सेन्गोल ; लोकसभा अध्यक्ष के आसन पास प्रमुखता से रविवार को स्थापित किया जाएगा

Share

सेन्गोल  जिसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त, 1947 की रात को अपने आवास पर, कई नेताओं की उपस्थिति में स्वीकार किया था। वह एक विशेष अवसर था, जब जवाहर लाल नेहरू जी ने तमिलनाडु के थिरुवदुथुराई आधीनम (मठ) से विशेष रूप से पधारे आधीनमों (पुरोहितों) से सेन्गोल ग्रहण किया था। पंडित नेहरू के साथ सेन्गोल का निहित होना ठीक वही क्षण था, जब अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के हाथों में सत्ता का हस्तांतरण किया गया था। हम जिसे स्वतंत्रता के रूप में मना रहे हैं, वह वास्तव में यही क्षण है;गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा,अमृत काल के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में सेन्गोल को अपनाने का निर्णय लिया है। संसद का नया भवन घटना का साक्षी बनेगा, जिसमें आधीनम उस समारोह की पुनरावृत्ति करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी को सेन्गोल प्रदान करेंगे।रविवार को इतिहास की पुनरावृत्ति होगी, जब नए संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा।

“सेन्गोल का गहरा अर्थ होता है। ‘‘सेन्गोल’’ शब्द तमिल शब्द “सेम्मई” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “नीतिपरायणता”। इसे तमिलनाडु के एक प्रमुख धार्मिक मठ के मुख्य आधीनम (पुरोहितों) का आशीर्वाद प्राप्त है। ‘न्याय’ के प्रेक्षक के रूप में, अपनी अटल दृष्टि के साथ देखते हुए, हाथ से उत्कीर्ण नंदी इसके शीर्ष पर विराजमान हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेन्गोल को ग्रहण करने वाले व्यक्ति को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष रूप से शासन करने का ‘आदेश’ (तमिल में‘आणई’) होता है और यह बात सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली है- लोगों की सेवा करने के लिए चुने गए लोगों को इसे कभी नहीं भूलना चाहिए।” 1947 के उसी सेन्गोल को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकसभा में अध्यक्ष के आसन के पास प्रमुखता से स्थापित किया जाएगा। इसे राष्ट्र के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा और विशेष अवसरों पर बाहर ले जाया जाएगा।समारोह में 96 साल के श्री वुम्मिडी बंगारु चेट्टी जी भी सम्मिलित होंगे, जो इसके निर्माण से जुड़े रहे हैं।

यह उस वक्त हो रहा है जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के वंशज उत्तराधिकारी राहुल गांधी ने नए संसद भवन का लोकार्पण राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपती मुर्मू के कर कमलों द्वारा कराए जाने की मांग की है ज्ञातव्य हो कि नए संसद भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री स्वयं करने जा रहे हैंकर्नाटक में करारी विधानसभा चुनाव की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी संसद में पहली बार पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री भारत सरकार की स्मृतियों के हवाले से नया संसद भवन का लोकार्पण करेंगे इस अवसर पर वह उस सैंगोल चिन्ह को अमृत काल का पहचान बताने का प्रयास करेंगे जो कभी अंग्रेजों से कथित तौर पर सत्ता हस्तांतरण के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्राप्त हुआ था .इस तरह नई राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के स्मृतियों के सहारे दक्षिण की भारतीय राजनीति पर असर डालने का प्रयास करेंगे..

संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से नहीं करवाना सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान: विपक्ष

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने 19 विपक्षी दलों द्वारा संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह के बहिष्कार की घोषणा किए जाने के बाद बुधवार को कहा कि उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों नहीं कराया जाना और समारोह में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है।.राहुल गांधी ने यह भी कहा कि संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों से बनती है।.


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles