
नयी दिल्ली, 7 अप्रैल (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी के संशोधित नियमों के ‘‘फैक्ट चेक’’ प्रावधानों को लेकर हमला झेल रहे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को आलोचनाओं को ‘‘जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचना’’ कहकर खारिज कर दिया।.चंद्रशेखर की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधित नियमों को ‘‘सख्त’’, ‘‘अस्वीकार्य’’ तथा पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘‘सामग्री सेंसर’’ करने के लिए ‘‘व्यापक अधिकार’’ देने वाले के रूप में वर्णित किया।.
नयी दिल्ली, राज्यसभा के सदस्य कपिल सिब्बल ने सामाजिक न्याय के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रतिबद्धता वाली टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि इस सरकार के शासन में ‘‘अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब होते जा रहे हैं।’’.भाजपा के 44वें स्थापना दिवस पर पार्टी सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को विकास, विश्वास और नए विचार का पर्याय बताते हुए कहा था कि सामाजिक न्याय उनकी पार्टी की विचारधारा का आधार है।
नयी दिल्ली, जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने देशवासियों को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिक्षा का महत्व नहीं समझते।.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सिसोदिया के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘‘भ्रष्टाचार में डूबे’’ होने के बाद वह अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता खो चुके हैं और अपने पत्र लिखकर खबरों में बने रहने की कोशिश कर रहे थे।.
नयी दिल्ली, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शुक्रवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि पर उनकी उस टिप्पणी के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को रोकना उनके विवेक पर निर्भर करता है। साथ ही चिदंबरम ने यह आरोप भी लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा नियुक्त राज्यपाल अपनी शक्तियों का उल्लंघन कर ‘लोकतंत्र को कुचल रहे हैं’।.चेन्नई के राजभवन में ‘थिंक टू डेयर’ कार्यक्रम की श्रृंखला के तहत प्रशासनिक सेवा के अभ्यर्थियों के साथ बातचीत के दौरान, रवि ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए विधानसभा से पारित विधेयकों को उनके पास भेजने पर टिप्पणी की थी और कहा था कि ‘‘राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं: सहमति दें, रोक दें – जिसका अर्थ है कि विधेयक खत्म हो चुका है – जिसे उच्चतम न्यायालय और संविधान अस्वीकार करने के लिए सभ्य भाषा के रूप में उपयोग करते हैं। और तीसरा, विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करें।’’.

