
विधि महाविद्यालयों को कैसे विनियमित कर सकती है बीसीआई् : उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली: 23 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह इस बात की पड़ताल करेगा कि क्या भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के पास विधि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को विनियमित करने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियामक के रूप में बीसीआई की वैधानिक भूमिका तभी शुरू होती है, जब लाइसेंस प्रदान किया जाता है।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जानना चाहा कि बीसीआई को विधि शिक्षा को विनियमित करने के लिए विशेषज्ञ निकाय कैसे माना जा सकता है, जबकि शैक्षणिक मामलों के लिए कानून के विद्वान और शिक्षाविद अधिक उपयुक्त हैं।
उम्मीद है लोकसभा अध्यक्ष तृणमूल के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर ‘जल्द’ निर्णय लेंगे: न्यायालय
नयी दिल्ली: 23 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उम्मीद जतायी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्य करार देने की मांग वाली याचिका पर ‘‘जल्द’’ निर्णय लेंगे।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उन्हें पता है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकते, ‘‘लेकिन हम महज उन्हें मामले के शीघ्र समाधान के लिए स्मरण कराना चाहते हैं।’’
प्रपत्र-6 में बदलाव ‘अवैध’, दो पूर्व सीईसी ने एसआईआर, निर्वाचन आयोग के कामकाज पर उठाए सवाल
नयी दिल्ली: 23 सितंबर (भाषा) पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को एक ‘‘ऐसी व्यवस्था करार दिया, जिसने मतदाताओं के मन में डर पैदा कर दिया है’’। उन्होंने कहा कि वैधानिक मतदाता पंजीकरण प्रपत्र-6 में किए गए बदलाव ‘‘पूरी तरह गलत और अवैध’’ हैं।एक अन्य पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) एस. वाई. कुरैशी ने सवाल उठाया कि क्या कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की गई मतदाता सूचियों के आधार पर चुनाव कराए जा सकते हैं।
अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक खबर दी है कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए फैसलों और आदेशों पर बार-बार आपत्ति जतायी थी।खबर के अनुसार, दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने से लेकर प्रपत्र-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने जैसे मुद्दों पर आपत्ति दर्ज की।वर्ष 2018 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे रावत ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। निर्वाचन आयोग में ऐसा शायद ही कभी हुआ होगा। मैं भी वहां रहा हूं, लेकिन मैंने देखा कि फैसले हमेशा सर्वसम्मति से लिए जाते थे।’’उन्होंने कहा, ‘‘एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के जरिये एक ऐसी व्यवस्था खड़ी हो गई है, जो अब खुद ही मतदाताओं के बीच डर पैदा कर रही है। यह अच्छी बात नहीं है। हमारे लोकतंत्र के लिए यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।’’
खबर के अनुसार, जोशी ने मई में दर्ज अपनी आपत्ति में कहा था कि एसआईआर के लिए जारी निर्देशों के जरिये प्रपत्र-6 में बदलाव नहीं किया जा सकता और ‘‘कानूनी रूप से टिकाऊ’’ रास्ता यही होगा कि नियमों में संशोधन के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जाए। संधू ने भी इस पर सहमति जताई थी।हालांकि, बाद में ऑनलाइन प्रपत्र-6 में नए मतदाता आवेदनों को एसआईआर से जोड़ने वाली एक घोषणा शामिल कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में संधू ने आपत्ति दर्ज करायी कि यह बदलाव ‘‘अनधिकृत और अवैध’’ है तथा इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए।रावत ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयुक्तों ने जो कहा है कि प्रपत्र-6 में गलत तरीके से संशोधन किया गया, कानून में इसका कोई प्रावधान नहीं है, उनकी राय नहीं ली गई और कोई बैठक नहीं हुई- ये बहुत गंभीर आरोप हैं। जिस तरह प्रपत्र-6 में संशोधन किया गया है, वह गलत है। यह पूरी तरह अवैध है।’’वर्ष 2010 से 2012 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्य करने वाले कुरैशी ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘जोशी ने कहा है कि यदि कोई जोड़ किया जाना था तो नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए था।’’कुरैशी ने कहा, ‘‘यदि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया ही अवैध रही है, तो आप अवैध मतदाता सूची के आधार पर चुनाव नहीं करा सकते।’’
निर्वाचन आयुक्तों का अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा
नयी दिल्ली: 23 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान तीनों निर्वाचन आयुक्तों के अलग-अलग विचार जाहिर करने से जुड़ी खबरें निर्वाचन आयोग के लोकतांत्रिक तरीके से काम करने को प्रदर्शित करती हैं।सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि ये खबरें विपक्षी दलों के इन आरोपों को भी गलत साबित करती हैं कि निर्वाचन आयोग “तानाशाह” तरीके से काम कर रहा है।
युवा कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया, इस्तीफा मांगा
नयी दिल्ली: 23 सितंबर (भाषा) भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की।युवा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च का प्रयास किया, हालांकि पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक दिया।

