संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली छोड़ दिया और विदेश मान सम्मान कमा रहे भारतीय संसद कुकुर भों-भों अपना टाइम पास करता रहेगा, यह पारदर्शी नैतिकता का स्थापित मानदंड है इसलिए अघोषित कानून भी है। कुछ इसी तर्ज में हमारे समाजवादी बुढ़उ ने डॉक्टरी की नियुक्ति पत्र देते हुए अपने दरबार में बिटिया का हिजाब खींच दिया, बिटिया डर गई उसने नौकरी करने से मना कर दिया.. तथाकथित कट्टर हिंदू मंत्री का बेनकाब चेहरा गिरिराज सिंह से संसद परिसर में हिजाब कांड पर पूछा तो उन्होंने कहा डॉक्टरी छोड़ें चाहे जहन्नुम में जाएं बाबू कुमार ने सही किया है।
ठीक इसी तर्ज में दिन रात चली बहस के बाद “डीवीजी रामजी”को मनरेगा की जगह चुनाव आयुक्त ज्ञानेश की तर्ज पर चुन लिया गया। समर्थन देना हो तो दो नहीं तो जहन्नुम में जाओ…., इस सिद्धांत को आधार बनाकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) की हत्या करके कुर्सी पर बैठा दिया गया, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कुछ ऐसा ही आरोप लगाया है।
कुर्सी में जिसे जहन्नुम भेजने के शर्त पर बैठाया गया उसकी शैतानी नाम “विकसित भारत जी राम जी विधयक 2025″प्रचार तंत्र को सप्लाई किया गया है वास्तव में नए कानून का पूरा नाम है विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण बिल (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Bill, (VBG RAM G) 2025) है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक मनरेगा की जगह लेगा और ग्रामीण रोजगार व आजीविका को नए ढांचे में मजबूत करेगा।
विकसित भारत हिंदी में, बाकी अंग्रेजी में अधकचरी हिंदी अंग्रेजी का मिला-जुला रूप भी है। शुद्ध भाषा में इसे विकसित भारत के लिए ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का अधिनियम कहा जा सकता है।इस मॉडल को इस तरह विकसित किया गया की महात्मा गांधी नाम की भी हत्या हो जाए और रोजगार गारंटी काम की भी हत्या हो जाए.. ऐसा कांग्रेस अध्यक्षखड़गे ने आरोप लगाया है।
इसे हिंदी संक्षिप्त भाषा में “वि. भा. गा. रो. आ. मि.”कहां जा सकता है।अंग्रेजी में डेवलप्ड इंडिया गारंटी फार रोजगार और आजीविका मिशन( ग्रामीण) बिल 2025 यानी “विभाजी रामजी” यानी “DIGFRAAMB”पढ़ा जाना चाहिए लेकिन पढ़ाया गया “VB G RAAM G”और इसे इसी प्रकार से गुलाम मीडिया को परोसने को कहा गया. उसने निष्ठा पूर्ण तरीके से इसे परोसा भी इससे इस महत्वाकांक्षी योजना के नाम में महात्मा गांधी भी खत्म हो गए और मरने के पहले जो “हे राम..” कहा गया था उसके जी राम जी भी आ गए गांधी भी गए राम भी आ गए यह चर्चा हिंदू मुस्लिम धंधे की बहस छोड़ने का धंधा भी गुलाम मिडिया को दे दिया गया। जिम्मेदार मंत्री वर्ग ने भी इसे राम जी से परेशानी बताकर विपक्ष पर हमला किया।
चाहत यह थी की राम का नाम भ्रम में बना रहे, और काम गांधी का नष्ट हो जाए.. योजना में जितनी भी व्यवस्थाएं की गई हैं वह मनरेगा की मूल भावना को नष्ट कर उसे खत्म करने के लिए विकसित किया गया। जिस लक्ष्य को लेकर मनरेगा 2005 में 100 दिन की रोजगार की गारंटी मजदूरों को देने का प्रयास किया और ब मुश्किल 50 दिन के गारंटी भी नहीं दे पाया.. अब उस योजना में “विभाजी रामजी” 125 दिन की गारंटी का ढोल पीटने का काम किया है। उसमें भी काम केंद्र का होगा, पैसा राज्य का होगा यानी 60:40 के अनुपात में पैसे का बंटवारा किया जाएगा जो पहले 90 और 10 के अनुपात में सुनिश्चित किया गया था।
