राजनीतिक छुआछूत की क्यों शिकार हुई हिमाद्री सिंह…?__ (त्रिलोकीनाथ  )___

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  MP Himadri Singh became BJP State Vice President of - हिन्दुस्थान समाचार    विंध्य के रीवा में प्रधानमंत्री के मंच को साझा क्यों नहीं कर पा रही हैं शहडोल सांसद,हिमाद्री सिंह …?

बीजेपी पॉलिटिकल इंडस्ट्री के आइकॉन और मॉडल नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री भी हैं, और वे आज रीवा आ रहे हैं. जब मोदी कहीं जाते हैं खासतौर से ट्रेन के संबंध में वंदे भारत अपनी पसंदीदा ट्रेन का लोकार्पण करते हैं.. रीवा से इसकी आशा भी खत्म हो गई जब यह घोषणा हुई कि वह कोई और ट्रेन पर काम करने जा रहे हैं. उम्मीद तो प्रधानमंत्री जी के आने के बाद यह होती है कि राज्य विकेंद्रीकरण के दृष्टिकोण में जनता को उनका विंध्य प्रदेश वह वापस लौटा देंगे.. किंतु विंध्य प्रदेश को वापस देना

तो दूर की बात, जिस प्रकार से राजनीतिक छुआछूत का परिदृश्य उनके विज्ञापनों में

शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह की तीन वर्षीय बेटी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया सवाल मिला यह जवाब - Prime Minister Narendra Modi questioned the three year old ...

उभरा है उससे यह संदेश स्पष्ट तौर पर जाता है कि वे विंध्य प्रदेश को फिलहाल तो नहीं देने वाले..; बल्कि जिन्होंने इस रीवा ट्रिप को अरेंज किया है उनका माइंडसेट इस बात को लेकर है कि विंध्य प्रदेश के नेताओं कि आपसे समन्वय और उसमें चल रही समरसता को तोड़ कर रखा जाए. ताकि नेताओं में विंध्य प्रदेश बनावट को लेकर कोई सपना  ना बनने पावे.

______________________________ (त्रिलोकीनाथ  )_______________________

यह हम इसलिए नहीं कह रहे हैं कि हमें अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री की कार्यप्रणाली पर कोई संदेह है, बल्कि हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री बीजेपी के अंदर काम कर रही है उसने हमारे आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल लोकसभा क्षेत्र के सांसद और भारत की सर्वाधिक युवा वोटरों का आदिवासी चेहरा श्रीमती हिमाद्री सिंह सांसद को उन्होंने विंध्य प्रदेश की कभी राजधानी रही रीवा के मंच पर प्रधानमंत्री के समक्ष बुलाने से परहेज किया है. इससे विंध्य प्रदेश का एक अहम टुकड़ा विंध्य-मैंकल क्षेत्र हिस्सा जिससे विंध्य पर्वत माला के नाम पर निर्मित विंध्य प्रदेश का सपना खंडित हो जाता है…, उन्हें राजनीतिक छुआछूत करके मंच पर नहीं बुलाया गया है. ऐसा शासन स्तर पर प्रकाशित विज्ञापनों से प्रमाणित होता है.

ऐसे में यह प्रश्न भी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से खड़ा हो जाता है कि क्या बीजेपी में  हिमाद्री सिंह का पवित्रीकरण अभी तक नहीं हो पाया है…? अथवा उनकी निष्ठा पर कई प्रश्न खड़े कर रखे गए हैं. जब ट्रेन की ही बात कर रहे हैं तो पिछले 4 साल सेShahdol MP demanded to run direct service train till Nagpur in Lok Sab | शहडोल सांसद ने लोकसभा में नागपुर तक सीधी सेवा ट्रेन चलाने की मांग | Patrika News सांसद हिमाद्री सिंह ने दावा किया है कि वह शहडोल से नागपुर की ट्रेन चालू ही करा देंगे जो आदिवासी क्षेत्र के स्वास्थ्य संबंधी प्रताड़ना से जूझ रहे आम नागरिकों के लिए वरदान साबित होगा.. किंतु यह वरदान दे पाने में भी या दिला पाने में भी भारत का युवा सांसद हिमाद्री सिंह पूरी तरह से अब तक असफल रहीं है.

गौरतलब है कि हिमाद्री सिंह कट्टर कांग्रेसी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दलवीर सिंह और कांग्रेस की पूर्व सांसद और विधायक रहे उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह की पुत्री है.. जिनका विवाह भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र सिंह मरावी के साथ हुआ है. स्वयं  कुमारी हिमाद्री सिंह कांग्रेस में रहते हुए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थी, तब उन्हें उनके हाल में चुनाव लड़ने के लिए छोड़ दिया गया था. बावजूद इसके वह बहुत कम वोटों के अंतर से  हारी थी. कांग्रेस के एक नेता भी उनके पक्ष में सक्रिय भूमिका नहीं निभाया था. जबकि प्रभारी के रूप में जबलपुर के अधिवक्ता वर्तमान सांसद विवेक तंखा, कमलनाथ की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने का दावा किए थे.शहडोल लोकसभा सीट: यहां बराबरी का रहा है मुकाबला, अब किसका नंबर? – News18 हिंदी तब कुमारी  हिमाद्री सिंह को लेकर कांग्रेस पार्टी या तो ओवरकॉन्फिडेंस में थी या फिर किसी  षड्यंत्र के तहत उन्हें चुनाव हरा दिया गया…? बहरहाल इनसे तब वह  निराश रहीं, उनकी संरक्षक उस समय पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह चुनाव पर नजर रख रही थी.. वे शहडोल में रहकर चुनाव जीतना चाहती थी. इसलिए कांग्रेस की हर हरकत पर उनकी नजर थी. जबकि तब मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह गली-गली , मोहल्ले-मोहल्ले चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दिए थे.. और बड़ी मुश्किल से वह चुनाव भाजपा के पक्ष में ज्ञान सिंह को सांसद के रूप में जीता पाए. इससे कांग्रेस की विरासत और दलवीर सिंह की विरासत को तोड़ने के लिए उनकी लड़की  हिमाद्री सिंह को भाजपा में लाना जरूरी हो गया था और फिर उन्हें टिकट देकर चुनाव जीताया गया.

