सूबेदार राय (यातायात) द्वारा अभद्र व्यवहार पर निलंबित

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शहडोल

दिनांक 04.02.23 को टोल प्लाजा शहडोल के समीप घटित घटना के वायरल वीडियो में प्रथम दृष्ट्या पुलिस अधिकारी सूबेदार अभिनव राय (तैनाती यातायात) द्वारा अभद्र व्यवहार करना प्रतीत होता है, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है। अतः उक्त सूबेदार को निलंबित कर दिया गया है।समूचे घटनाक्रम के संबंध में समग्र जाँच हेतु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहडोल को निर्देशित किया गया हैं।

एमपी के शहडोल में वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस की गुंडागर्दी सामने आई है। कार न रोकने पर ट्रैफिक थाने में पदस्थ एएसआई ने मारपीट की है। इस दौरान वीडियो बना रहे लोगों के साथ भी एएसआई ने बदसलूकी की है। मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो शहडोल नेशनल हाइवे-43 का है। ट्रैफिक पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी। तभी एक कार को रोका। वहीं, कार की गति ज्यादा थी तो निर्धारित जगह पर नहीं रुकी। कुछ दूर आगे ट्रैफिक पुलिस ने स्टॉपर लगाकर रोका।कार में एक परिवार छत्तीसगढ़ से शहडोल गोहपारू थाने के कर्री गांव मे अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहा था। कार के कागज चेक किए गए, प्रदूषण के कागज न होने पर चालान काटने लगे। इसी बीच दोनों पक्षों में बहस होने लगी और विवाद होने लगा। चालान काटते वक्त जैसे ही युवक ने मोबाइल चालू किया इंस्पेक्टर अभिनव राव भड़क गए। युवक का गला दबाकर लात घूंसे बरसाने लगे और विवाद बढ़ गया। इसके बावजूद इंस्पेक्टर नहीं रुके और युवक की खूब पिटाई की। मामला थाने तक पहुंच गया। मारपीट का वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने बना लिया। वीडियो वायरल हो गया है।ट्रैफिक डीएसपी मुकेश दीक्षित ने बताया कि दोनों पक्षों ने मामले में आपसी सहमति कर ली है। इसलिए कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। इंस्पेक्टर ने राहगीरों से मारपीट मामले में कहा कि मारपीट का अधिकार किसी को नहीं है। (साभार नवभारत टाइम्स)

ट्रैफिक पुलिस राय को पुलिस अधीक्षक में प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है|  शहडोल में ही नहीं बल्कि पूरी पुलिस यातायात की व्यवस्था में पुलिस सेवा की जगह पुलिस यातायात को ऊपरी आमदनी का बड़ा  माना जाता है और जब भ्रष्टाचार का खून लग जाता है तो जो भी उसके आड़े आता है वह इसका शिकार हो जाता है| शहडोल में कथित तौर पर ब्राम्हण परिवार में एक गमी के मामले में जो परिवार यात्रा कर रहा था उसके साथ संवेदनहीन तरीके से भ्रष्टाचार उद्देश्य पूर्ति के लिए वर्दी पहन कर मारपीट करना बेहद निंदनीय कृत्य रहा |

पूर्व भी एक पत्रकार के साथ  मामले में जब टोका टाकी की गई तो वह पत्रकार पुलिस उच्चाधिकारियों के संरक्षण के कारण भ्रष्टाचार का शिकार हो गया और उसे अनावश्यक न्यायालय में प्रमाणित कराए गए दोस् के लिए परेशान होना पड़ा| क्योंकि पुलिस को ही प्रमाणित करना होता है तो वह फर्जी तरीके से अपराधियों को प्रमाणित भी कर देती है| और अब यह एक प्रचलन हो चला है जिसका असर शहडोल कोतवाली में फरवरी 2022 में प्रकरण क्रमांक  135 और 138 में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है| आखिर इस धंधे को जो पुलिस थानों में निर्बाध चल रहा है और फर्जी प्रकरणों को प्रमाणित करके न्यायालय में प्रताड़ित करने के उद्देश्य सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए गड़ा जाता है इससे पुलिस अधिकारियों को ठीक करने में बड़ा संघर्ष करना पड़ेगा| किंतु अगर उच्च अधिकारी ईमानदार हैं तो अधीनस्थ अधिकारियों को उस से सीख लेनी चाहिए और फिलहाल टोल प्लाजा के मामले में पुलिस अधीक्षक प्रतीक कुमार के त्वरित एक्शन पर लोगों ने संतोष जताया है, इससे देशभक्ति जनसेवा की नारे को काफी बल मिलेगा|


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