स्वाभाविक है गरीब राज्य जो और गरीब होते जा रहे हैं कर्ज में लगते चले जा रहे हैं या तो उन्हें और कर्जा लेकर अपनी ही केंद्र सरकार की शोषणकारी नीति का शिकार होना पड़ेगा या फिर “विभाजी रामजी” से हाथ धोना पड़ेगा यानी मजदूरों को काम नहीं मिलेगा और जो काम मिलेगा भी तो वह केंद्र की से चयनित आर्थिक साम्राज्यवादी ताकतों की नीतिगत फैसलों की ताकत बढ़ाएगी कह सकते हैं शोषणकारी आर्थिक साम्राज्यवाद के लिए आमों के आम और गुठलियों के दाम “विभाजी रामजी” साबित होने वाला है। ऐसी योजना “विभाजी रामजी” को का विधयक विपक्ष ने फाड़ कर कृषि मंत्री चौहान के मूढ़ में फेंक दिया. अगर नरेंद्र मोदी प्रदूषण से बचने के लिए विदेश में नहीं होते यह प्रदूषण कारी हमला उन्हें प्रदूषित कर देता है।
कर्म योगी महात्मा गांधी कि मजदूरों की हितकारी मनरेगा की हत्या और आर्थिक साम्राज्यवाद के हित की “विभाजी रामजी” का का विधेयक पारित देर रात हो गया। ठीक उसी तरह जिस तरह आधी रात को घंटा बजाकर जीएसटी लाया गया था।
ग्रामीण क्षेत्र में गुलामी लाने वाला यह विधेयक इस तर्क पर लाया गया कि इसमें भ्रष्टाचार भी होता था, करीब दो दशक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज सिंह चौहान कृषि मंत्री के तौर पर अपने अनुभव को संसद में शपथ खाकर साझा कर रहे थे। कि पिछले 20 साल मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार को राज्य और केंद्र की सरकार ने सम्मिलित तौर से पारदर्शी तरीके से संपन्न करने का काम किया।
स्वाभाविक है पारदर्शिता, भ्रष्टाचार को पारदर्शी-भ्रष्टाचार होने के कारण अघोषित कानून के रूप में मान्यता देती है इस बार यह घोषित कानून के रूप में स्थापित हो गया है। देश में गुलामी के लिए अब नया मॉडल विकसित ग्रामीण स्तर पर किया जाएगा। ठीक उसी तरह जिस तरह स्कूलों में शिक्षकों को चोर बनाने के लिए मध्यान भोजन के जरिए फर्जी उपस्थिति दर्शाने का काम दिग्गी राजा ने किया था। वह भी पारदर्शी रहा,.
तो क्या बुरा है गिरिराज सिंह ने कहा, काम करना हो तो करो नहीं… तो जहन्नुम में जाओ.. सब कुछ घोषित और पारदर्शी है इससे ज्यादा कुछ नहीं। “विभाजी रामजी”अब हर मजदूर के जुबान पर होगा जय श्री राम और उन्हें बोलने वाले आरएसएस के साथ, महात्मा गांधी को भी गायब करने का काम कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री का सफलता माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर निंदा प्रस्ताव पारित किया है, यह अलग बात है कि उनका यह प्रस्ताव अवैध घोषित हो चुका इलेक्टोरल बांड के जरिए जब चुनाव आयोग हिजाब उतार रहा था और राजनीतिक पार्टियों के फंड को जप्त नहीं किया…, जब बिहार में ₹10000 मतदान के दौरान जा रहे थे तब नहीं आया…, जब अरावली की पहाड़ियों को, और देश के आदिवासी क्षेत्रों में तथाकथित विकास के नाम पर जंगलों विनाश करने की योजना बनाई जा रही थी तब भी नहीं आया… तब भी आना चाहिए था जब वोट चोरी के तीन-तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस हुए और न्यायपालिका भी चुप्पी साधी रही… तब बार एसोसिएशन भी तमासबीन रहा; तब भी प्रस्ताव आना चाहिए था। अब इसे संयोग कहें या प्रयोग,राजनीतिक स्थिति कहें या उम्र का तकाजा जब 12वीं पास कोई लड़का भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की प्रक्रिया में हो… तभी हिजाब का विवाद आता है… तभी निंदा प्रस्ताव भी… यह दौर महात्मा गांधी को विलुप्त करने के प्रयास का भी और घुसपैठियों बोल-बोलकर गाली देने का भी… देखते चलिए क्या-क्या ना हो जाए हमारे यहां की “एफस्टीन फाइल” अलग प्रकार की होती है… बस उसमें भौतिक रूप से कुछ नहीं होता, यही नया भारत है…
तो क्या बुरा है जब देश सबका गुलाम रहा तो एक अनुभव ऐसा भी क्यों नहीं होना चाहिए….
पीढ़ियां ही तो है.. कुछ और गुजर जाएंगी…, इतिहास में दर्ज होजाएगा एक नया अनुभव…
पूरी शिद्दत के साथ…
फिर भी हम चुप रहेंगे, अपनी चुप्पी के साथ..
—————( त्रिलोकी नाथ )————–

