
मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ; यह एक काल्पनिक विंध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री की कल्पना है .और जब सपने में ही मुख्यमंत्री बनना है तो एक मेरे मित्र ने कहा था गलत सपना देखने के कारण पिता ने अपने पुत्र को झापड़ मारा कि अगर सपने में ही रबड़ी खाना है तो चम्मच स क्यों खाओ..? सब समेट-समेटकर क्यों नहीं खाओ…?तो यह एक सपना ही है इसलिए हम यह गलती नहीं करेंगे, हम खुलकर सपना देखेंगे.. इस बार शुरुआत विंध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ के सपने से होनी चाहिए कि यदि मध्यप्रदेश की विकास होता है और उसमें भ्रष्टाचार का कंपटीशन कर्ज लेकर विकास की रफ्तार को गति देनी है.. लोकहित के नाम पर तब हमारे पास क्या रास्ते रह जाएंगे. फिलहाल दो नीतियों पर मेरी कैबिनेट काम करती, यह तो यह रीवा से अमरकंटक तक सड़क मार्ग जिसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल में करीब 110 करोड़ों रुपए मैं BOT (बनाओ ऑपरेट करो और ट्रांसफर करो )इस नीति पर 25 साल के लिए सड़क बनाया था, कहते हैं 2017 में यह पीरियड खत्म हो गया .10 साल तक सड़क को अभी जिंदा रखना था. यह मध्यप्रदेश रोड ट्रांसपोर्ट का काम था उसने ऐसा न करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के हाथों नई नीति बनवा दिया. अब सड़क तथाकथित तरीके से 4 लाइन की सीमेंट कंक्रीट की बनेगी उसका रूट अलग होगा “टुकड़े टुकड़े गैंग” के रूप में सड़क मार्ग को लूटने का काम करेगी.. लेकिन जब प्रदेश के विकास की बात आएगी और यहऔर “टुकड़े टुकड़े गैंग” सड़क विकास के नाम पर हजारों करोड़ों रुपए का विकास कर चुकी होगी… रीवा-अमरकंटक सड़क मार्ग के कारण करीब 56 लोग नहर में डूब कर मर गए तो जैसे मुख्यमंत्री ने सबको निर्दाग साबित कर दिया. वैसे सड़कों के कारण होने वाली हर प्रकार की सामूहिक मौतों को आपदा के रूप में देखना चाहिए और हर आपदा एक अवसर प्रदान करती है हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह आदर्श वाक्य हमें हमेशा याद रखना चाहिए इसलिए उसका कोई सोक नहीं होना चाहिए…
तो विंध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ के लिए क्या रह जाएगा…? इसलिए हमारे कैबिनेट ने यह तय किया की रीवा से अमरकंटक तक बन चुके मार्ग में “टुकड़े-टुकड़े रूप” में हम ओवर -ब्रिज पूरे रीवा से अमरकंटक तक सड़क मार्ग का बनाएंगे. इसमें हजारों करोड़ों रुपए नहीं लाखों करोड़ों रुपए का विकास से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और हमें भी भ्रष्टाचार की तमाम नए रास्ते मिलेंगे… इसलिए आज से हमने इसमें काम करने का प्रस्ताव पारित कर लिया. कि विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ को अवसर मिले लोकहित में वह विंध्य प्रदेश को गिरवी रख कर के, क्योंकि मध्यप्रदेश को भी गिरवी रख कर के करोड़ों रुपए का कर्जा लिया गया है.. तो विंध्य प्रदेशको भी गिरवी रख कर के यह कार्य किया जाएगा …पैसे की कोई कमी नहीं होगी.और अगर बनाई गई गुणवत्तापूर्ण घटियासड़क या और ब्रिज के कार्य कुछ लोग मर जाते हैं.. जैसे कि
इसी तरह विंध्य में दिग्विजय सिंह की सरकार ने एक क्रांतिकारी फैसला आदिवासी विशेष क्षेत्र के लिए भी लिया. हालांकि उन्होंने यह फैसला मध्यप्रदेश के लिए लिया था, लेकिन मध्यप्रदेश फिलहाल विंध्यप्रदेश के अंदर शामिल है विंध्य प्रदेश के अंदर भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची का तथाकथित काल्पनिक आदिवासी विशेष क्षेत्र के वह 89 विकासखंड शामिल हैं जिसमें आदिवासियों के कल्याण और इस क्षेत्र विशेष की संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. ताकि क्षेत्र का शोषण ना हो इसलिए आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल भी शामिल है. कई जिले इसमें शामिल रहेंगे.
