
दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प, आंसू गैस और लाठीचार्ज
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026:
कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर पर जारी प्रदर्शन आज संसद मार्च में बदल गया। यह शिक्षा व्यवस्था में पेपर लीक, छात्र आत्महत्याओं, महंगी शिक्षा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा युवा-केंद्रित आंदोलन है। सोनम वांगचुक जो 23 दिनों से अनशन अगुवाई में हजारों प्रदर्शनकारी जंतर मंतर से संसद की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर जमा हुए भीड़ काफी बड़ी थी, सड़कें भर गईं.
लोकसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर समर्थकों ने भारी प्रदर्शन किया। शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, NEET पेपर लीक और छात्रों की मौतों के मुद्दे पर आंदोलनरत प्रदर्शनकारियों ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला। पुलिस ने भारी सुरक्षा घेराबंदी के बावजूद प्रदर्शनकारी संसद भवन के काफी करीब पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज करने पड़े।
जंतर मंतर को पुलिस ने ‘खुले जेल’ की तरह घेर रखा था। भारी संख्या में जवान, बैरिकेडिंग और मेट्रो स्टेशनों पर बंदिशों के बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी, ज्यादातर छात्र और युवा कार्यकर्ता, मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से जंतर मंतर की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। CJP समर्थकों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और रायसीना रोड (संसद भवन से महज 200 मीटर दूर) तक पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले लाठीचार्ज किया और फिर कई राउंड आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आईं। घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया।सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के दृश्य शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि पुलिस को पीछे हटने का आदेश दें।CJP ने कई हफ्तों से जंतर मंतर पर धरना दिया हुआ है। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की खामियों — खासकर NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक, 20 से ज्यादाछात्रों की आत्महत्याएं
सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से जो पत्र/संदेश लिखा है:
वांगचुक ने ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने के लिए सफदरजंग अस्पताल से कुछ समय के लिए छुट्टी मांगी
नई दिल्ली: (20 जुलाई) एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट से अनुरोध किया कि उन्हें “कुछ समय के लिए ही सही” बाहर जाने की इजाज़त दी जाए ताकि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संसद मार्च में हिस्सा ले सकें। उन्होंने कहा कि वह “बहुत अच्छा” महसूस कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य के पैरामीटर सामान्य हैं।मेडिकल सुपरिटेंडेंट को लिखे एक हाथ से लिखे पत्र में वांगचुक ने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि आज मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं और मेरे स्वास्थ्य के पैरामीटर भी काफी सामान्य हैं। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया मुझे अस्पताल से जाने की इजाज़त दें, भले ही कुछ समय के लिए, ताकि मैं आज सुबह संसद तक होने वाले मार्च — संसद चलो — में शामिल हो सकूं।”20 जुलाई की तारीख वाले इस पत्र में कहा गया, “मैं आपका बहुत आभारी रहूंगा।”
उन्होंने 19 जुलाई 2026 को अपनी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो के माध्यम से एक हैंडराइटन मैसेज शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने अस्पताल में रहने को अवैध हिरासत बताया। उन्होंने 20 जुलाई के “संसद मार्च” को सफल बनाने की अपील की और इसे “भारत का दूसरा आजादी का आंदोलन” बताया . उन्होंने इलाज से इनकार किया और परिवार ने भी सहमति के बिना ट्रीटमेंट न देने की मांग की। कुछ रिपोर्ट्स में परिवार ने अस्पताल को “जेल जैसा” बताया और प्राइवेट अस्पताल शिफ्ट करने की कोशिश की।
वांगचुक ने नोट में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में “गैर-कानूनी तरीके से हिरासत” में रखा गया है और दावा किया कि उनकी “आवाजाही, बोलने और बातचीत करने की आज़ादी पर रोक” लगी हुई है।शनिवार को आंग्मो ने कहा था कि अगर राजनीतिक नेता अस्पताल में वांगचुक से मिलें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे मॉनसून सत्र के दौरान शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो वांगचुक अपना अनशन खत्म कर देंगे। उन्होंने समर्थकों तक वांगचुक की यह अपील भी पहुंचाई कि “संसद चलो” मार्च को शांतिपूर्ण रखा जाए और विरोध प्रदर्शन का गलत इस्तेमाल न होने दिया जाए।
आज सुबह करीब 8:30 बजे से 10:30 बजे तक हमने समझने का प्रयास किया कि दिल्ली में इस बड़े क्रांतिकारी आंदोलन का असर आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल संभाग मुख्यालय में आम आदमी क्या सोचता है तो ज्यादातर लोगों ने बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं है एक दो बौद्धिक लोगों ने इसकी जानकारी होने की बात की चर्चा की। रेलवे मंडी में पूर्व शिक्षा विद रजनीश व आलोक निगम से मुलाकात हुई उन्होंने इसकी चर्चा पर विस्तार से बातचीत किया और शहडोल जैसे क्षेत्र में जागरूकता ना होने पर ट्राइबल एरिया होने का कारण बताया

