शहडोल
शहडोल जिला अस्पताल, कंचनपुर निवासी मुकेश द्विवेदी के लिए दुख और प्रताड़ना का कारण बना हुआ है. जिस जिला अस्पताल को मुकेश सुरक्षा और संवेदना का स्थान मानकर अपने पत्नी और होने वाले बच्चे के लिए वरदान मांग कर आया था वह उसकी मौत का कारण बनता चला जा रहा है. बताया जाता है की दिनांक 4 फरवरी 2023 को अस्पताल में गलत ब्लड चढ़ाने के कारण गर्भवती महिला निशी द्विवेदी का गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई,
बल्कि महिला भी मौत का युद्ध अकेले ही लड़ रही है. जिसमें उसके पति और उनका पूरा परिवार अपना घर जमीन बेचने पर भी मौत के युद्ध से निजात नहीं पा रहे हैं और उसके इस बड़े युद्ध में ना तो जिला अस्पताल का कोई जिम्मेदार तबका साथ दे रहा है और ना ही कोई स्वयंसेवी संस्था …अथवा प्रशासन उसे आर्थिक मदद पहुंचा कर सहारा देने का कारण बन रही है.
———-त्रिलोकीनाथ————–
रही स्थानीय राजनेताओं और विधायक सांसद की बात तो ना तो उनके पास फुर्सत है और ना ही उनके प्रतिनिधियों के पास फुर्सत है कि यदि जिला अस्पताल की अव्यवस्था और अराजकता के हालात के कारण कोई दुर्घटना हो जाती है तो त्वरित सहायता देकर पूरा खर्चे पर उस गर्भवती महिला और उस गर्भ में पल रहे बच्चे की जान बचाने की मौत की लड़ाई में उसका साथ दे सकें…? हालात इतने बुरे हैं कि मुकेश द्विवेदी को उसके और उसके दुर्भाग्य के साथ छोड़ दिया गया है और राजनेता और प्रशासन कहीं हनुमान जयंती, तो कहीं लाडली बहना और लाडले भांजा के मामा की प्रचार प्रसार में पूरा समय दे दिए.. अगर यही वक्त इस महिला की मौत की युद्ध में दिए होते तो हालात इतने बदतर ना होते….
बताया जाता है कलेक्टर एसपी और थाने में जिला अस्पताल में व्याप्त अराजकता की शिकार निशी द्विवेदी के पती मुकेश द्विवेदी शिकायत पत्र देकर कह रहे हैं
कि की पत्नी गर्भवती हुई तो संबंधित ए.एन.एम. के द्वारा सम्पर्क किया आवेदक के द्वारा समय-समय पर विधिवत जांच कराई जाती रही है जिसमे सब कुछ सही बताया गया. इसके बाद एस.एन.एम. आशा वर्मन निवासी कंचनपुर के कहने पर आवेदक के द्वारा अपने पत्नी को दिनांक 3-2-2023 को जिला चिकित्सालय शहडोल में डाक्टरों के घह कहने पर भर्ती करा दिया. डाक्टरों के द्वारा बताया गया आपके पत्नी के शरीर में खून की कमी है इसलिये विवेक तिवारी पिता रामगोपाल तिवारी निवासी कंपनपुर से ब्लड डोनेट कराया इसके बाद ब्लड सैन्टर से ब्लड दिया गया दिनांक 4-2-2023 को समय करीब 1.30 बजे यह कहकर ब्लड चढ़ा दिया तब आवेदक के पत्नी की हालत खराब हो गई तब कहा गया कि इनको गलत ब्लड चढ़ गया इसलिये आप सही ब्लड बैंकर आओ इसके बाद मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया और मेडिकल कालेज में कहा गया कि इनको बुरी तरह इम्पेक्सन फेल गया है आप बाहर ले जाओ हमारे यहाँ इसकी कोई व्यवस्था नहीं है । इसके बाद श्रीराम अस्पताल लाया वहां भी यही बताया गया कि आप बाहर ले जाओ मैडिकल कालेज मैं पत्नी का प्रसव कराया गया परन्तु मृत बच्चा पैदा हुआ था ।
शिकायत में कहा गया की खून चढ़ जाने के कारण प्रार्थी का बच्चा भी खत्म हो गया और पत्नी मरणासन्त अवस्था में आ गई थी तब प्रार्थी आनन- फानन में यहां वहां से रुपयों की व्यवस्था करके जबलपुर ले गया जहां करीब 8 दिन भर्ती कराये रहा परन्तु वहाँ भी ठीक नहीं हुआ तब प्रार्थी जमीन बेच रूपयों की व्यवस्था करके नागपुर बोकार्ड अस्पताल ले गया जहां दवाई चला जहाँ ठीक नहीं हुआ और रूपये भी खत्म हो गये तब वहां से सरकारी अस्पताल एम्स नागपुर रेफर कर दिया
गया परन्तु आराम हुआ| इसके बाद प्रार्थी छुट्टी कराकर घर ले आया है।
शिकायत में कहा गया की पत्नी की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई हैं बीमारी खत्म नहीं हुई हैं। और प्रार्थी के पास इलाज कराने के लिए अब रकम भी नहीं प्रार्थी अपना खेत बाड़ी बिक चुका है आर्थिक दशा अत्यन्त दयनीय हो चुकी तथा पत्नी का इलाज कराने हेतु कोई रकम नहीं हैं, प्रार्थी बच्चे से हाथ धो चुका है परन्तु अब पत्नी भी अलविदा होने के कगार पर है….
निशी द्विवेदी के पति मुकेश द्विवेदी अब शिकायत पत्र देकर न्याय की भीख मांगते फिर रहे हैं फिलहाल उनकी कोई सुनवाई नहीं होती दिखाई नहीं दे रही है जो उन्हें शासकीय मदद करके प्रशासनिक लापरवाही और जिला चिकित्सालय की अराजकता पूर्ण व्यवस्था के कारण घटी घटना से मुक्ति दिला सके.