ऐसे में रेत-नीति यानी खनिज-नीति मैं जो फैसला कमलनाथ ने 3 साल के लिए माफिया नाम के ठेकेदारों के लिए खोल दिया था और जमकर उनकी डेढ़ साल की सरकार में लूट की शुरुआत हुई उसे आगे बढ़ाते हुए माफिया राज के लिए रेत नीति अब 5 साल कर दी जा रही है और 10 परसेंट देने के बाद वह 10 साल की हो जाएगी ऐसे में मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ की सरकार यह निर्णय लेगी कि आने वाले समय में 50 साल के लिए रेत नीति तय कर दी जाएगी क्योंकि अगर क्षेत्र को माफियाओं के हवाले पूरी तरह से करना है तो यह अवधि कम होगी और जो कार्य कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्थानीय मजदूरों को रेत खदान में आवश्यक रूप से उपयोग करने की नीति बनाई गई थी उसे लोकप्रिय भाजपा कीशिवराज सरकार ने यह बाध्यता खत्म कर दी है अब आदिवासी विशेष क्षेत्र में भी स्थानीय मजदूरों को रखने की और उनसे रेत खदान में रोजगार देने की बाध्यता खत्म हो गई है इसके साथ मैनुअल यह ने मानव श्रम के द्वारा नदियों से संवेदना के साथ रेत निकालने की मिट्टी को भी नीति को भी खत्म कर दिया है यानी मशीन लगाकर रेत निकाली जा सकती है.
इस विकास पूर्ण कार्य में दो चीज माफिया हित में सुनिश्चित हो गया है एक तो स्थानीय आदमियों को रोजगार देने वाली नौटंकी खत्म हो गई…. जो पहले से ही खत्म थी .क्योंकि माफिया जो ठेकेदार के रूप में काम करते थे वह अपने ही गुंडे लाते थे जिनकी कोई लिस्टिंग पुलिस के पास नहीं होती थी, जनरल मैनेजर खुलेआम बंदूके लेकर अपने गुंडों के साथ सुरक्षा के नाम पर कई गुंडों के साथ कार में आता जाता था और रोजगार दे रहा था. स्वाभाविक है स्थानीय आदिवासी और गैर आदिवासी लोग कमजोर और कायर लोग हैं वह ऐसी गुंडागर्दी कर नहीं सकते तो नीतियां बनाकर यह आवश्यकता खत्म कर दी जाए ताकि जब बाहर के गुंडे और मवाली आदिवासी विशेष क्षेत्र में शोषण और अत्याचार को बढ़ावा देंगे. उस वक्त कानून आड़े नहीं आएगा जैसे अपने लोकप्रिय भाजपा सांसद माननीय ब्रिज भूषणशरण सिंह ने कहा कि पास्को का कानून उन्हें तकलीफ दे रहा है तो क्यों ना बदलवा दिया जाए..? उसी तरह रेत माफिया ने यह कानून भाजपा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ मिलकर के बदलवा दिया …
इस विकास में तब मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ क्या करेंगे उनकी कैबिनेट के लिए लोकहित का यह विकास अछूता रह जाएगा. ऐसे हालात में मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ ने निर्णय लिया की आदिवासी क्षेत्र में कैबिनेट ने निर्णय लिया कि प्रदेश में विशेषकर आदिवासी विशेष क्षेत्रों में भी तमाम नदियों की जिसमें रेत के विशाल भंडार पड़े हैं उनके मार्ग प्रवाह मार्ग को भारी मशीन लगा कर के ठेकेदारों के द्वारा पानी का बहाव दूसरी तरफ किया जाएगा ताकि प्राकृतिक संसाधन रेत और पत्थर को निकाल कर के विंध्य प्रदेश के हित में भारी धनराशि रेत माफिया के माध्यम से कमाई जा सके और जो कर्ज विंध्य प्रदेश जो कर्ज लोकहित में लाखों करोड़ों रुपए लिए गए हैं उसका ब्याज का भुगतान किया जा सके.
