जल गंगा संवर्धन अभियान ने आखिर टांकी बांध में क्यों किया आत्महत्या का प्रयास…? ( त्रिलोकी नाथ)

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शहडोल को भारत सरकार ने संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित कर संरक्षित करने की गारंटी दी है आदिवासी विशेष क्षेत्र होने के कारण एक प्राकृतिक संसाधन पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी को बहुत ही संवेदना के साथ विकास की धारा के साथ आगे ले जाने के लिए संविधान की पांचवी अनुसूची देश के आजादी के बाद लाई गई थी ताकि आदिवासी विशेष क्षेत्र में उसकी मौलिकता को नष्ट न कर उसकी सुंदरता को बचाकर रखने के साथ उसका विकास किया जाए। किंतु वर्तमान में यही वरदान प्राकृतिक संसाधन शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र का अपराध बन गया है जमीन में यही कड़वी सच्चाई प्रमाणित हो रही है और जो भारत का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है उत्तर और दक्षिण भारत के केंद्र बिंदु अमरकंटक की पर्वतमालाओं पर गारंटी सुनिश्चित नहीं हो रही है  इस अमरकंटक से निकलने वाली पर्वत से सोन, नर्मदा, जोहिला नदी सहित अन्य जल धारा के बचे रहने की गारंटी नहीं दिख रही है तो मान के चलिए की पांचवी अनुसूची का पालन भारत की किसी राज्य मे कहीं नहीं हो रहा है यह समझना सहज है।  इसी तरह के सिस्टम और हम सब पांचवी अनुसूची को ढो रहे हैं ऐसा समझना चाहिए।

      शहडोल जो संभाग मुख्यालय है शायद आदिवासी क्षेत्र का इकलौता संभाग मध्य प्रदेश में है। शहडोल नगर मुख्यालय मे घट रही हर घटनाएं संभाग के लिए मॉडल हैं। हाल में ही सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल गंगा संवर्धन अभियान क्लोजिंग मोड में गई है अभियान का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पानी का संरक्षण करना था शहडोल नगर में जितने भी तालाब हैं या कुएं हैं या नदियां हैं क्या उन्हें बचाने के लिए प्रशासन के पास कोई आंकड़े रखे गए हैं या फिर जंगल में मोर नाचा किसने देखा के अंदाज में शहडोल को छोड़कर जिले के अन्य क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान जोर-जोर से अखबारों में मात्र प्रचार का पाखंड कियाजा रहा है..?

  तो समझ ले पिछले वर्ष शहडोल नगर का सर्वाधिक चर्चित जल बावड़ी बचाए जाने का करीब 3 महीने चला जनआंदोलन किरण टॉकीज स्ट्रीट के पास इस शर्त के साथ समाप्त किया गया था कि अगले साल वहां की बावड़ी को फिर से ठीक किया जाएगा यानी बावड़ी में डाले गए मलवे को हटाकर जल का प्रतीक्ष्यीकरण होगा किंतुइस वर्ष प्रशासन ने उस तरफ मुड़कर भी नहीं देखा।  जल गंगा अभियान के क्लोजिंग में एक और बात सामने आई बिना किसी मेहनत के करीब 300 साल से राजा बाग के सामने लंबा चौड़ा जल का भंडार है वहां पर बांध तत्कालीन इलाकेदार के द्वारा लोकहित में बनाया गया था ताकि आसपास की लोगों को पानी की समस्या ना बने किंतु अब इस पूरे जल क्षेत्र को अलग-अलग माफियाओं ने जमीन खरीदा और माफियाओं ने जमीन बेचा। इस शर्त में भ्रष्टाचार और शासन की ताकत से पानी को सुखा दिया जाएगा किंतु जहां जल का भराव है उसे खत्म करके उसका उपयोग तो संभव नहीं है

शहडोल संभाग मुख्यालय स्थित सर्वाधिक जल ग्रहण क्षेत्र को हमारी विरासत में मजबूती प्रदान करने वाला शहडोल से मुश्किल से 5 किलोमीटर स्थित करीब 200 एकड़ का बांध भू माफिया, राजनीतिक लोगों के षड्यंत्र सेऔर राजस्व विभाग की लापरवाही अथवा माफिया गिरी को संरक्षण देने के कारण खत्म होने के कगार पर आ गया है दैनिक भास्कर अखबार की बात माने तो मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन के दौर में भारतीय जनता पार्टी के युवा पूर्व जिला अध्यक्ष कमल प्रताप सिंह इस 200 एकड़ के बांध की मेड को तोड़कर आजादी के पूर्व मिला विरासत का यह पूरा बांध खत्म करना चाहते थे। क्योंकि अनुभव में उन्होंने पाया होगा की विराट मंदिर के पास ठीक इसी प्रकार चमार बोथी तालाब को माफियाओं ने जब खरीद लिया तो सबसे पहले उसका मेड तोड़कर उसका पानी निकाल दिया वर्तमान में आज भी वह तालाब बरसात के कारण अपनी औकात में आ जाता है लेकिन मेड टूटे होने के कारण पानी नहीं रख पाता और धीरे-धीरे तालाब भूमाफियाओं के हवाले कर टुकड़े-टुकड़े करके हत्या कर दिया गया और उसकी बिक्री कर दी गई शायद इसी अनुभव को जिन लोगों ने टांकी नाला बांध की करीब 200 एकड़ की जमीन में शासन से छुपाते हुए जमीन खरीदी अब उसे जमीन को समतल करने के लिए मेड़ तोड़ने का काम कर रहे हैं। शायद जल गंगा संवर्धन अभियान में शासन की यही मनसा रही हो की आजादी के पहले के तमाम जल स्रोतों की हत्या कर दी जाए उन्हें माफियाओं को बेच दिया जाए और उसकी कीमती जमीन को बंदर बांट करके बंटवारा कर लिया जाए इसीलिए टांकी बांध को छेड़ने ने की कयावद की गई..?
दैनिक भास्कर की माने तो सोहागपुर गढ़ी के इलाकेदार परिवार से यशवर्धन सिंह ने सोहागपुर थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया कि रीवा रोड पर आम नागरिकों के लिए पेयजल व अन्य निस्तार के लिए भूजल स्तर बनाए रखने के उद्देश्य से पानी भराव को लेकर बंधा का निर्माण करवाया गया था, जिसकी सीमेंटेड गेटयुक्त दीवार को कमल प्रताप सिंह शहडोल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष द्वारा अपने 5-6 आपराधिक लोगों को भेजकर जेसीबी के माध्यम से बलपूर्वक तोड़वा दिया गया। बताते चलें कि शिकायतकर्ता यशवर्धन सिंह के बड़े भाई साहब कुंवर हर्षवर्धन सिंह भी भाजपा के नेता है तथा पूर्व जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि मेढ़ तोड़ने वाले कमल प्रताप सिंह भाजपा के वरिष्ठ पदों पर हैं और अपने प्रभाव का दुरूपयोग कर मेरी आराजी की जमीन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस बारे में सोहागपुर थाना प्रभारी ने दैनिक समाचार पत्र भास्कर को बताया कि शिकायत पर अभी जांच चल रही है। अखबार भास्कर के अनुसार कमल प्रताप सिंह- भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने बताया कि 18 जून को शिकायत के बाद नापी करवाई गई थी, आसपास के कास्तकार और वे स्वयं कन्फ्यूज थे। बाद में मेढ़ को बांध दिया गया था।

