
धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा: खरगे
नयी दिल्ली: 24 जून (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को प्रदर्शनकारी छात्रों को कथित तौर पर ‘‘आतंकवादी’’ कहने को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें इस्तीफा देना ही पड़ेगा।खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि देश में कई पेपर लीक होने से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और नीट पेपर लीक प्रकरण से कई परिवार तबाह हो गए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ “आतंकवादी” वाले बयान की कड़ी आलोचना की और कहा कि प्रधान को इस्तीफा देना होगा।खड़गे ने कहा, “90 बार पेपर लीक हुए हैं, लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो गया है, NEET पेपर लीक के कारण 20 बच्चों ने अपनी जान दे दी है, परिवार बर्बाद हो गए हैं…”उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं और इंटरव्यू देते समय वे “छात्रों की आवाज़” को “आतंकवादियों” की आवाज़ बता रहे हैं।
‘इंसानी गरिमा पर हमला’: UP फ़ैक्ट्री में मज़दूरों पर ज़्यादती पर बोले राहुल
नई दिल्ली: (24 जून) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले की एक फ़ैक्ट्री में मज़दूरों के साथ हुई ज़्यादती को “इंसानी गरिमा पर हमला” बताया और उनके लिए न्याय तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने की मांग की।सोमवार को पुलिस की छापेमारी के बाद मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के मंडी गाँव में पेपर प्लेट बनाने वाली एक फ़ैक्ट्री से बारह बंधुआ मज़दूरों (जिनमें नाबालिग भी शामिल थे) को बचाया गया; उनके शरीर पर टॉर्चर और चोट के साफ़ निशान थे।’X’ पर हिंदी में किए गए एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि जब नौकरियाँ खत्म हो जाती हैं और MGNREGA तथा कमज़ोर वर्गों के लिए बने लेबर लॉ (श्रम कानून) जैसे सुरक्षा उपाय कमज़ोर पड़ जाते हैं, तो निराशा ही बढ़ती है।
भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या बढ़ी: विश्लेषण
नयी दिल्ली: 24 जून (भाषा) भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या 1970 के दशक के प्रति वर्ष औसतन 101 दिन से बढ़कर 2016-2025 के बीच सालाना 141 दिन हो गई। एक नये विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।खतरनाक उमस भरी गर्मी वाला दिन वह होता है, जब रोजाना का अधिकतम ‘वेट-बल्ब’ तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो।
भारत में कोयले के मौद्रिक परिसंपत्ति संकलन के दृष्टिकोणों पर चर्चा
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने “भारत में कोयले के मौद्रिक परिसंपत्ति खातों के संकलन के लिए कार्यप्रणालीगत दृष्टिकोण” शीर्षक से एक चर्चा पत्र जारी किया है, जो पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए) केंद्रीय ढांचे के अनुरूप है। इसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग की ओर से एक अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक के रूप में मान्यता मिली हुई हैसांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय 2018 से संयुक्त राष्ट्र एसईईए फ्रेमवर्क का अनुसरण करते हुए वार्षिक पर्यावरण सांख्यिकी रिपोर्ट (एन्विस्टैट्स इंडिया) श्रृंखला और एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया (भारत सरकार का एक प्रमुख वार्षिक सांख्यिकीय प्रकाशन) के माध्यम से कोयले और अन्य खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के भौतिक परिसंपत्ति खातों का संकलन कर रहा है। इसी आधार पर आगे बढ़ते हुए, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के लिए प्रायोगिक मौद्रिक मूल्यांकन और मौद्रिक परिसंपत्ति खातों के संकलन की शुरुआत करके एक और कदम उठाया है।पर्यावरण संपत्तियों का मौद्रिक मूल्यांकन देश के प्राकृतिक संसाधन भंडार में निहित आर्थिक मूल्य का माप प्रदान करता है, क्षरण लागत का आकलन करने में सक्षम बनाता है, संसाधन निष्कर्षण से भविष्य के सरकारी राजस्व के अनुमान में सहायता करता है और विभिन्न पर्यावरण संपत्तियों की तुलना को सुगम बनाता है। राष्ट्रीय खनिज नीति, 2019 सतत खनन प्रथाओं को अनिवार्य बनाती है, जिससे ऐसा मूल्यांकन भारत के नीतिगत ढांचे के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक हो जाता है।
चर्चा पत्र के बारे में
यह चर्चा पत्र एसईईए केंद्रीय ढांचे में निर्धारित गैर-नवीकरणीय खनिज और ऊर्जा संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन के लिए एक विस्तृत वैचारिक ढांचा प्रस्तुत करता है और तीन वैकल्पिक अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों – राष्ट्रीय लेखा में प्राकृतिक संसाधनों के मापन के लिए संकलन मार्गदर्शिका – आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी 2025), विश्व बैंक की ‘चेंजिंग वेल्थ ऑफ नेशंस’ (सीडब्ल्यूओएन, 2024) और फिलीपींस-आधारित पद्धति (2024) – की व्यवस्थित रूप से समीक्षा और तुलना करता है। यह भारतीय संदर्भ में इन पद्धतियों के वैचारिक आधार, डेटा जरूरतों और संभावित डेटा स्रोतों की जांच करता है ताकि भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली में अपनाने के लिए सबसे उपयुक्त दृष्टिकोण की पहचान की जा सके। यह पत्र 2015-16 से 2023-24 की अवधि के लिए भारत में कोयले के भौतिक परिसंपत्ति खातों को भी प्रस्तुत करता है, जिसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से प्राप्त एन्विस्टैट्स इंडिया 2024 और एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2025 के डेटा का उपयोग किया गया है।भारत की अर्थव्यवस्था में कोयले के रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे उदाहरण के तौर पर चुना गया है। देश का सबसे प्रचुर घरेलू ऊर्जा संसाधन होने के नाते, कोयला भारत में अधिकांश बिजली उत्पादन का स्रोत है और इस्पात, सीमेंट तथा रसायन सहित कई प्रमुख उद्योगों को सहारा देता है। भारत ने 2024-25 में 1,047.523 मिलियन टन कच्चे कोयले और 45.133 मिलियन टन लिग्नाइट का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में इस संसाधन की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। साथ ही, एक गैर-नवीकरणीय संसाधन होने के नाते, इसके सतत प्रबंधन की जरूरत मौद्रिक परिसंपत्ति मूल्यांकन को और भी महत्वपूर्ण बना देती है।
मुख्य निष्कर्ष और अनुशंसित कार्यप्रणालीयह चर्चा पत्र विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से टिप्पणियों और प्रतिक्रियाओं के लिए एक खुला आमंत्रण है। प्राप्त प्रतिक्रियाएं देश के राष्ट्रीय लेखा ढांचे के भीतर गैर-नवीकरणीय खनिज संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत पद्धति को अंतिम रूप देने में सहायक होंगी, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में प्राकृतिक पूंजी लेखांकन के क्षेत्र में भारत अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकेगा। भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों का सटीक और पारदर्शी मौद्रिक मूल्यांकन, डेटा-आधारित नीति निर्माण और सतत विकास के लिए एक बुनियादी आधार बनेगा।24 JUN 2026 PIB Delhiआप अपनी प्रतिक्रिया पर्यावरण इकाई, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को ssd-mospi[at]gov[dot]in पर भेज सकते हैं ।