इस तरह लोकहित में समर्पित निर्णय का करोड़ों रुपए का टेंट लगाकर के ब्लॉक वाइज प्रचार और प्रसार किया जाएगा ताकि आमजन भागीदारी के साथ प्रदेश का संपूर्ण विकास हो सके. मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ के इस निर्णय से लोकहित में भारी उत्साह और उमंग भी सपने में हमने देखा तभी अचानक हमारी नींद टूट गई. और गर्मी के कारण जो लाइट गोल हो गई थी पसीने बह रहे थे.
कुछ ही देर के लिए ही सही सपनों के संसार में विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आनंद और लोकहित का जबरदस्त विकास पूर्ण सपने को प्रस्तावित किया उम्मीद करना चाहिए किसी प्रकार का सपना विंध्यप्रदेश के हर व्यक्ति देखेगा और अपने अपने नेताओं को इसे लागू करने को कहेगा. क्योंकि जन्म और मृत्यु तो सुनिश्चित है और चार्वाक ऋषि ने कहा भी है ऋण लेकर ही पियो पियो भी ग्रित तो उनका अनुगमन करते क्यों ना ऋण लेकर के पिया जाए कुछ इसी प्रकार के नीतियों का अनुमान हमारी कांग्रेस और भाजपा की सरकार के नेता मिलजुलकर माफियाओं के हित में करते दिखाई दे रहे हैं इसे ही सच्चा विकास का रास्ता समझना चाहिए यही हमारी दुर्दशा को मोक्ष की तरफ ले जाएगा.आदिवासी विशेष क्षेत्र के लोग कीड़े मकोड़े हैं आदिवास क्षेत्र को इतनी समझ होती नहीं है इसलिए इन्हें जिस प्रकार का समझा दिया जाए उसी में वह अपना विकास सुनिश्चित करने लगते हैं.
फिर चाहे ₹1000 महीना भीख का परमानेंट व्यवस्था हो अथवा तमाम प्रकार की महान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा में रेवड़ी हो.. थोड़ा सा टुकड़े फेंकने से अगर 81 करोड़ भारत की जनता 5 किलो अनाज से अपना पेट भर लेती है तो इन आदिवासियों का वजूद ही क्या है.. आदिवासी विशेष क्षेत्र के लोगों का वजूद ही क्या है इन्हें भी तो पेट ही भरना है ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों की ज्यादा से ज्यादा लूट नीतिगत तरीके से बाहरी गुंडे और मावाली करके खुलेआम माफिया राज चलाकर के अधिकारियों की सहायता से क्यों ना जल्दी से विंध्य क्षेत्र का विकास कर दिया जाए.
अगर धोखे से विंध्यप्रदेश बन गया तो यह अवसर चूक जाएगा. हो सकता है तब मुख्यमंत्री मूर्ख निकले और वह इन सब पर रोक लगा दे..? ऐसा समझना चाहिए विकास की रफ्तार…… सबका-साथ, सबका-विकास, सबका-विश्वास के साथ लूटना चाहिए… क्योंकि रेत खदान की नीति हो, चाहे सड़क विकास की नीतियां.. इसी दिशा पर चल पड़ी है.. फिलहाल इन्हीं दो मुद्दों पर मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ सपने में बिंद प्रदेश का विकास देखा…क्योंकि जब कोई भी माफिया,धर्म का नकाब पहनकर या राष्ट्रवाद का नकाब पहन कर के बृजभूषण किसी भी महानत्यागी योगी आदित्यनाथ जैसे लोगों जो हिंदू सनातन धर्म ध्वजा को लहरा रहे हैं उन्हें पैरों तले दबा कर रखता है… जिसमें यह ताकत होती है कि वह 1100000 संतो को लाकर अयोध्या के अंदर भगवान राम के स्थापना के पहले ही धर्म की ध्वजा लहरा कर पास्को एक्ट बदलाव आ सकता है अथवा बृजभूषण को पवित्र होने की घोषणा करवा सकता है.. तो फिर कानून की नीतियां मध्यप्रदेश में क्यों नहीं बनवाई जा सकती है… और सपने में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिलोकीनाथ, आदित्यनाथ की तरह अपनी मनमानी क्यों नहीं चला सकते आखिर हर नागरिक को सपना देखने का अधिकार होना ही चाहिए …