सूचना तो यह भी है की इस बांध की हत्या करने और जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन में एक बड़े बांध को खत्म करने के लिए गुनहगार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सके। क्योंकि यह धारणा प्रबल है थानेदार ऐसे ही नेताओं के इसारे में थाने में बैठाये जाते हैं और इसीलिए प्रकरण पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जो इस बात का संकेत देता है कि भविष्य में राजा बाग के सामने में कोनी मोड में स्थित बड़ा बांध है जो करीब 200 एकड़ का है शायद इसीलिए मामले को ठंडा रहने तक इस बांध को नष्ट नहीं किया गया है..?

और अगर ऐसा होता है तो बड़ी आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि जब सिस्टम ही भ्रष्ट हो जाए वह ईमानदारी कहलाती है यह पारदर्शी भ्रष्टाचार ही नियम बन जाता है और इसी नियम के तरफ विराट मंदिर के बगल में स्थित एक बड़ा तालाब जिस पर कभी पूरा सोहागपुर इलाका का मुख्यालय अपना निस्तार करता था उसे तालाब की मेड़ तोड़कर उसे पर मकान बन गए हैंतालाब के अंदर सड़क भी बन गई है हर वर्ष पानी भरता है और उसे टूटे हुए बाहर निकल जाता है इससे उसकी कीमत भू-माफिया के लिए वरदान है। भारतीय जनता पार्टी आने के बाद सभी तालाबों में या तो सड़के बना रही है या उनका रकवा छोटा हो रहा है यह तालाब नष्ट किया जा रहे हैं और फिर इसकी बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में हो रही है प्रशासन इस पर रोक लगा पानी में पूरी तरह से असफल है क्योंकि यही सिस्टम है ऐसे में शहडोल नगर में यह बड़ा प्रश्न है अगर कितने तालाब अब तक नष्ट हो गए इसका आंकड़ा जारी करना चाहिए साथ ही इस बात की गारंटी भी होनी चाहिए की बचे हुए तालाब और बांधो यह जल स्रोतों की हत्या यदि की जाएगी तो उससे संबंधित पार्षद नगर पालिका अधिकारी सरपंच या ग्राम सचिव अथवा जनपद पदाधिकारी के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए क्या पांचवी अनुसूची इतनी भी गारंटी नहीं देती है कि वह विरासत के तालाबों की रक्षा कर सके यह बड़ा प्रश्न इस पर हम बात करते रहेंगे … इसलिए भी शहडोल में आकर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी  मुर्मू ने यहीं पर पेसा एक्ट लागू करने की बात कही थी तो उनकी बातों में कोई दम है या नहीं इसका भी परीक्षण करेंगे….

उपमुख्यमंत्री और शहडोल के प्रभारी राजेंद्र शुक्ला आजकल शहडोल में रहेंगे. जिस बैठक मैं वह आ रहे हैं उसमें शहडोल के लगभग भाजपा के सभी महत्वपूर्ण लोग रहेंगे ऐसे में क्या किसी की हिम्मत है कि वह उन्हे बताएगा कि शहडोल मुख्यालय के तालाब नालों और नदी को खत्म करने के प्रयासों के बाद संभाग मुख्यालय का इकलौता 200 एकड़ क्षेत्र का सोहागपुर थाने के पीछे कोनी गांव स्थित सड़क से जुड़ा टांकी बांध के पानी के अंदर रजिस्टार ऑफिस विक्रय पत्र क्यों निष्पादन करवा रहा है…? अगर राजस्व ही वसूलना है तो ऐसे तो विराट मंदिर का भी विक्रय पत्र बनवाकर बेच देना चाहिए….? क्या टांकी बांध की सभी विक्रय रजिस्ट्रियां निरस्त करने का निर्देश जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत उपमुख्यमंत्री शहडोल में दे सकते हैं…. उनके द्वारा की जाने वाली बैठक में कितने तथा कथित नेता और जनप्रतिनिधि सदस्य इस विषय को उठाएंगे यह देखना होगा…?

 

( त्रिलोकी नाथ)

 

 


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