शहडोल के आदिवासी क्षेत्र में ऊर्जा विकास और पर्यावरण संरक्षण: अवसर या खतरा?

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शहडोल के आदिवासी क्षेत्र में ऊर्जा विकास और पर्यावरण संरक्षण: अवसर या खतरा?
      Shri Pankaj Agarwal, IAS, Secretary (Power), GoI, Sh R.P. Goyal, CMD & Shri  R.K. Chaudhary, Director (Tech & Project) visited #NHPC 390 MW Dulhasti  Power Station (J&K) and were apprised on ongoing     शहडोल के पुराने कलेक्टर पंकज अग्रवाल इन दोनों भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल के प्रवास पर हैं वह वर्तमान में भारत के ऊर्जा विभाग में उच्च अधिकारी हैं। निश्चित रूप से वह अपनी नजरिया से भारतीयसंसाधनों ऊर्जा की संभावनाओं को भी देखते होंगे क्योंकि अधिकारी हैं इसलिए जिम्मेदारी भी है हाल में भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र में उच्च अधिकारियों को घूस देने के आरोपमें अघोषित अपराधी उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिका में भारत में घूंस बांटने के तमाम अपराधों के लिए चल रहे न्यायालय अपराधिक मुकदमों में मुक्त कर दिया गया है क्योंकि जब वियतनाम के राष्ट्रपति भारत आए थे तब गौतम अडानी ने भीउनसे मुलाकात की थी और इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के वकील जो अदानी के भी वकील बने की सहायता से अन्य शर्तों के साथ गौतम अडानी के इस प्रस्तावित शर्त में कि वह अमेरिका में करीब 1 लाख करोड रुपए का निवेश करेंगे साथ-ही-साथ 15हजार नौकरी की भी व्यवस्था करेंगे अमेरिकी नागरिकों के लिए डॉलर की कीमत में उन्हें अमेरिका में चल रहे न्यायालय में राहत मिलने या मुकदमे खत्म हो जाने यानी दोष मुक्त किए जाने की खबर भी है सीधी सी बात है पैसा भारत से ही जाएगा या उन गरीब एशियाई बांग्लादेशी जैसे देश से जो भारत के इर्द-गिर्द हैं निकाल कर अमेरिका में लगाया जाएगा ताकि गौतम अडानी वहां के अपराधों से मुक्त हो सके इसके पहले नरेंद्र मोदी भारतीय प्रधानमंत्री के प्रिय दोस्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गलत तरीके से अमेरिका में रहकर रोजगार कमा रहे भारतीय नागरिकों को हथकड़ी लगाकर भारत की धरती में सेना के हवाई जहाज से लगभग फेंक कर चला गया था बाद में हमने देखा ही है कि भारत पाकिस्तान युद्ध के संबंध में व्यापार और धंधे का हवाला देकर लगातार भारत को ट्रंप अपमानित करता रहा    भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले शहडोल  जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र विकास की चुनौतियों और पर्यावरणीय चिंताओं का अनोखा मिश्रण हैं। हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, जो शहडोल के पूर्व कलेक्टर रह चुके हैं, के संदर्भ में स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा में आ रहे हैं। यह क्षेत्र सोन नदी की उपस्थिति के कारण पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील है, वहीं ऊर्जा परियोजनाएं आर्थिक प्रगति का वादा भी करती हैं।एक बार नहीं लगभग 100 बार उसने भारतीय प्रधानमंत्री और भारतका अपमान भी किया जबतक अदानी ने लगभग ब्लैकमेल होकर समर्पित होकर शर्तों पर हस्ताक्षर नहीं करदिए। इसके पहले उसने पूरी धमकी के साथ भारत के सस्ते पेट्रोलियम पदार्थ खरीदे जाने पर रोक की घोषणा कर दी वर्तमान में बढ़ रहे डीजल पेट्रोल और गैस के कीमतों में दागी दोस्त अमेरिका का बहुत बड़ा रोल है इसमें कोई शक नहीं।
अब भारत का दागी दोस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 22 तारीख को भारत आए ट्रंप का संदेश लेकर और आते ही कोलकाता में हवाई जहाज से पहुंचने पर विदेश मंत्री रबियो ने सोशल मीडिया में संदेश दिया “भारत पहुंच गया हूं एक शानदार यात्रा की उम्मीद है

पंकज अग्रवाल और उनकी जिम्मेदारी
पंकज अग्रवाल 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) के सचिव हैं। शहडोल जैसे क्षेत्र में उनके प्रशासनिक अनुभव ने उन्हें स्थानीय संवेदनशीलताओं की समझ दी होगी। ऊर्जा क्षेत्र में भारत की सौर, थर्मल और नवीकरणीय क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। आदिवासी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को पर्यावरण अनुकूल और सामुदायिक हितों के अनुरूप लागू करना उनकी भूमिका का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।
कोतमा-अनूपपुर में अडानी पावर प्रोजेक्ट
शहडोल संभाग से सटे अनूपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र में अडानी समूह की थर्मल पावर परियोजनाएं लंबे समय से चर्चा में हैं। 800 MW और प्रस्तावित 3200 MW (4×800 MW) की अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल कोल-बेस्ड प्लांट्स स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का दावा करती हैं, लेकिन कोयला आधारित परियोजनाएं प्रदूषण, जल संसाधनों पर दबाव और वन क्षेत्रों पर प्रभाव की चिंताएं भी पैदा करती हैं। सोन नदी और उसकी सहायक नदियां क्षेत्र की जीवन रेखा हैं। इन नदियों पर औद्योगिक प्रभाव को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदायों में आशंका स्वाभाविक है।
पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया में पब्लिक हियरिंग और प्रदूषण नियंत्रण उपायों का कड़ाई से पालन जरूरी है। कोयला खदानें और पावर प्लांट्स पहले से मौजूद चुनौतियों को बढ़ा सकते हैं, खासकर जब क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आदिवासी अधिकारों (PESA) की सुरक्षा के दायरे में आता है।
राष्ट्रीय संदर्भ: अडानी मामले और अंतरराष्ट्रीय संबंध
हाल ही में अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे घूसखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों वाले मामले को अमेरिकी न्याय विभाग ने खारिज कर दिया। यह फैसला अडानी समूह द्वारा अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर (लगभग 85,000 करोड़ रुपये) के निवेश और 15,000 नौकरियों के वादे के बाद आया।यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। मई 2026 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक अवसरों पर जोर दिया।ऐसे सहयोग से भारत को प्रौद्योगिकी और निवेश मिल सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी पूंजी देश के पर्यावरण और आदिवासी हितों की कीमत पर न आए।
पर्यावरण और आदिवासी हित: संतुलन की जरूरत
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर यह याद रखना चाहिए कि विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। शहडोल जैसे क्षेत्रों में:जल संरक्षण: सोन नदी और सहायक नदियों का प्रदूषण नियंत्रण।वन और जैव विविधता: कोयला खदानों और पावर प्लांट्स से वन क्षेत्रों का अतिक्रमण रोकना। आदिवासी अधिकार: पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का सख्ती से पालन, ग्राम सभाओं की सहमति। स्वच्छ ऊर्जा: थर्मल परियोजनाओं के साथ-साथ सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसी हरित ऊर्जा को बढ़ावा।स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और केंद्र सरकार की भूमिका यहां निर्णायक है। पूर्व कलेक्टर के रूप में पंकज अग्रवाल की समझ इस क्षेत्र को संतुलित विकास की राह दिखा सकती है।

शहडोल आदिवासी क्षेत्र ऊर्जा क्रांति का केंद्र बन सकता है, लेकिन यह “सस्टेनेबल” होना चाहिए। आर्थिक साम्राज्यवाद या अंधाधुंध औद्योगीकरण की आशंकाओं को तथ्यों पर आधारित नीतियों से दूर किया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों को पारदर्शिता, पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण पर जोर देना चाहिए। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन ही सच्ची प्रगति है।आदिवासी क्षेत्रों की “लंबी नींद” नहीं, बल्कि जागरूक और समावेशी विकास की जरूरत है।


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