किंतु 5 साल होने को आ रहे हैं हिमाद्री सिंह की अहमियत भारतीय जनता पार्टी में बहुत ज्यादा नहीं दिखती, उनके कहने पर एक नागपुर की ट्रेन भी टुकड़े के रूप में नहीं फेंकी गई है.. और अब जबकि स्वयं प्रधानमंत्री बिंद प्रदेश की राजधानी रही रीवा में अपने पॉलिटिकल ट्रिप  पर हैं उन्हें (हिमाद्री सिंह को) उस मंच में भी नहीं प्रस्तुत किया गया है. जबकि विंध्य प्रदेश के 4 सांसदों में सिर्फ तीन सांसद याने जनार्दन मिश्रा, गणेश सिंह और रीति पाठक (सतना, रीवा और सीधी) लोकसभा क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.  इससे अब यह संदेश प्रबल हो जाता है की युवा भारत के युवा चेहरे हिमांशु हिमाद्री सिंह को हाशिया में जानबूझकर डालकर रखा गया है… कहीं विंध्य प्रदेश की भावना प्रबल ना हो जाए…?

वैसे भी भारतीय जनता पार्टी के विधायक और  विंध्य पुनर्निर्माण के नारायण त्रिपाठी विंध्य प्रदेश बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. जिसके लिए वे पूरे विंध्य प्रदेश में लगातार दौरे पर बने रहे हैंMadhya Pradesh News : अलग राज्य की मांग कर शिवराज की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं नारायण त्रिपाठी? और यदा-कदा इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह और पूरी भाजपा की नाराजगी के वह केंद्र में भी रहे हैं.. किंतु विंध्य नेता नारायण त्रिपाठी को इन सब से फर्क नहीं पड़ता उनका साफ कहना है विंध्य प्रदेश के निर्माण के लिए उनकी जान भी चली जाती है तो वह इस पर समझौता नहीं करेंगे…. हाल में देखा गया है कि वह एक पृथक राजनीतिक पार्टी की मजबूती की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं विंध्य की बात - विंध्य प्रदेश "समृद्ध प्रदेश"_ प्रस्तावित राजकीय चिन्ह सभी विंध्य मित्रों शत-शत नमन सभी प्रांतों का अपना एक राजकीय चिन्ह ...और शायद प्रधानमंत्री और भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी का रीवा का दौरा उसी बिंद-प्रदेश के सपनों में पानी फेरने जैसा एक प्रयास मात्र है… क्योंकि प्रधानमंत्री ना तो अपना पसंदीदा वंदे मातरम ट्रेन का उद्घाटन करने आ रहे हैं और ना ही कुछ ऐसा विशेष, जिसके लिए उन्हें रीवा आना पड़े.. उनके मंच को साझा करने में दलित,ओबीसी और ब्राह्मण चेहरा को प्रस्तुत किया गया है.. और इन सब में विंध्य प्रदेश के अहम साझीदार सांसद हिमाद्री सिंह को राजनीतिक रूप में अछूत बना कर रख दिया गया है. इससे यह तो स्पष्ट ही होता है कि अभी तक हिमाद्री सिंह भाजपा की में राजनीतिक रूप से पवित्र सदस्य नहीं बन पाई हैं. बल्कि उनकी निष्ठा पर लगातार प्रश्न खड़े हुए हैं…?

तो सवाल  यह भी खड़ा होता है कि क्या कांग्रेस पार्टी इस मौके की नजाकत को अवसर के रूप में देखना भी चाहती है,अपने पापों को प्रायश्चित करेगी  अथवा जिस प्रबंधन से उसने हिमाद्री सिंह को चुनाव में पराजित करने में भूमिका अदा की थी उसे बरकरार रखना चाहती है ताकि उसका अपना गुलाम का पत्ता सांसद बन सके… अथवा यह शहडोल लोकसभा क्षेत्र भाजपा की झोली में ही शोभा बढ़ाता रहे…फिलहाल इतना ही काफी है कि भारत की युवा सांसद दरकिनार कर दी गई हैं हिमाद्री सिंह और भविष्य में भाजपा के अंदर उन्हें सांसद के अलावा कोई अन्य रोल के लिए तैयार रहना चाहिए… जैसे उनके पति नरेंद्र मरावी की कोई भूमिका भाजपा ने नहीं बना कर रखी है… जबकि वह पूर्व में अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं… फिलहाल वह भी उसी प्रकार से खाली हैं जिस प्रकार से भविष्य में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती हिमाद्री सिंह का रास्ता तैयार किया जा रहा है… यह शहडोल क्षेत्र की विडंबना है अथवा आदिवासियों की स्थिति का पारदर्शी चेहरा… यह तो वक्त बताएगा..?


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