
नई दिल्ली, 22 मार्च ।
नई दिल्ली में रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान के 16 वें संस्करण में प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा, अलग-अलग विचारों का सम्मान करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए भारत केप्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि असहमति को ‘घृणा में नहीं बदलना चाहिए और घृणा को हिंसा में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे देश के साथ-साथ दुनिया भर में कई पत्रकार कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करते हैं। लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों और विरोध का सामना करते हुए वे अडिग रहते हैं। यह ठीक वैसा गुण है जिसे गंवाना नहीं जाना चाहिए।’
उन्होंने कहा, ‘नागरिकों के रूप में हो सकता है कि हम उस दृष्टिकोण से सहमत नहीं हों, जो किसी पत्रकार ने अपनाया है या जिस निष्कर्ष वे पहुंचे हैं। मैं भी खुद को कई दफा पत्रकारों से असहमत पाता हूं। आखिरकार, हम में से कौन अन्य सभी लोगों से सहमत है? लेकिन असहमति को घृणा में नहीं बदलना चाहिए और नफरत को हिंसा में तब्दील नहीं होने देना चाहिए।’ लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र प्रेस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मीडिया राज्य की अवधारणा में चौथा स्तंभ है, और इस प्रकार लोकतंत्र का एक अभिन्न घटक है।
और स्वस्थ लोकतंत्र को एक ऐसी संस्था के रूप में पत्रकारिता के विकास को प्रोत्साहित करना चाहिए जो सत्ता प्रतिष्ठान से कठिन प्रश्न पूछ सके, या जैसा कि आमतौर पर जाना जाता है, सत्ता से सच बोलें। किसी भी लोकतंत्र की जीवंतता से समझौता तब किया जाता है जब प्रेस को ऐसा करने से रोका जाता है। अगर किसी देश को लोकतंत्र बने रहना है तो प्रेस को स्वतंत्र रहना होगा। उन्होंने कहा कि ‘जिम्मेदार पत्रकारिता सच्चाई की किरण है जो हमें बेहतर कल की ओर ले जा सकती है। यह इंजन है जो सच्चाई, न्याय और समानता की खोज के आधार पर लोकतंत्र को आगे बढ़ाता है। डिजिटल युग की चुनौतियों के दौर में पत्रकारों के लिए अपनी रिपोटिंग में सटीकत्ता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के मानकों को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। (Sabharजनसता)

