शहडोल: सड़क विस्तार में अतिक्रमण हटाने का अभियान, एक घायल; व्यापारियों में आक्रोश

शहडोल: इंदिरा चौक से बस स्टैंड सड़क विस्तार में अतिक्रमण हटाने का अभियान, एक घायल; व्यापारियों में आक्रोश
शहडोल (मध्य प्रदेश), 28 जून 2026:
नगरपालिका परिषद शहडोल द्वारा इंदिरा चौक से नए बस स्टैंड तक सड़क चौड़ीकरण के लिए रविवार को अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया गया। मात्र 24 घंटे की नोटिस पर दर्जनों दुकानें और मकान तोड़ दिए गए, जिससे प्रभावित व्यापारी अचानक आजीविका विहीन हो गए। अभियान के दौरान सीताराम गुप्ता नामक व्यक्ति घायल हो गया और उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्षों से सड़क किनारे अपनी दुकानें चला रहे पट्टाधारी और व्यापारियों को अचानक तोड़फोड़ की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने इसे अत्यधिक सख्त और अप्रत्याशित बताया। घटना स्थल पर मलबे और क्षतिग्रस्त सामान का मंजर देखने वालों ने इसे “खाड़ी देशों के युद्ध क्षेत्र जैसा” बताया।
इंदिरा चौक से बस स्टैंड सड़क विस्तार में सीताराम के ऊपर दीवाल गिरी
अभियान के दौरान सीताराम गुप्ता के घायल होने के बाद प्रशासन को अस्थायी रूप से कार्यवाही रोकनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक शेष अतिक्रमण हटाने का काम सोमवार को फिर शुरू किया जा सकता है।
महीनों से चल रही थी बातचीत
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि इस सड़क विस्तार को लेकर प्रशासन के साथ पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही थी। समझौते की उम्मीद थी, लेकिन अचानक 24 घंटे की नोटिस पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रभावित लोगों ने बताया कि नई दुकान बनाने या पुरानी को सुधारने में कम से कम दो-तीन महीने का समय लगेगा, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है।
चयनात्मक कार्रवाई के आरोप
स्थानीय लोगों ने नगरपालिका पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक चौक से साइन मंदिर तक सड़क को चौड़ा करने की बजाय उसे और संकरा कर दिया गया क्योंकि उस मार्ग पर एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी के आरोप वाले व्यक्ति की बिल्डिंग बन रही है। वहीं दूसरी ओर इंदिरा चौक वाले मार्ग पर सख्ती बरती गई।
एक अन्य मामले में यह भी आरोप लगा है कि नगरपालिका ने एक सड़क पर भवन निर्माण की अनुमति दी, जहां लगभग ढाई करोड़ रुपये का भवन बनकर तैयार हो गया है। यह भवन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को किराए पर दिया जाना है। आरोप है कि इस अनुमति से सड़क की चौड़ाई पर असर पड़ा और “बंदरबांट” हुई।
व्यापारियों का मानना है कि जिन्होंने “सही समझौता” नहीं किया, उनके साथ सख्ती की गई, जबकि जिनके साथ “समझौता” हुआ, वहां सड़क विकास की अनदेखी की गई।नगरपालिका प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सड़क विस्तार की यह योजना शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई है, लेकिन तरीके को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी बहस छिड़ गई है।प्रभावित व्यापारी अब मुआवजे और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। प्रशासन की आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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