
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त त्रिवेदी को केंद्र ने केंद्रीय मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया
नयी दिल्ली: 25 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया है। एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई।गृह मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक आदेश में कहा गया कि त्रिवेदी को ‘टेबल ऑफ प्रेसिडेंस’ (टीओपी) में उनके लिए एक व्यक्तिगत व्यवस्था के तहत केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया गया है, जबकि टीओपी में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
राहुल गांधी ने मानहानि मुकदमे में जताया ‘खेद’, भाजपा ने साधा निशाना
नयी दिल्ली: 25 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह से जुड़े मानहानि के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष लिखित में ‘खेद’ जताने को लेकर उनपर बृहस्पतिवार को निशाना साधा।सत्तारूढ़ दल ने दावा किया कि राहुल गांधी ने बार-बार बेबुनियाद आरोप लगाए और कानूनी कार्रवाई का सामना करने पर बाद में ‘माफी’ मांगी। राहुल ने अदालत में चौहान के बेटे के खिलाफ कथित अपमानजनक बयान को लेकर ‘खेद’ जताया था।
नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम में जन विश्वास संशोधन अधिसूचित किया गया
नयी दिल्ली: 25 जून (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘जन विश्वास’ संशोधन के तहत नैदानिक प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 में बदलावों को अधिसूचित किया है। इन बदलावों के तहत, कुछ प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड की जगह अब प्रशासनिक निर्णय लेने की व्यवस्था लागू की जाएगी।मंत्रालय के मुताबिक, 22 जून को अधिसूचित संशोधनों से ‘जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026’ के प्रावधान लागू हो गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कई केंद्रीय कानूनों के तहत छोटी-मोटी प्रक्रियात्मक कमियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देना है।
जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
भोपाल : गुरूवार, जून 25, 2026, भारतीय संस्कृति में जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का साक्षात स्वरूप और चेतना का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में ‘अपः पुरुषरूपेण’ कहकर जल की वंदना की गई है, जिसका सीधा अर्थ है कि जल में ही साक्षात ईश्वर का वास है। इसी पावन और दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैमाना बनाते हुए ‘हर घर जल’ के संकल्प को साकार किया। उनके मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहलें हुईं, जिन्होंने देश को जल संरक्षण की एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के इसी वैश्विक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में जल क्रांति का सूत्रपात किया है। उन्होंने जल संरक्षण को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाते हुए संस्कृति, आदत और राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बना दिया है, जिसके कारण आज उन्हें संपूर्ण प्रदेश में एक जनप्रिय ‘जल नायक’ के रूप में देखा जा रहा है।
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’: जन आंदोलन से राज्यव्यापी कायाकल्प
भारतीय संस्कृति में यह अनादि काल से माना गया है कि पृथ्वी, पर्वत, नदी और पेड़-पौधों में साक्षात जीवंतता है और वे हमारे लिए परम पूजनीय हैं। जिस प्रकार मानव देह में धमनियों के माध्यम से रक्त का संचार होता है, ठीक उसी प्रकार नदियां भी इस पृथ्वी पर साक्षात जीवन का संचार करती हैं। यही कारण है कि हम सबके अस्तित्व के लिए नदियों का अक्षुण्ण और निरंतर प्रवाह अनिवार्य है। नदियों के प्रवाह को दूषित करना या उनमें मानवीय अवरोध उत्पन्न करना, वास्तव में मानव जीवन की प्रगति में अवरोध उत्पन्न करने के समान है। इसी पावन और वैज्ञानिक दृष्टि को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल स्रोतों के संरक्षण को सर्वोपरि माना और विश्व पर्यावरण दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 5 जून 2024 को रायसेन जिले के झिरी बहेडा स्थित बेतवा नदी के पावन उद्गम स्थल पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया। इस पुनीत अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेतवा नदी के उद्गम स्थल की वैदिक रीति से पूजा-अर्चना की तथा वहां बरगद का पौधा रोपकर संपूर्ण प्रदेश में इस अभियान को एक महा-आंदोलन का रूप दे दिया।
हाल ही में जारी हुई यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट ने संपूर्ण विश्व को जलवायु परिवर्तन और जल संकट के प्रति सचेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के सीधे खतरे में हैं, जबकि राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे चिंताजनक वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में मध्यप्रदेश की स्थिति आज जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भगीरथ प्रयासों से काफी सुदृढ़ है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और चेकडैम का संरक्षण, संवर्धन, गहरीकरण और जीर्णोद्धार करना है।
मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियाँ और तालाब हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, और इनका पुनरुद्धार न केवल जल संकट से मुक्ति दिला रहा है बल्कि हमारे सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित कर पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत 3,61,001 कार्यों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2,40,386 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। प्रदेश का हर जिला, प्रशासन और वहां का हर नागरिक इस जल संरक्षण महायज्ञ में अपनी सर्वश्रेष्ठ आहुति दे रहा है।
‘सदानीरा समागम’: वैश्विक पटल पर गूंजा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल
जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन अभिनव और दूरदर्शी प्रयासों की गूंज अब केवल मध्यप्रदेश या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भरपूर सराहना मिल रही है। वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ ने जल संरक्षण को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर जैसे विभिन्न देशों के राजनयिकों, राजदूतों और नीति विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
समागम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा संचालित जल प्रबंधन के ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ को आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकता बताया। उन्होंने जनभागीदारी और शासकीय संकल्प के इस अनूठे समन्वय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस मॉडल को अपने-अपने देशों में भी लागू करने की तीव्र इच्छा जताई। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मिली यह स्वीकृति इस बात को प्रमाणित करती है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जल-आत्मनिर्भरता की दिशा में विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो रहा

